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8AM Metro Review: गुलजार की कविताओं में मिला कैनवस का किनारा, सैयामी खेर और गुलशन का दिल छू लेने वाला अभिनय

Thu, 18 May 2023 08:38 PM IST
रुपाली रामा जायसवाल अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: रुपाली रामा जायसवाल Updated Thu, 18 May 2023 08:38 PM IST
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8AM Metro Review film directed by Raj Rachakonda saiyami kher gulshan devaiah acting won hearts
8 AM मेट्रो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Movie Review
8 A M मेट्रो
कलाकार
सैयामी खेर , गुलशन देवैया , उमेश कामत , कल्पिका गणेश और निमिशा नायर
लेखक
श्रुति भटनागर और राज राचकोंडा
निर्देशक
राज राचकोंडा
निर्माता
किशोर गंजी और राज राचकोंडा
रिलीज
19 मई 2023
रेटिंग
2.5/5

किसी किताब के दो पन्ने पढ़ने में अगर दिलचस्पी न पैदा हो तो इसका मतलब यह नहीं कि पूरी किताब ही फेंक दी जाए। जिंदगी का फलसफा बस ऐसे ही है। अक्सर लोगकुछ पल के लिए रिश्ते में आई कड़वाहट की वजह से जिंदगी में साथ बिताए तमाम खुशियों के पल को भूल कर सिर्फ उस कड़वाहट को आत्मसात कर लेते हैं। और, जिंदगी बेरंग बन जाती है। लेकिन, अगर इंसान चाहे तो हर पल खुश रहने के तरीके ढूंढ सकता है। फिल्म '8 AM मेट्रो' में इसी बात को बहुत ही गहराई के साथ पेश किया गया है।

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8AM Metro Review film directed by Raj Rachakonda saiyami kher gulshan devaiah acting won hearts
8 AM मेट्रो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म '8 AM मेट्रो' की पूरी कहानी सैयामी खेर और गुलशन देवैया के इर्द गिर्द घूमती है। सैयामी खेर ने  एक मराठी महिला इरावती का किरदार निभाया है जो नांदेड़ से हैदराबाद अपनी गर्भवती बहन की देखरेख के लिए जाती है। इरावती को अपनी पिछली घटना के कारण ट्रेन में अकेले यात्रा करने में डर लगता है। लेकिन, मेट्रो से अस्पताल जाने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है। मेट्रो ट्रेन में उसकी मुलाकात एक अजनबी से होती है। धीरे धीरे दोनों में दोस्ती होती है और दोनों एक दूसरे को सांत्वना देते है, एक दूसरे से प्यार करने लगते हैं। लेकिन दोनों शादीशुदा हैं। फिर इन दोनों के बीच जो है वह क्या वाकई प्रेम है या एक दूसरे के प्रति पैदा हुआ दयाभाव? फिल्म '8 AM मेट्रो' इसी बारीक लकीर को प्रेम की डगर बनाने की कोशिश करती फिल्म है।

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8AM Metro Review film directed by Raj Rachakonda saiyami kher gulshan devaiah acting won hearts
8 AM मेट्रो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म '8 AM मेट्रो' में दिखाया गया है कि काम के दबाव के चलते इंसान अपने परिवार को वक्त नहीं दे पाता है। उधर, बचपन की घटना से इरावती के अंदर ऐसा डर समा गया है कि उसे ट्रेन में अकेले यात्रा करने से डर लगता है। काम के दबाव के चलते उसके पति के पास इतना समय नहीं नही कि वह अपनी पत्नी को हैदराबाद उसकी बहन के पास छोड़कर आए। इरावती के बहन का पति विदेश में नौकरी करता है और काम के दबाव के वजह से अपनी प्रेगनेंट बीवी से मिलने नहीं आ पाता। ऐसे समय में जब किसी महिला के जीवन में किसी दूसरे मर्द की दस्तक होती है तो वह अपनी भावनाओं पर नियंत्रण खो देती है। फिल्म '8 AM मेट्रो' के माध्यम से निर्देशक राज राचकोंडा ने अवसाद, मानसिक दबाव, उत्तेजना जैसे बिंदुओं को समझदारी तरीके से पेश करने की कोशिश की है।

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8AM Metro Review film directed by Raj Rachakonda saiyami kher gulshan devaiah acting won hearts
8 AM मेट्रो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म '8 AM मेट्रो' के निर्देशक राज राचकोंडा ने फिल्म में आंखों की भाषा का बहुत सही इस्तेमाल किया है। फिल्म में ऐसे कई दृश्य आते है जहां सैयामी खेर ने अपनी आंखो से ऐसी बात कह दी जिसे शायद शब्दों मे बयां नहीं किया जा सकता है। फिल्म में मेट्रो ट्रेन भी एक खास किरदार की तरह है लेकिन मेट्रो ट्रेन को जिस तरह से फिल्म में महिमामंडित किया गया है, उसे देखकर लगता है कि जैसे मेट्रो ट्रेन को कुछ ज्यादा ही तवज्जो दी जा रही हैं।

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8AM Metro Review film directed by Raj Rachakonda saiyami kher gulshan devaiah acting won hearts
8 AM मेट्रो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

कारोबारी लिहाज से भले फिल्म '8 AM मेट्रो' का भविष्य सिनेमाघरों में उज्ज्वल न हो क्योंकि ऐसी कवितामयी फिल्में देखने का आनंद अब दर्शक ओटीटी पर ही अधिक लेते हैं। फिल्म की धुरी बनी इरावती को कविताएं लिखने और पढ़ने का बहुत शौक है। वह गुलजार की लिखी कविताएं भी पढ़ती रहती हैं, ‘कभी -कभी दो लोग रात में गुजरने वाले  जहाज की तरह होते हैं, जो संयोग से एक दो बार मिलते हैं और फिर जिंदगी में कभी नहीं मिलते।’ फिल्म में इस बात को भी बहुत प्रमुखता से दिखाया गया हैं कि जिसके अंदर खुद कमियां हो वह दूसरों के बारे में धारणाएं बनाने का अधिकारी है। लेकिन हर इंसान की अपनी एक खूबी होती है, इस बात से भी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है।

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8AM Metro Review film directed by Raj Rachakonda saiyami kher gulshan devaiah acting won hearts
8 AM मेट्रो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म में गुलजार साहब की कविताओं के अलावा निर्वान अथर्य के संगीतबद्ध किए गीत  'ऐ खुदा',  'घूमे' और  'वो खुदा'  भी कर्णप्रिय हैं। फिल्म '8 AM मेट्रो' अपनी रफ्तार पाने में लंबा समय लेती है और इसी के चलते फिल्म का शुरुआती हिस्सा बोझिल हो गया है। फिल्म संपादक अनिल अलायम की ये चूक फिल्म पर भारी है। सिनेमैटोग्राफी अच्छी है। सनी कुरापति ने नांदेड़ और हैदराबाद का अच्छा इस्तेमाल किया है। सीमित बजट में फिल्म के निर्देशक राज राचकोंडा ने एक संवेदनशील फिल्म बनाने की कोशिश की है। सायमी खेर और गुलशन देवैया अपने सहज अभिनय से सिनेमा की समझ रखने वालों पर असर छोड़ती दिखती हैं। फिल्म की श्रेणी कलात्मक कथन की है और इस लिहाज से मसाला फिल्में देखने के शौकीनों को फिल्म सुस्त लग सकती है।

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