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Scam 2003 Review: हंसल ने फिर रचा आर्थिक अपराध का रोचक ताना बाना, तेलगी के किरदार में गगन देव को सौ नंबर
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स्कैम 2003 द तेलगी स्टोरी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
Movie Review
स्कैम 2003 द तेलगी स्टोरी
कलाकार
गगन देव रियार
,
सना अमीन शेख
,
मुकेश तिवारी
,
तलत अजीज
,
भरत जाधव
और
शाद रंधावा
लेखक
संजय सिंह
,
करण व्यास
और
किरण यज्ञोपवीत
निर्देशक
तुषार हीरानंदानी
निर्माता
स्टूडियो नेक्स्ट
और
अप्लॉज एंटरटेनमेंट
रिलीज
1 सितंबर 2023
रेटिंग
3/5
अपराध की ‘मनोहर कहानियों’ में वे कथाएं अलग ही दिलचस्पी जगाती है जिनका ताल्लुक बड़े बड़े घोटालों से होता है। चोरी, डकैती, हत्या, लूटपाट आदि अपराध हिंसक होते हैं। आर्थिक अपराध में इसे सोचने वाले के हाथ पैर कम और दिमाग ज्यादा चलता है। हिंदी सिनेमा में हंसल मेहता ने धीरे धीरे अपना एक अलग सिनेमा विकसित करने की महारत हासिल कर ली है। प्रतीक गांधी का रातोंरात मनोरंजन दुनिया का चर्चित चेहरा बना देने वाली उनकी सीरीज ‘स्कैम 1992’ के बाद ऐसा ही कुछ कुछ ‘स्कैम 2003’ में इसके लीड कलाकार गगन देव रियार के साथ होता दिख रहा है। हिंदी वेब सीरीज में आमतौर पर इन दिनों कहानी सिर्फ कहानी कहने के लिए तलाश ली जा रही है जबकि हंसल मेहता असल घटनाओं के मानवीय पहलू तलाश कर ऐसी कहानियां कह रहे हैं, जिनको तलाश पाना अपने आप में एक बड़ी जीत कही जा सकती है।
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स्कैम 2003 द तेलगी स्टोरी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
फल बेचने वाले की मुंबइया पलटी
देश के चर्चित घोटालों में स्टाम्प पेपर घोटाला इसलिए सबसे ज्यादा चर्चित रहा है क्योंकि इसने सेंध आम आदमी की बजाय सरकार की तिजोरी में लगाई। कर्नाटक का एक युवा जो ट्रेन में तरह तरह के जुमले सुनाकर फल बेच रहा होता है, उस पर मुंबई के एक सेठ की नजर पड़ती है। वजह? फल लपेटने के लिए जो कागज वह इस्तेमाल कर रहा है, वह इस युवक की बी कॉम की डिग्री की फोटो कॉपी है। सपनों का शहर मुंबई उसे बुलाता है। यहां से वह दुबई भी जाता है। उसे लगता है कि फर्जी कागजात पर युवकों को दुबई भेजने का धंधा अच्छा चल सकता है। लेकिन, पकड़ा जाता है। हवालात में उसे एक साथी मिलता है। दोनों मिलकर पहले इस्तेमाल हो चुके रसीदी टिकट बेचने का काम करते हैं और फिर उन्हें समझ आता है कि चोखा धंधा ये नहीं, चोखा धंधा वो है जिसमें ऊपर जाने के लिए कुछ तो ‘डेयरिंग’ करना ही पड़ता है।
देश के चर्चित घोटालों में स्टाम्प पेपर घोटाला इसलिए सबसे ज्यादा चर्चित रहा है क्योंकि इसने सेंध आम आदमी की बजाय सरकार की तिजोरी में लगाई। कर्नाटक का एक युवा जो ट्रेन में तरह तरह के जुमले सुनाकर फल बेच रहा होता है, उस पर मुंबई के एक सेठ की नजर पड़ती है। वजह? फल लपेटने के लिए जो कागज वह इस्तेमाल कर रहा है, वह इस युवक की बी कॉम की डिग्री की फोटो कॉपी है। सपनों का शहर मुंबई उसे बुलाता है। यहां से वह दुबई भी जाता है। उसे लगता है कि फर्जी कागजात पर युवकों को दुबई भेजने का धंधा अच्छा चल सकता है। लेकिन, पकड़ा जाता है। हवालात में उसे एक साथी मिलता है। दोनों मिलकर पहले इस्तेमाल हो चुके रसीदी टिकट बेचने का काम करते हैं और फिर उन्हें समझ आता है कि चोखा धंधा ये नहीं, चोखा धंधा वो है जिसमें ऊपर जाने के लिए कुछ तो ‘डेयरिंग’ करना ही पड़ता है।
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स्कैम 2003 द तेलगी स्टोरी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
हर धंधे का सहारा, नेता तुम्हारा हमारा
वेब सीरीज ‘स्कैम 2003 द तेलगी स्टोरी’ शुरू वहां से होती है जहां अब्दुल करीम तेलगी का नारको टेस्ट चल रहा है। वह अंग्रेजी में जो बात कहता है, उसका मतलब यही है, ‘हर धंधे का सहारा, नेता तुम्हारा हमारा’। इस एक लाइन में इस पूरे गड़बड़ घोटाले का सूत्र छिपा है। व्यवस्था से मदद लेकर व्यवस्था की ही पुंगी बजा देने वाले तेलगी देश में जमाने से भरे पड़े हैं और अब भी हैं। बिना राजनीतिक समर्थन के कोई भी बड़ा आर्थिक घोटाला नहीं हो सकता है, यही इस वेब सीरीज का सार है। विस्तार इसका ये है कि ये सीरीज अपने संवादों और तेलगी बने गगन देव रियार के लिए बरसों तक याद की जाएगी। हंसल मेहता ने अपनी वेब सीरीज और फिल्मों का जो प्रपत्र (टैम्पलेट) तैयार किया है, उसकी झलक यहां भी है। मामला दोहराव का भी लगता है लेकिन हंसल हैं तो एक भरोसा देखने वाले के मन में बना रहता है कि समय भले लग रहा हो लेकिन सब्र का फल मीठा जरूर मिलेगा।
वेब सीरीज ‘स्कैम 2003 द तेलगी स्टोरी’ शुरू वहां से होती है जहां अब्दुल करीम तेलगी का नारको टेस्ट चल रहा है। वह अंग्रेजी में जो बात कहता है, उसका मतलब यही है, ‘हर धंधे का सहारा, नेता तुम्हारा हमारा’। इस एक लाइन में इस पूरे गड़बड़ घोटाले का सूत्र छिपा है। व्यवस्था से मदद लेकर व्यवस्था की ही पुंगी बजा देने वाले तेलगी देश में जमाने से भरे पड़े हैं और अब भी हैं। बिना राजनीतिक समर्थन के कोई भी बड़ा आर्थिक घोटाला नहीं हो सकता है, यही इस वेब सीरीज का सार है। विस्तार इसका ये है कि ये सीरीज अपने संवादों और तेलगी बने गगन देव रियार के लिए बरसों तक याद की जाएगी। हंसल मेहता ने अपनी वेब सीरीज और फिल्मों का जो प्रपत्र (टैम्पलेट) तैयार किया है, उसकी झलक यहां भी है। मामला दोहराव का भी लगता है लेकिन हंसल हैं तो एक भरोसा देखने वाले के मन में बना रहता है कि समय भले लग रहा हो लेकिन सब्र का फल मीठा जरूर मिलेगा।
स्कैम 2003 द तेलगी स्टोरी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
हंसल के एकलव्य बने तुषार
हंसल मेहता वेब सीरीज ‘स्कैम 2003 द तेलगी स्टोरी’ के रचयिता है। निर्देशन इस सीरीज का ‘सांड की आंख’ वाले तुषार हीरानंदानी ने किया है। तुषार ने अपना विकास इस सीरीज के निर्देशन में एकलव्य सरीखा किया है। फ्रेम की ब्लॉकिंग, कैमरे का घुमाव, किरदारों के मनोभावों को पकड़ने का कौशल सब हंसल मेहता सरीखा है। पूरी सीरीज का कलर टैम्पलेट भी इसी लिहाज का रखा गया है कि 20 साल, 40 साल पहले का मुंबई दिखाते हुए मामला कहीं अटपटा न लगने पाए। तुषार का निर्देशन इस सीरीज को रोचक बनाता है। पटकथा हालांकि थोड़ा समय लेती है कहानी को गति में लाने में लेकिन गाड़ी फर्स्ट गियर में जितनी सहजता से आगे बढ़ सके, इंजन फुल स्पीड में आने पर भी उतना ही सहज रहता है और यही इस सीरीज के पहले पांच एपिसोड की जीत है। दूसरे पांच एपिसोड अगले महीने प्रसारित किए जाएंगे।
हंसल मेहता वेब सीरीज ‘स्कैम 2003 द तेलगी स्टोरी’ के रचयिता है। निर्देशन इस सीरीज का ‘सांड की आंख’ वाले तुषार हीरानंदानी ने किया है। तुषार ने अपना विकास इस सीरीज के निर्देशन में एकलव्य सरीखा किया है। फ्रेम की ब्लॉकिंग, कैमरे का घुमाव, किरदारों के मनोभावों को पकड़ने का कौशल सब हंसल मेहता सरीखा है। पूरी सीरीज का कलर टैम्पलेट भी इसी लिहाज का रखा गया है कि 20 साल, 40 साल पहले का मुंबई दिखाते हुए मामला कहीं अटपटा न लगने पाए। तुषार का निर्देशन इस सीरीज को रोचक बनाता है। पटकथा हालांकि थोड़ा समय लेती है कहानी को गति में लाने में लेकिन गाड़ी फर्स्ट गियर में जितनी सहजता से आगे बढ़ सके, इंजन फुल स्पीड में आने पर भी उतना ही सहज रहता है और यही इस सीरीज के पहले पांच एपिसोड की जीत है। दूसरे पांच एपिसोड अगले महीने प्रसारित किए जाएंगे।
स्कैम 2003 द तेलगी स्टोरी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
गगन देव रियार को सौ नंबर
वेब सीरीज ‘स्कैम 2003 द तेलगी स्टोरी’ की कास्टिंग भी इसकी जान है। गगन देव रियार ने बिना किसी आडंबर या कपट के जिस सरलता और सहजता से अब्दुल करीम तेलगी का किरदार उसकी युवास्था से लेकर प्रौढ़ होने तक की अवस्था का निभाया है, वह अभिनय की पाठशाला है। अभिनय किरदार को जी लेने में हैं। किसी दूसरे वास्तविक व्यक्तित्व को अपने में ढाल लेना आसान नहीं है लेकिन गगन ने ये कर दिखाया है और इसके लिए उन्हें अगले साल तमाम ओटीटी अवार्ड्स भी मिलना तय हैं। उनका साथ देने के लिए यहा शाद रंधावा की ऊर्जा है। सना अमीन शेख का यौवन है। तलत अजीज का भरोसा है और है मुकेश तिवारी का सम्मोहन। सोने पर सुहागा है वेब सीरीज ‘स्कैम 2003 द तेलगी स्टोरी’ का बैकग्राउंड म्यूजिक जिसे हंसल मेहता ने सीधे सीधे ‘स्कैम 1992’ से उठा लिया है।
यह भी पढ़ें- Mutant Mayhem Review: अति की वर्जना समझाने की कोशिश करती एक और फिल्म, फ्रेंचाइजी का रंग अब आकर पड़ा फीका
वेब सीरीज ‘स्कैम 2003 द तेलगी स्टोरी’ की कास्टिंग भी इसकी जान है। गगन देव रियार ने बिना किसी आडंबर या कपट के जिस सरलता और सहजता से अब्दुल करीम तेलगी का किरदार उसकी युवास्था से लेकर प्रौढ़ होने तक की अवस्था का निभाया है, वह अभिनय की पाठशाला है। अभिनय किरदार को जी लेने में हैं। किसी दूसरे वास्तविक व्यक्तित्व को अपने में ढाल लेना आसान नहीं है लेकिन गगन ने ये कर दिखाया है और इसके लिए उन्हें अगले साल तमाम ओटीटी अवार्ड्स भी मिलना तय हैं। उनका साथ देने के लिए यहा शाद रंधावा की ऊर्जा है। सना अमीन शेख का यौवन है। तलत अजीज का भरोसा है और है मुकेश तिवारी का सम्मोहन। सोने पर सुहागा है वेब सीरीज ‘स्कैम 2003 द तेलगी स्टोरी’ का बैकग्राउंड म्यूजिक जिसे हंसल मेहता ने सीधे सीधे ‘स्कैम 1992’ से उठा लिया है।
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