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Movie Review: ये है दिल्ली की बदनाम गली, विकी डोनर की रिवर्स स्टोरी में पत्रलेखा ने जमाया रंग
Tue, 14 May 2019 05:22 PM IST
विजय जैन
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Published by: विजय जैन
Updated Tue, 14 May 2019 05:22 PM IST
सार
- Movie Review: बदनाम गली
- कलाकार: पत्रलेखा, दिव्येंदु शर्मा और डॉली अहलूवालिया
- निर्देशक: अश्विन शेट्टी
- ओटीटी: जी5
- रेटिंग: ***
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badnaam gali
- फोटो : मुंबई ब्यूरो
विस्तार
इस फिल्म का नाम ही सीधे सीधे समाज के मुंह पर तमाचा है। मर्द अगर स्पर्म बेचे तो वह विकी डोनर होता है और औरत अगर अपनी कोख किराए पर दे तो ‘डायन’ कहलाती है। हिंदी सिनेमा को भी इस फिल्म से सबक लेना चाहिए। आखिर नयनिका रिसीवर इस फिल्म का नाम क्यों नहीं हो सकता?
मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में जब सरोगेसी के जरिए मां या पिता बनने का ट्रेंड चरम पर है तो जी5 की क्रिएटिव ने बनाई है फिल्म बदनाम गली। वैसे तो मुंबई के मलाड के आसपास ऐसी एक गली हर दूसरी सड़क पर खुलती है क्योंकि वहीं गुजरात से आने वाली महिलाएं किराए का कोख का सबसे बड़ा कारोबार करती हैं। लेकिन, ये कहानी दिल्ली की है।
नयनिका यानी नयन गर्भवती है और उसके घर रोज नोट के बंडल पहुंच रहे हैं। मोहल्ले वालों के पास बिना पैसे के टाइमपास का इससे बढ़िया दूसरा सीन हो भी क्या सकता है भला? कहानी में एंट्री होती है रणदीप की, जिसका कन्फ्यूजन कहानी में कॉमेडी का काम करता है। विकी डोनर और बदनाम गली का सीधा कनेक्शन हैं डॉली अहलूवालिया। उनकी मौजूदगी ही फुलझड़ियां छुड़ाने के लिए काफी है।
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फिल्म बदनाम गली जी5 की कोशिशें फिर वहीं से रफ्तार में ले आती है, जहां पर ये फिल्म शोले गर्ल के बाद रुक गई थीं। पत्रलेखा कमाल की अदाकारा हैं। कोख को किराए पर देकर भी जिस अंदाज में नयनिका का चेहरा दमकता है, वह पत्रलेखा के ही बस की बात है। अश्विन शेट्टी की ये फिल्म पत्रलेखा और डॉली दोनों के लिए मील का पत्थर है। दिव्येंदु के साथ दिक्कत ये है कि वह नुक्कड़ के रंगबाज बनें या कुछ और, उनके चेहरे के भाव नहीं बदलते।
जी5 ओरीजनल्स की क्रिएटिव टीम इसी तरह अच्छी और देसी कहानियां चुनती रही तो नेटफ्लिक्स और प्राइम वीडियो ओरीजनल्स की आने वाले दिनों में मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। अमर उजाला डॉट कॉम के मूवी रिव्यू में फिल्म बदनाम गली को मिलते हैं तीन स्टार।
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मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में जब सरोगेसी के जरिए मां या पिता बनने का ट्रेंड चरम पर है तो जी5 की क्रिएटिव ने बनाई है फिल्म बदनाम गली। वैसे तो मुंबई के मलाड के आसपास ऐसी एक गली हर दूसरी सड़क पर खुलती है क्योंकि वहीं गुजरात से आने वाली महिलाएं किराए का कोख का सबसे बड़ा कारोबार करती हैं। लेकिन, ये कहानी दिल्ली की है।
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नयनिका यानी नयन गर्भवती है और उसके घर रोज नोट के बंडल पहुंच रहे हैं। मोहल्ले वालों के पास बिना पैसे के टाइमपास का इससे बढ़िया दूसरा सीन हो भी क्या सकता है भला? कहानी में एंट्री होती है रणदीप की, जिसका कन्फ्यूजन कहानी में कॉमेडी का काम करता है। विकी डोनर और बदनाम गली का सीधा कनेक्शन हैं डॉली अहलूवालिया। उनकी मौजूदगी ही फुलझड़ियां छुड़ाने के लिए काफी है।
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फिल्म बदनाम गली जी5 की कोशिशें फिर वहीं से रफ्तार में ले आती है, जहां पर ये फिल्म शोले गर्ल के बाद रुक गई थीं। पत्रलेखा कमाल की अदाकारा हैं। कोख को किराए पर देकर भी जिस अंदाज में नयनिका का चेहरा दमकता है, वह पत्रलेखा के ही बस की बात है। अश्विन शेट्टी की ये फिल्म पत्रलेखा और डॉली दोनों के लिए मील का पत्थर है। दिव्येंदु के साथ दिक्कत ये है कि वह नुक्कड़ के रंगबाज बनें या कुछ और, उनके चेहरे के भाव नहीं बदलते।
जी5 ओरीजनल्स की क्रिएटिव टीम इसी तरह अच्छी और देसी कहानियां चुनती रही तो नेटफ्लिक्स और प्राइम वीडियो ओरीजनल्स की आने वाले दिनों में मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। अमर उजाला डॉट कॉम के मूवी रिव्यू में फिल्म बदनाम गली को मिलते हैं तीन स्टार।