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मैन ऑफ स्टीलः जज्बातों पर भारी दिखी तकनीक

Mon, 17 Jun 2013 04:03 PM IST
रोहित मिश्र
रोहित मिश्र Updated Mon, 17 Jun 2013 04:03 PM IST
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film review of man of steel
सुपरमैन सीरिज की पिछली फिल्मों की तरह ही 'मैन ऑफ स्टील' भी दुनिया को खत्म कर देने और उसे बचाने की सोच रखने वाले दो लोगों की लड़ाई है। जिसे अच्छाई और बुराई के बीच की लड़ाई बनाकर दिखाया जाता है। यह फिल्म सुपरमैन के पृथ्वी पर आने और पृथ्वी को उन लोगों से बचाने की बात करती है जहां से सुपरमैन आया है।

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यह फिल्म अपनी पिछली फिल्मों की प्रीक्वल फिल्म है। यह कहानी क्रिप्टन से सुपरमैन के धरती पर आने और अपनी पहचान जहां तक संभव हो छिपाकर रखने की है। पहचान के खुलने के बाद सुपरमैन की उसी के ग्रह क्रिप्टन के लोगों के साथ जंग की भी कहानी है।
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उकताहट पैदा करती जटिलता

'मैन आफ स्टील' के साथ समस्या यह है कि इंटरवल के पहले तक यह फिल्म सिर्फ सुपरमैन को स्थापित करती रहती है। उसके आने को और आने की वजहों को। अभी न उसके लक्ष्य तय हुए हैं और न ही दुश्मन। पिछली फिल्मों से उलट इस बार सुपरमैन के दुश्मन के लक्ष्य उन दर्शकों को बड़े ही कठिन लगेंगे जिनका सुपरमैन सीरिज की फिल्मों से बहुत ज्यादा वास्ता नहीं रहा है या जो फिल्मों की कहानियों को हॉल से निकलकर भूल जाने पर विश्वास रखते हैं।
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तकनीक की मदद से पैदा की गई यह आपदा कई दर्शकों को अच्छी लगती है लेकिन कुछ दर्शक इस फिल्म से वैसा ही सुकून चाहते हैं जैसा सुपर मैन की दूसरी फिल्मों में उन्हें मिलता रहा है। वह कुछ ठहरकर चीजों को आब्जर्व करके फिर आगे बढ़ना चाहते हैं। यह फिल्म उन्हें ऐसे मौके कम देती है। सुपरमैन की पिछली फिल्मों में जो बात सबसे अच्छी लगती थी वह है कि सुपरमैन का कभी आम आदमी बन जाना तो कभी लाल-नीली पोशाक वाला सुपरमैन।


इस फिल्म में उस तरह के बदलाव के दृश्य़ थोड़े कम हैं। एक व्यक्ति दो किरदार वाले प्रभाव की वजह से ही उसी दौर में दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ धारावाहिक शक्तिमान भी गंगाधर और शक्तिमान के दो रुपों की वजह से हिट हुआ है। स्टीलमैन में दो रूपों वाली यह बात उस तरह की पकड़ लेकर नहीं गयी है। यहां ज्यादा फोकस सुपरमैन की पहचान को छिपाने को लेकर है।

अलग तरह की भावनाएं

भावनात्मक रूप से यह फिल्म उन हिस्सों में अच्छी कही जा सकती है जहां सुपरमैन अपने पृथ्वी के पिता और अपने असली पिता के बीच संवाद कर रहा होता है। खासकर वह दृश्य जब वह पृथ्वी के अपने पिता को सिर्फ इसलिए तूफान से नहीं बचा पाता क्योंकि वह नहीं चाहता कि लोग उसे सुपरमैन के रूप में देखें। इसी तरह क्रिप्टन में मर चुके सुपरमैन के पिता के अपने बेटे के साथ संवाद करने के कुछ द़ृश्य अच्छे हैं।

तकनीकी तौर पर बेहतर

तकनीकी तौर पर यह फिल्म सुपरमैन सीरिज की सबसे काबिल फिल्म है। कंप्यूटर ग्राफिक्स और साउंड इफेक्ट इसे मजेदार और रोचक बनाते हैं। लेकिन भरभरा-भरभरा कर टूटती इमारतें और साउंड के तीखे इफेक्ट कई बार दर्शकों को उकताते भी हैं।


गिर रहीं इमारतों और इमारतों को पीछे-पीछे मुड़-मुड़कर देखते बदहवास चेहरे घिसी-पिटी फीलिंग का एहसास कराते हैं। सुपरमैन और जनरल जोड की हवा में भिड़ंत थ्रीडी में देखने में अच्छी लगती है। इमारतों के टूटने के दृश्य भी कंप्यूटर ग्राफिक्स या एनिमेशन नहीं लगते। इसी तरह से क्रिप्टन ग्रह की डिजाइन और उनकी पोशाकों भी दर्शकों का ध्यान खींचती हैं।

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