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Hindi News ›   Entertainment ›   Navratri Special Aruna Irani Talks About Courage And Faith Said Learn From Fear And Move Forward With Courage

Navratri Special: ‘डर से सीखो और साहस के साथ आगे बढ़ो’, पढ़ें अरुणा ईरानी की हिम्मत और आस्था की कहानी

Sun, 28 Sep 2025 07:00 AM IST
Kiran Jain किरण जैन
Updated Sun, 28 Sep 2025 07:00 AM IST
सार

Aruna Irani Interview: इस नवरात्रि अमर उजाला आपके लिए 9 दिन, 9 अभिनेत्रियों की 9 कहानियां लेकर आएगा। हर दिन एक देवी को समर्पित होगा। आज नवरात्रि के सातवें दिन माता कालरात्रि की पूजा की जाती है, जो साहस और अंधकार पर विजय की प्रतीक मानी जाती हैं। इस अवसर पर हमने अरुणा ईरानी से बात की।

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Navratri Special Aruna Irani Talks About Courage And Faith Said Learn From Fear And Move Forward With Courage
अरुणा ईरानी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

‘मैंने अपने जीवन में दो बार कैंसर का सामना किया - पहली बार 2015 में और दूसरी बार 2020 में। जब मुझे पहली बार कैंसर का पता चला तो डर तो लगा, लेकिन मैंने कभी डर को अपने जीवन का हिस्सा नहीं बनने दिया। डर से कुछ हल नहीं होता, बस हमारी हिम्मत और विश्वास ही हमें आगे बढ़ने की ताकत देते हैं। मुझे हमेशा लगता था कि मेरी मां मेरे साथ हैं और उनका आशीर्वाद मुझे हर मुश्किल में सहारा देगा। इस भरोसे ने मुझे अंदर से मजबूत बनाया।’

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देवी पाठ और मानसिक तैयारी
‘हर बार जब मैं ऑपरेशन या किसी भी तरह के ट्रीटमेंट के लिए जाती थी तो मैं देवी का पाठ पढ़कर खुद को मानसिक रूप से तैयार करती थी। मुझे लगता था कि मां मेरे साथ हैं और मैं इस मुश्किल से पार कर जाऊंगी। यह सिर्फ पूजा नहीं थी, बल्कि मेरे अंदर की शक्ति और हिम्मत को जगाने का तरीका था।’

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डर को समझना और साहस के साथ आगे बढ़ना
‘मैंने अपनी इस कैंसर की जर्नी में यही सीखा है कि डर को टालने से कुछ नहीं होता। डर को समझो, उससे सीखो और फिर साहस के साथ आगे बढ़ो। सही कदम उठाना जरूरी है और यही सबसे बड़ा इलाज है।’

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अरुणा ईरानी - फोटो : X

नवरात्रि और विश्वास का महत्व
‘मैं 14 साल की उम्र से कभी नवरात्रि मिस नहीं करती। हर साल मैं पूरे नौ दिन उपवास रखती हूं। हां, कभी-कभी ऐसी परिस्थितियां आ गईं कि मैं चाहकर भी उपवास नहीं रख पाई। बचपन में लगता था कि अगर मैं उपवास नहीं रखूंगी तो मां नाराज हो जाएंगी, लेकिन समय के साथ मेरा उन पर और अपने ऊपर भरोसा बढ़ा।’

यह खबर भी पढ़ेंः Navratri Special: ‘अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना ही असली शक्ति है’, स्वरा भास्कर ने सुनाई अपने साहस की दास्तां

बचपन की यादें: गरबा, डांडिया और भक्ति
‘बचपन में हम गांव में गरबा और डांडिया खेलते और माता के भजन गाते थे। ये यादें आज भी मेरे दिल के करीब हैं। गरबा और डांडिया सिर्फ नृत्य नहीं थे, बल्कि भक्ति और उल्लास का संगम थे। अब उम्र की वजह से मैं गरबा या डांडिया नहीं खेल पाती, लेकिन सच कहूं तो बस बचपन की यादें और भजन मुझे वही खुशी और ऊर्जा देते हैं।’

जीवन का संदेश: साहस और विश्वास
‘सबको एक ही संदेश दूंगी कि डर को अपने जीवन का हिस्सा मत बनने दो। हर मुश्किल, चाहे स्वास्थ्य की हो या कोई और संघर्ष, विश्वास और हिम्मत से पार की जा सकती है। मां की शक्ति और अपनी भक्ति ही हमें अंदर से मजबूत बनाती है। विश्वास रखो, साहस रखो और अपने अंदर की शक्ति को जगाओ।

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