फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Review ›   'Anarkali of Aarah' movie review, Swara Bhaskar, Sanjay Mishra, show time

'पिंक' का ग्रामीण वर्जन है 'अनारकली ऑफ आरा'

Sat, 25 Mar 2017 09:57 AM IST
रवि बुले
रवि बुले Updated Sat, 25 Mar 2017 09:57 AM IST
विज्ञापन
'Anarkali of Aarah' movie review, Swara Bhaskar, Sanjay Mishra, show time
'अनारकली ऑफ आरा' के एक सीन को समझतीं स्वरा भास्कर
अनारकली ऑफ आरा ऐसी गायिका की कहानी है, जो मंच पर द्विअर्थी गीत गाती है। क्या पेशा उसके चाल-चलन और चरित्र के सुबूत देता है? क्या उसकी गायकी कला के दायरे से बाहर है? अनारकली कहती है कि ‘दूध के धुले तो हम भी नहीं हैं’ परंतु इसका यह मतलब नहीं कि वह सार्वजनिक संपत्ति है।
विज्ञापन


पिछले दिनों फिल्म ‘पिंक’ ने महानगरीय-विकसित समाज की कहानी द्वारा ठोस ढंग से कहा था कि स्त्री की ‘ना’ का अर्थ सिर्फ ‘ना’ है।
विज्ञापन


अनारकली ऑफ आरा यह बात विकास और विचार की राह में कुछ पिछड़े समझे जाने वाले हिंदी प्रदेश से कहती हुई, यह भी जोड़ती है कि स्त्री के पेशे से उसके शील-कुल का आकलन न करें।
विज्ञापन
विज्ञापन

पढ़ें: कैसी है 'अनारकली ऑफ आरा'

'Anarkali of Aarah' movie review, Swara Bhaskar, Sanjay Mishra, show time
'अनारकली ऑफ आरा' में स्वरा भास्कर
बॉलीवुड में बीते वर्षों में कुछ नायिकाओं ने अपने काम से छाप छोड़ी है। इनमें स्वरा भास्कर शामिल हैं। पिछले साल वह फिल्म निल बटे सन्नाटा में सशक्त ढंग से मौजूद थीं। अनारकली ऑफ आरा में वह जबर्दस्त ढंग से छाई हैं।

जब-जब वह अपने हक में खड़ी होती हैं, सशक्त और सुंदर दिखती हैं। उनका अभिनय फिल्म देखने की ठोस वजह है। कहीं-कहीं वह संजय मिश्रा जैसे मंजे कलाकार पर भारी हैं।

संजय आरा विश्वविद्यालय के ऐसे कुलपति के रोल में हैं, जिसका दिल अनारकली के लिए धड़कता है और वह एक कार्यक्रम में मंच पर उसे अपनी बांहों में लेने के लिए मचल उठता है।

अकारकली प्रतिरोध करती है और उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराना चाहती है।

यहीं से उसके लिए संकटों का दौर शुरू होता है। काम की जगहों पर स्त्रियों के यौन उत्पीड़न के विरुद्ध इधर आवाजें काफी मुखर हैं। क्या मंच एक गायिका का कार्यस्थल नहीं?

स्त्री विमर्श की बुलंद आवाज है 'अनारकली ऑफ आरा'

'Anarkali of Aarah' movie review, Swara Bhaskar, Sanjay Mishra, show time
'अनारकली ऑफ आरा' में स्वरा भास्कर
पत्रकार से निर्देशक बने अविनाश दास ने अनारकली की कहानी के लिए एक सच्ची घटना समेत राजकपूर-वहीदा रहमान अभिनीत तीसरी कसम से प्रेरणा ली है। अपनी पहली फिल्म में वह स्त्री विमर्श के नए ‘हीरामन’ जैसे सामने आते हैं।

फिल्म में इश्तियाक खान के एक म्यूजिक कंपनी में मैनेजरी वाले किरदार को उन्होंने हीरामन नाम दिया है, जो अनारकली को मुश्किल दौर से बाहर निकलने में मदद करता है। आरा की इस अनारकली का गीत-संगीत कहानी की संवेदना से गुंथा है।

संवाद कहीं चुटीले और कहीं चोट करने वाले हैं। कहानी में कसावट के बावजूद किरदारों के चित्रण की कुछ समस्याएं जरूर हैं। खास तौर पर बैंड पार्टी चलाने वाले रंगीला (पंकज त्रिपाठी) का किरदार बीच में अचानक खत्म हो जाता है।

महानगरों-नगरों के दर्शकों के लिए फिल्म की यूपी-बिहार की ठेठ भाषा कुछ अड़चन पैदा कर सकती है। अगर आप नए स्त्री विमर्श के सिनेमा में रुचि रखते हैं तो यह फिल्म एक बुलंद आवाज की तरह महसूस होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें Entertainment News से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे Bollywood News, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट Hollywood News और Movie Reviews आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed