Aam Aadmi Family S4 Review: सास-बहू के धारावाहिकों को टीवीएफ ने दिखाया आईना, बृजेंद्र व लुबना का शानदार अभिनय
देसी मनोरंजन सामग्री बनाने वाली कंपनी टीवीएफ के बीच हुए करार के तहत ‘द आम आदमी फैमिली’ का चौथा सीजन देसी ओटीटी जी5 पर रिलीज हुआ है। बिना किसी प्रचार के। बिना किसी प्रसार के। और, मुंबई की पीआर एजेंसियों ने हवा कुछ ऐसी बनाई हुई है कि जिस फिल्म, टीवी सीरियल और सीरीज का प्रचार न हो, उसके बारे में समीक्षकों की भी अपनी एक धारणा बन जाती है। फिर न उसके रिव्यू गंभीरता से लिखे जाते हैं और न ही फिल्म या सीरीज को ही गंभीरता से लिया जाता है। ये मौजूदा दौर की बलिहारी है। ‘टाइगर 3’ को एक ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित करने की जी तोड़ कोशिशों के बीच चुपचाप रिलीज हो चुकी है वेब सीरीज ‘द आम आदमी फैमिली सीजन 4’। जिन लोगों ने इसके पहले के तीन सीजन देखे हुए हैं, वे तो इसे देखेंगे ही, इसे हर उस परिवार को भी देखना चाहिए, जहां भाइयों के बीच अनबन है, जहां बेटियों की घर के अहम फैसलों में राय नहीं ली जाती और जहां देवरानी-जेठानी की एक अलग खिचड़ी पकती रहती है। प्रेम का पहला मूल मंत्र है, ‘तत् सुखे सुखे त्वम्’ और इस एक मूल मंत्र के सहारे पारिवारिक प्रेम की नई व्याख्या करती ये सीरीज इस साल की हास्य वेब सीरीज में नंबर वन है।
शर्माजी की आम आदमी फैमिली
कहानी दिल्ली में बसे पंजाबी शर्मा परिवार की है और इस बार कहानी शुरू होती है घर की मुखिया दादी के गुजर जाने से। तेरहवीं की तैयारियां चल रही हैं। घर का बड़ा बेटा सारी तैयारियां अपने ऊपर ओढ़ चुका है। उसका बेटा कुछ कहना भी चाहता है तो पिता सुनता नहीं है। फिर बीच रास्ते पिता-पुत्र में गर्मागर्मी होती है और कहानी आगे बढ़ती है। औसतन तीस मिनट के आठ एपिसोड की ये सीरीज इसके बाद देखने वाले को चैन नहीं लेने देती और इसे एक बार शुरू करके पूरा देखे बिना उठने का मन नहीं होता। घर की बुजुर्ग महिला के निधन से लेकर सातवें महीने में बड़े बेटे और बहू की 30वीं मैरिज एनिवर्सरी तक फैली इस कहानी में वह सब कुछ है, जो टेलीविजन पर प्रसारित होते रहे सास-बहू के धारावाहिकों से लापता रहा है। इन टेलीविजन धारावाहिकों ने भारतीय परिवारों में जो ‘जहर’ घोला है, उसका ये सीरीज एक तरह का डिटॉक्स है। बेटी और बेटे में फर्क, सेवानिवृत्ति के बाद भी अपनी पत्नी को फिर से पढ़ाने का जज्बा, बैंकों की कार्यप्रणाली, भाइयों के बीच संपत्ति को लेकर विवाद से लेकर सास के छोड़े जेवर तक के बंटवारे की कहानी के जरिये ये सीरीज एक ऐसा खाका एक मध्यम वर्ग परिवार का खींचती है, जिसे देखना बहुत जरूरी है।
बृजेंद्र काला के अभिनय का शीर्ष
‘आम आदमी फैमिली’ वेब सीरीज अपने दो मुख्य कलाकारों बृजेंद्र काला और लुबना सलीम के अभिनय का उत्कर्ष बिंदु रही है। इस सीजन में ये दोनों कलाकार अपने अभिनय के शिखर पर आ पहुंचे हैं। एक सेवानिवृत्त कर्मचारी का चिड़चिड़ापन उसके मानसिक अवसाद के चलते आया है, लेकिन वह ये मानने को तैयार नहीं। अपनी मन की बात वह जब डायरी में लिखना शुरू करता है और ये डायरी जब उसकी पत्नी पढ़ती है, तो रिश्तों में पड़ चुकी गांठें खुलनी शुरू होती है। बृजेंद्र काला ने इस सेवानिवृत्त कर्मचारी के रूप में अपने करियर का बेहतरीन अभिनय किया है। तिग्मांशु धूलिया की फिल्म ‘हासिल’ से हिंदी फिल्मों में 20 साल पहले अपनी अभिनय यात्रा शुरू करने वाले बृजेंद्र काला कितने काबिल कलाकार है, ये वेब सीरीज एक बार फिर साबित करती है। मां के बिस्तर पर बैठकर रोने वाला दृश्य हो या फिर पत्नी का वॉयस मैसेज आने पर हाथ में दवा लेकर उसे उत्तर भेजने वाला दृश्य, बृजेंद्र काला ने हर बार देखने वाले को भावुक कर देने वाला काबिले तारीफ अभिनय किया है।
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लुबना का मन लुभा लेने वाला अभिनय
स्कूल की टॉपर रही एक छात्रा अपना परिवार बसाने के लिए कैसे अपनी पढ़ाई का मोह त्याग देती है और कैसे वह हर दिन एक परिवार की अनबन को साधने के लिए एक सूत्रधार बनकर सामने आती है, इस किरदार में लुबना सलीम का अभिनय भी बृजेंद्र काला के समकक्ष ही है और कई बार उनसे बेहतर भी होता दिखता है। सास की अलमारी से मिले सोने के हार के साथ मिली चिट्ठी में जब ये लिखा मिलता है कि ‘ये मेरी बहू के लिए है’ और जब वह इसे अपनी देवरानी को देने की कोशिश करती है तो देवरानी-जेठानी और ननद की वार्तालाप के इस दृश्य में असल भारतीय संस्कार दर्शाने में लुबना सलीम दर्शकों के दिल जीत लेती हैं। सास के जाने के बाद अपने पति को उनकी रिकॉर्डेड आवाज सुनाने वाला वह दृश्य भी बहुत भावुक है जब सास कहती है कि बहू कभी तो मौका दे कि मैं तेरी भी चुगली कर सकूं। बृजेंद्र काला और लुबना सलीम के अलावा सीरीज में बॉबी बने चंदन आनंद, सोनू बनीं साधिका सयाल, जैजी बने सचिन कथूरिया और बिंद्रा बने सुधीर चोबेसी ने भी सीरीज को चारों कोनों से बहुत बढ़िया साधा है।
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अपूर्व सिंह कर्की का बोया बीज
ओटीटी पर अपराध कथाओं का दौर बीत रहा है। हर ओटीटी को समझ आ चुका है कि अनावश्यक हिंसा, संभोग के दृश्यों और बिना मतलब की गालियों से हिंदुस्तानी दर्शक सिर्फ चार साल में ऊब चुका है। अब दर्शकों को जैसी कहानियां भा रही हैं, वैसी ही कहानी है वेब सीरीज ‘द आम आदमी फैमिली’ के चौथे सीजन की। बीते दिन फिल्मफेयर ओटीटी अवार्ड्स में सबसे ज्यादा पुरस्कार जीतने वाली फिल्म ‘सिर्फ एक बंदा काफी है’ के निर्देशक अपूर्व सिंह कर्की ने इस कहानी का बीज सात साल पहले बोया था। अब ये पेड़ बरगद बन चुका है और इसकी छाया को साकेत शर्मा और स्वर्णदीप बिस्वास जैसे लेखकों ने और घनी करने की जिम्मेदारी बखूबी निभाई है। सीरीज की कहानी, इसकी पटकथा और इसके संवाद बेहतरीन हैं। खास तौर से शर्माजी और उनके बेटे बॉबी के बीच होने वाले संवाद इस सीरीज की जान हैं तो शर्माजी और उनके छोटे भाई जैजी के बीच की तनातनी कहानी का तनाव कायम रखती है। घर की दोनों बेटियां शर्माजी की बहन गुड्डो और शर्माजी की बेटी सोनू भारतीय परिवारों में बेटियों को लेकर चली आ रही अवधारणों को बदलने का काम बहुत ही सहज तरीके से करती हैं।
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हिमाली को मिली टीम से हिम्मत
वेब सीरीज ‘आम आदमी फैमिली’ के चौथे सीजन के निर्देशन की जिम्मेदारी हिमाली शाह ने संभाली है। सूर को सुर बोलने और दिल्ली में स्कूटर की सवारी बिना हेलमेट करने, चौथे और तेरहवीं के बीच होने वाले संस्कारों की गड़बड़ी को छोड़ दें तो हिमाली का निर्देशन इस सीरीज में बहुत ठहराव वाला रहा है। उनके निर्देशन के सुर बहुत सरलता से एक दृश्य से दूसरे दृश्य में बहते हुए मिलते जाते हैं। उनका रेफरेंस प्वाइंट इस सीरीज का जो भी रहा हो लेकिन अपने प्रस्तुतिकरण में उन्होंने इस सीरीज को ‘हम लोग’ और ‘देख भाई देख’ के सम्मिश्रण की तरह बहुत करीने से और बहुत सजाकर दर्शकों के सामने पेश किया है। अपने इस कौशल में हिमाली को सीरीज की तकनीकी टीम से भी बहुत मदद मिलती है। सिनेमैटोग्राफर जॉर्जी जॉन ने सीमित भौगोलिक क्षेत्र में भी अपनी कैमरा बहुत होशियारी से घुमाया है। तुषार मनोचा का संकलन ऐसा है कि कहीं कोई दृश्य न तो अनावश्यक लंबा महसूस होता है और न ही कहीं किसी दृश्य को देखते हुए झटका ही लगता है। तुषार मलेक का बैकग्राउंड म्यूजिक अच्छा है। सीरीज में एक दो अच्छे गाने और होते तो सोने पर सुहागा हो जाता। एक मध्यमवर्गीय परिवार की वेशभूषा को संजोने में यशिका कक्कड़ ने भी नोटिस करने लायक बढ़िया काम किया है। बिंज वॉच करने लायक ये एक बढ़िया सीरीज है और कार्यदिवसों में भी अगर इसे आप एक एक एपिसोड करते देखते रहेंगे तो हफ्ते भर आपका मूड शानदार रहेगा।