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Bal Karve Death: नहीं रहे 'गुंड्याभाऊ' का रोल करने वाले अभिनेता बाल कर्वे, 95 साल की उम्र में ली अंतिम सांस
Fri, 29 Aug 2025 11:39 AM IST
हिमांशु सोनी
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: हिमांशु सोनी
Updated Fri, 29 Aug 2025 11:39 AM IST
सार
Bal Karve Passed Away: मराठी एक्टर बाल कर्वे ने 95 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया है।
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बाल कर्वे
- फोटो : एक्स
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विस्तार
मराठी रंगमंच और टेलीविजन जगत ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया है, जिसने अपनी सादगी और अदाकारी से दर्शकों के दिलों में हमेशा के लिए जगह बना ली। वरिष्ठ अभिनेता बाल कर्वे का 95 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हो गया।
बचपन से ही कला के प्रति लगाव
पुणे में जन्मे बालकृष्ण कर्वे को लोग प्यार से 'बाल' कहकर बुलाते थे। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और मुंबई महानगरपालिका में 32 वर्षों तक बतौर इंजीनियर सेवाएं दीं। दिलचस्प यह है कि नौकरी की व्यस्तताओं के बावजूद उनका झुकाव हमेशा रंगमंच की ओर रहा। थिएटर उनके लिए सिर्फ शौक नहीं, बल्कि जुनून था, जिसे उन्होंने पूरी शिद्दत से जिया।
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‘गुंड्याभाऊ’ बनकर घर-घर में पहचान
साल 1979 में मराठी टेलीविजन पर प्रसारित शो चिमणराव ने बाल कर्वे को रातोंरात मशहूर कर दिया। इसमें उन्होंने निभाया था गुंड्याभाऊ का किरदार। उनकी कॉमिक टाइमिंग और सहज अभिनय ने दर्शकों को इतना प्रभावित किया कि शो के खत्म होने के वर्षों बाद भी लोग उन्हें उसी नाम से पुकारते रहे। यह किरदार पहले किसी और अभिनेता को मिलने वाला था, मगर बाल कर्वे के अभिनय ने इसे अमर बना दिया।
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बचपन से ही कला के प्रति लगाव
पुणे में जन्मे बालकृष्ण कर्वे को लोग प्यार से 'बाल' कहकर बुलाते थे। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और मुंबई महानगरपालिका में 32 वर्षों तक बतौर इंजीनियर सेवाएं दीं। दिलचस्प यह है कि नौकरी की व्यस्तताओं के बावजूद उनका झुकाव हमेशा रंगमंच की ओर रहा। थिएटर उनके लिए सिर्फ शौक नहीं, बल्कि जुनून था, जिसे उन्होंने पूरी शिद्दत से जिया।
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‘गुंड्याभाऊ’ बनकर घर-घर में पहचान
साल 1979 में मराठी टेलीविजन पर प्रसारित शो चिमणराव ने बाल कर्वे को रातोंरात मशहूर कर दिया। इसमें उन्होंने निभाया था गुंड्याभाऊ का किरदार। उनकी कॉमिक टाइमिंग और सहज अभिनय ने दर्शकों को इतना प्रभावित किया कि शो के खत्म होने के वर्षों बाद भी लोग उन्हें उसी नाम से पुकारते रहे। यह किरदार पहले किसी और अभिनेता को मिलने वाला था, मगर बाल कर्वे के अभिनय ने इसे अमर बना दिया।
रंगमंच पर दमदार सफर
बाल कर्वे ने मराठी रंगमंच में भी अपनी कला का जादू बिखेरा। उन्हें थिएटर की दुनिया के दिग्गजों विजया मेहता और विजया जोगलेकर-धूमाले का मार्गदर्शन मिला। उन्होंने रथचक्र, तांदूल भक्त भक्त, मनोमणी और कुसुम मनोहर लेले जैसे चर्चित नाटकों में अपनी प्रतिभा से दर्शकों को प्रभावित किया। खास बात यह रही कि उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत बच्चों के लिए बनाए गए किलबिल बालरंगमंच से की, जहां उन्होंने कई यादगार प्रस्तुतियां दीं।
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पारिवारिक जीवन और अंतिम सफर
हाल ही में बाल कर्वे ने अपना 95वां जन्मदिन मनाया था। गुरुवार सुबह करीब 10:15 बजे मुंबई के विले पार्ले स्थित उनके आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली।
मराठी जगत में अपूरणीय क्षति
बाल कर्वे ने अपने लंबे करियर में जितना रंगमंच और टेलीविजन को दिया, वह आज भी दर्शकों की यादों में जीवित है। उनका जाना मराठी कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। कलाकार आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन कुछ किरदार और उनके पीछे की शख्सियतें हमेशा अमर हो जाती हैं- बाल कर्वे उसी श्रेणी में आते हैं।
बाल कर्वे ने मराठी रंगमंच में भी अपनी कला का जादू बिखेरा। उन्हें थिएटर की दुनिया के दिग्गजों विजया मेहता और विजया जोगलेकर-धूमाले का मार्गदर्शन मिला। उन्होंने रथचक्र, तांदूल भक्त भक्त, मनोमणी और कुसुम मनोहर लेले जैसे चर्चित नाटकों में अपनी प्रतिभा से दर्शकों को प्रभावित किया। खास बात यह रही कि उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत बच्चों के लिए बनाए गए किलबिल बालरंगमंच से की, जहां उन्होंने कई यादगार प्रस्तुतियां दीं।
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पारिवारिक जीवन और अंतिम सफर
हाल ही में बाल कर्वे ने अपना 95वां जन्मदिन मनाया था। गुरुवार सुबह करीब 10:15 बजे मुंबई के विले पार्ले स्थित उनके आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली।
मराठी जगत में अपूरणीय क्षति
बाल कर्वे ने अपने लंबे करियर में जितना रंगमंच और टेलीविजन को दिया, वह आज भी दर्शकों की यादों में जीवित है। उनका जाना मराठी कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। कलाकार आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन कुछ किरदार और उनके पीछे की शख्सियतें हमेशा अमर हो जाती हैं- बाल कर्वे उसी श्रेणी में आते हैं।