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Khalbali Records Review: अमित की बंदिशें ‘खलबली रिकॉर्ड्स’ की सबसे कमजोर कड़ी, चमक नहीं पाई राम कपूर की लंका

Thu, 12 Sep 2024 12:59 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Thu, 12 Sep 2024 12:59 PM IST
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Khalbali Records Review by Pankaj Shukla Colosceum Prabh Deep Devanshu Singh Ram Kapoor Skand Thakur Saloni
खलबली रिकॉर्ड्स - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
खलबली रिकॉर्ड्स (वेब सीरीज)
कलाकार
स्कंद ठाकुर , सलोनी बत्रा , वरुण भगत , राम कपूर और प्रभ दीप आदि
लेखक
प्रियंका सेतिया , करण मुकेश व्यास , प्रतीक अरोड़ा , समीर सरल शर्मा , आरती रावल , अजयवीर सिंह , गरिमा पुरा पटियालवी , वसंत नाथ , पद्मकुमार नरसिम्हामूर्ति और देवश्री प्रकाश शिवडेकर
निर्देशक
देवांशु सिंह
निर्माता
ललित प्रेम शर्मा
ओटीटी:
जियो सिनेमा
रिलीज:
12 सितंबर 2024
रेटिंग
2/5

ओटीटी के दौर में संगीत की सियासत की कहानियां भी खुलकर बाहर आ रही हैं। बड़े परदे पर संगीत प्रधान फिल्मों की सियासत ‘आशिकी’ का रूप ले चुकी है और यहां एक जानी पहचानी संगीत कंपनी के भीतर की कहानियों को कल्पनाओं का रूप धरकर दर्जन भर के करीब लेखकों ने एक ऐसी वेब सीरीज बना दी है, जिसकी कुछ घटनाएं जानी पहचानी सी दिखती हैं। कुछ बातें ऐसी हैं जो अक्सर मुंबई के गॉसिप गलियारों में सुनी जाती हैं। और, संगीत कंपनियों की इस प्रतिद्वंदिता में इंसानियत कैसे ताक पर रखी जाती है, ये भी जियो सिनेमा की ताजा सीरीज ‘खलबली रिकॉर्ड्स’ में साफ साफ देखा जा सकता है। ये सीरीज सौ फीसदी सच्ची घटनाओं से प्रेरित है और ये बात भले इस सीरीज के डिस्क्लेमर में लिखकर न आती हो लेकिन सीरीज देखने वाले दर्शक को अगर मुंबई और चंडीगढ़ के संगीत उद्योग की बित्ता भर भी जानकारी है तो वह सारे बिम्ब, प्रतिबिम्ब और साबिम्ब समझ जाएगा।

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Khalbali Records Review by Pankaj Shukla Colosceum Prabh Deep Devanshu Singh Ram Kapoor Skand Thakur Saloni
खलबली रिकॉर्ड्स - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

जानी पहचानी सी संगीत कंपनी की कहानी
आठ एपिसोड की वेब सीरीज ‘खलबली रिकॉर्ड्स’ में 20 के करीब गाने हैं। अमित त्रिवेदी को पूरा मौका मिला है यहां अपनी ‘जुबली’ के आगे की यात्रा को नए रास्ते पर ले जाने का। साथ में उनके आजादी रिकॉर्ड्स का भी नाम है। सीरीज देखते समय बार बार वह म्यूजिक कंपनी भी याद आती रहती है, जिसके मालिक का कत्ल सरेबाजार दिन दहाड़े कर दिया गया था। यहां काम उस गायक का तमाम होता है, जिससे ये सारी सियासत शुरू होती है। मामला संगीत का हो तो सारे सुर सही लग रहे हों, ये जरूरी भी नहीं है। अकड़ू मालिकों की अपनी एक भाषा वेब सीरीज लिखने वालों ने गढ़ ली है, और वह यहां भी है। ‘बंदिश बैंडिट्स’ और ‘चमक’ के बाद सीरीज ‘खलबली रिकॉर्ड्स’ में भी कहानी सुरों की साजिशों की है। बस, यहां एक बगावत है। गंदगी के बीच एक बेटे की सब कुछ सही से करने की कोशिश है। लेकिन, ये कोशिश एक मजबूत कहानी के अभाव में बीच सीरीज ही हांफने लगती है।

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Khalbali Records Review by Pankaj Shukla Colosceum Prabh Deep Devanshu Singh Ram Kapoor Skand Thakur Saloni
खलबली रिकॉर्ड्स - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

कास्टिंग से नहीं मची खलबली
वेब सीरीज ‘खलबली रिकॉर्ड्स’ की सबसे बड़ी कमजोरी है इसकी अभिनय टीम में किसी दमदार और प्रयोगवादी कलाकार का शामिल न होना। सारे कलाकार अपना अपना फर्मा लेकर आए हैं। पहली बार उनको फ्रेम में देखते ही दर्शक किरदार का पूरा ग्राफ खुद ही बता सकता है। राम कपूर यहां सबसे सीनियर कलाकार हैं। कोशिश भी वह सीरीज को शुरू से आखिर तक साधे रहने की करते दिखते हैं लेकिन उनकी अपनी अभिनय सीमाएं हैं। और, उनका एक सीमित टीवी दर्शक वर्ग है जिसे ऐसी कहानियों में खास दिलचस्पी होती नहीं है। हां, बगावत का झंडा बुलंद करने वाले बेटे के किरदार में स्कंद ठाकुर जरूर अपनी छाप छोड़ते दिखते हैं। स्कंद का किरदार हालांकि बहुत ही सरल रेखा वाले ग्राफ पर लिखा गया है लेकिन उनकी मेहनत बताती है कि वह आने वाले दिन के कलाकार हैं। मौज के किरदार में प्रभजोत का काम प्रभावी है।

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Khalbali Records Review by Pankaj Shukla Colosceum Prabh Deep Devanshu Singh Ram Kapoor Skand Thakur Saloni
खलबली रिकॉर्ड्स - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

छाप छोड़ने में सफल रहीं प्रियंका ग्रोवर
निर्देशक देवांशु सिंह को जिस एक तकनीशियन से वेब सीरीज ‘खलबली रिकॉर्ड्स’ में सबसे ज्यादा मदद मिली है, वह हैं सीरीज की प्रोडक्शन डिजाइनर प्रियंका ग्रोवर। सीरीज को कितने लोग देखेंगे और कितने लोग याद रखेंगे, इस पर बहस हो सकती है लेकिन सीरीज का टेम्पलेट सेट करने में प्रियंका ग्रोवर ने जो मेहनत की है, वह ओटीटी पर हाल फिलहाल आई वेब सीरीज की तुलना में बेहद कमाल की है। बाकी टीम में सिनेमैटोग्राफी सीरीज की और मेहनत मांगती है। कहीं कहीं तो शायद सिनेमैटोग्राफर को लाइटिंग के लिए पूरा समय ही नहीं मिला है या हो सकता है लाइट टीम की सुस्ती के चलते ऐसा हुआ हो। सीरीज का संपादन और मेहनत मांगता है। लेखन टीम ने भी कुछ कमाल लिखा नहीं है। सीरीज अपने विचार के स्तर पर ही कमजोर कहानी है। संगीत कंपनियों के भीतर की वे सिर्फ वही कहानियां बाहर ला पाएं हैं, जो लोगों को पहले से पता हैं। संगीत की सियासत में कैसे कंपनियों के मालिक अपने ही कर्मचारियों के बच्चों का शोषण करते हैं, कहानी ऐसी कुछ होती तो इसमें नया करंट आ सकता था।

Khalbali Records Review by Pankaj Shukla Colosceum Prabh Deep Devanshu Singh Ram Kapoor Skand Thakur Saloni
खलबली रिकॉर्ड्स - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

संगीत सबसे कमजोर कड़ी
म्यूजिकल वेब सीरीज के तौर पर प्रचारित 'खलबली रिकॉर्ड्स' के भविष्य का अंदाजा इसे बनाने वाली कंपनी वायकॉम 18 को तो पहले से ही रहा है। उनकी कोशिश इस सीरीज को दूसरे ओटीटी पर भी बेचने की रही लेकिन कहीं बात न बनने पर इसे अपने होम ओटीटी जियो सिनेमा पर रिलीज किया गया है। सीरीज की सबसे कमजोर कड़ी इसका म्यूजिक ही है। अमित त्रिवेदी के नाम से इसे देखने का मन बहुत किया लेकिन पूरी सीरीज में चूंकि पंजाबी गानों की भरमार है, लिहाजा धुन पसंद आने पर भी किसी गाने का गुनगुनाने लायक असर भी आखिर में बचता नहीं है।

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