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Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Reviews ›   Pune Highway Review in Hindi by Pankaj Shukla Bugs Bhargava Krishna Rahul da Cunha Amit Sadh Jim Sarbh Anuvab

Pune Highway Review: ‘भूल चूक माफ’ से बेहतर फिल्म निकली ‘पुणे हाईवे’, जिम सर्भ और अमित साध ने संभाला

Sat, 24 May 2025 08:25 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Sat, 24 May 2025 08:25 PM IST
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Pune Highway Review in Hindi by Pankaj Shukla Bugs Bhargava Krishna Rahul da Cunha Amit Sadh Jim Sarbh Anuvab
फिल्म 'पुणे हाईवे' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Movie Review
पुणे हाईवे
कलाकार
अमित साध , जिम सर्भ , अनुवब पाल , मंजरी फडनीस , केतकी नारायण और सुदीप मोदक आदि
लेखक
बग्स भार्गव कृष्ण और राहुल दा कुन्हा
निर्देशक
बग्स भार्गव कृष्ण और राहुल दा कुन्हा
निर्माता
राहुल दा कुन्हा और सीमा महापात्र
रिलीज:
23 मई 2025
रेटिंग
2/5
कुछ फिल्में होती हैं जो सिनेमाघर से निकलते वक्त आपको सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि जीवन में अच्छा या बुरा, ये इस पर निर्भर करता है कि इंसान ने अपना जीवन कैसे जीया और कैसे दूसरों संग वह पेश आया। हर हीरो किसी न किसी की कहानी का विलेन होता है और हर लेखक अपनी कहानी में खुद को हीरो ही बनाता है। फिल्म ‘पुणे हाईवे’ इस मायने में एक रोचक फिल्म है कि इसमें सब कुछ श्वेत और श्याम नहीं है, कहानी कुछ कुछ स्याह रास्ते को पकड़कर चलती है। मंथन करने वाली, सवाल खड़े करने वाली और थोड़ा अफसोस करवा देने वाली भी, वो क्यों? बस, थोड़ी देर में आप खुद ही समझ जाएंगे। आगे बढ़ते हैं..! 
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Pune Highway Review in Hindi by Pankaj Shukla Bugs Bhargava Krishna Rahul da Cunha Amit Sadh Jim Sarbh Anuvab
फिल्म 'पुणे हाईवे' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
नाटक पर बनी अति नाटकीय फिल्म
‘पुणे हाईवे’ एक अति नाटकीय फिल्म है, इसकी वजह ये भी हो सकती है कि ये इसी नाम के राहुल दा कुन्हा के लोकप्रिय नाटक पर आधारित है। दा कुन्हा और भार्गव बग्स कृष्ण ने इसी नाटक पर फिल्म लिखी और दोनों ने मिलकर इसे निर्देशित किया है। कहानी के मूल में हत्या का रहस्य है और कहानी बीते हुए समय के तार आज की घटनाओं से जोड़ते हुए चलती है। अरसा पहले तीन दोस्तों ने अपने दोस्त पर एक क्रूर हमला होते देखा। और, वर्तमान में, उन्हें एक नए अपराध से निपटना है। एक प्रभावशाली राजनेता की बेटी मार दी गई है। मोना नामक इस युवती को प्रमोद, विष्णु और निकी तीनों जानते हैं। तीनों उसके कातिल का पता लगाने की कोशिश करते भी दिखते हैं। लेकिन, जैसा कि हर मर्डर मिस्ट्री में होता है, जो दिखता है वह होता नहीं है। 

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Pune Highway Review in Hindi by Pankaj Shukla Bugs Bhargava Krishna Rahul da Cunha Amit Sadh Jim Sarbh Anuvab
फिल्म 'पुणे हाईवे' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

उलझती परतों के साथ खुली फिल्म
नाटकों पर आधारित फिल्मों की हिंदी सिनेमा में लंबी परंपरा रही है, लेकिन नाटक को सिनेमा में तब्दील करना हर किसी के हुनर की बात भी नहीं हैं। यहां भी नाटकीय कहानी ही फिल्म ‘पुणे हाईवे’ की सबसे बड़ी ताकत भी है और सबसे बड़ी कमजोरी भी। माहौल शुरू से ही सस्पेंस तो पैदा करता है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, दर्शकों की उत्सुकता से ज्यादा उनकी थकान बढ़ने लगती है। निर्देशकद्वय कोशिश करते हैं कि कहानी परत दर परत खुले, लेकिन परतें खुलती कम हैं, उलझती ज्यादा हैं। फिल्म की पटकथा इसकी कमजोर कड़ी है, दूसरे फिल्म की कास्टिंग भी ठीक नहीं है। करीब दो घंटे की फिल्म को डी’कुन्हा और भार्गव बग्स कृष्ण ने संभालने की कोशिश पूरी की है, लेकिन स्टेशन से रफ्तार से छूटी ट्रेन थोड़ी ही देर बाद लूप लाइन पर चली जाती है। 

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फिल्म 'पुणे हाईवे' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

जिम और अमित की प्रभावित करने वाली अदाकारी
कलाकारों में ये फिल्म जिम सर्भ और अमित साध की। जिम सर्भ को अरसे बाद कैमरे के सामने देखना अपने आप में ही काफी रोचक लगता है, वह यंग मकरंद देशपांडे की बार बार याद दिलाते हैं। वैसा ही प्रभावी चेहरा और अदाकारी में वैसी ही तैयारी। अमित साध का डील डौल किरदार के हिसाब से थोड़ा ‘ओवर’ है लेकिन उनके चेहरे की थकान उनके किरदार का मचान बन जाती है और दर्शक उनके साथ खुद को जोड़ने लग जाते हैं। बाकी कलाकारों से दर्शकों को खास उम्मीद वैसे भी नहीं रहती है, लेकिन इन सबके बीच मंजरी फडनीस अपनी बढ़ती उम्र के बावजूद अपना जादू चलाने में कामयाब रहती हैं। मंजरी की तरफ भी शक की सुई जाती तो फिल्म के लिए और अच्छा होता, कभी किसी निर्देशक ने उन्हें किसी स्याह किरदार में पेश किया तो देखना रोचक होगा। 

Pune Highway Review in Hindi by Pankaj Shukla Bugs Bhargava Krishna Rahul da Cunha Amit Sadh Jim Sarbh Anuvab
फिल्म 'पुणे हाईवे' और 'भूल चूक माफ' - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

भूल चूक माफ से बेहतर फिल्म
बीते साल गोवा में भारत के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित हो चुकी फिल्म ‘पुणे हाईवे’ में ओटीटी वाली 90 मिनट फिल्म के सारे गुण मौजूद हैं, लेकिन ये फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज करने लायक फिल्म नहीं है। विज्ञापन की दुनिया में काफी शोहरत कमा चुके फिल्म के दोनों निर्देशकों ने इसे स्वात: सुखाय ही बनाया दिखता है क्योंकि राहुल डी कुन्हा का जितना नाम है, वह चाहते तो इस फिल्म की कास्टिंग थोड़ी बेहतर कर सकते थे। तकनीकी रूप से फिल्म में कैमरे, संपादन या संगीत का कोई खास कमाल ऐसा नहीं है कि उसके बारे में अलग से उल्लेख किया जा सके। फिल्म की रिलीज से पहले मार्केटिंग बिल्कुल नहीं हुई है। सिनेमाघरों में वीकएंड पर फिल्में देखने वाले तमाम हिंदी भाषी दर्शकों को ऐसी किसी फिल्म के बारे में पता भी नहीं है, हालांकि ‘पुणे हाईवे’ अपने साथ रिलीज हुई ‘भूल चूक माफ’ से बेहतर फिल्म है।  

 

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