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जब पहली बार मनीष मल्होत्रा ने मां से कही फैशन डिजाइनर बनने की बात, मां ने पूछा- 'तो तुम दर्जी बनोगे?'
Wed, 03 Dec 2025 10:56 PM IST
हिमांशु सोनी
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: हिमांशु सोनी
Updated Wed, 03 Dec 2025 10:56 PM IST
सार
Manish Malhotra Shares His Journey: मनीष मल्होत्रा हाल ही में एक कार्यक्रम में नजर आए। इस दौरान उन्होंने अपनी जिंदगी के कई पहलुओं पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि उनका सफर कैसे एक फैशन डिजाइनर के तौर पर शुरु हुआ। उन्होंने एक मजेदार वाक्या भी साझा किया।
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मनीष मल्होत्रा
- फोटो : एक्स
विस्तार
फैशन की दुनिया में कुछ कहानियां केवल सफलता की नहीं, बल्कि दृष्टि, हिम्मत और परिवार के अटूट विश्वास की भी होती हैं। भारत के मशहूर फैशन डिजाइनर और अब फिल्म प्रोड्यूसर बने मनीष मल्होत्रा का सफर भी ऐसा ही है। हाल ही में वो बरखा दत्त के शो ‘वी द वुमन’ में शामिल हुए, जहां उन्होंने अपने जीवन के उन पलों को साझा किया, जिन्होंने उनके करियर की नींव रखी और उन्हें आज की ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
'मां ने पूछा- तुम दर्जी बनोगे'
मनीष मल्होत्रा ने कार्यक्रम में एक किस्सा सुनाया जिसने पूरे दर्शकों को मुस्कुराने के साथ सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अपनी मां से कहा कि वो फैशन डिजाइनर बनना चाहते हैं, तो उनकी मां ने हैरानी से पूछा- 'तो तुम दरजी बनोगे?' मनीष ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया- 'उसमें गलत क्या है?'
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यह खबर भी पढ़ें: 'लड़के आधी उम्र की लड़की से शादी करते हैं, जबकि महिलाओं को उनकी पसंद के लिए...'; समाज के रवैये पर बोलीं मलाइका
यही सादगी और अपने काम से प्यार उनके सफर की सबसे बड़ी ताकत बनी। उन्होंने बताया कि उनकी मां वह महिला थीं, जिन्होंने कभी उनके सपनों पर ताला नहीं लगाया। बचपन में उन्हें नाचने, डिजाइन बनाने और कपड़ों के साथ प्रयोग करने से कभी रोका नहीं गया। यहां तक कि उनका छोटा-सा बेडरूम ही उनका पहला स्टूडियो बन गया था, जहां दो टेलर्स के साथ उन्होंने अपना शुरुआती काम किया।
मनीष ने शुरुआती सफर पर की बात
फैशन इंडस्ट्री में कदम रखना आसान नहीं था। मनीष ने बताया कि शुरू में लोग फैशन डिजाइनिंग को गंभीर पेशे की तरह नहीं देखते थे। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। फिल्मी दुनिया के कॉस्ट्यूम डिजाइन से लेकर इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी पहचान बनाने तक, मनीष ने हर बार साबित किया कि मेहनत और ईमानदारी से सपनों को सच किया जा सकता है।
सिर्फ डिजाइनर नहीं, अब फिल्म प्रोड्यूसर भी
मनीष मल्होत्रा ने हाल ही में बतौर प्रोड्यूसर अपनी पहली फिल्म ‘गुस्ताख इश्क’ के साथ फिल्मों की दुनिया में नई शुरुआत की है। भले ही फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर बड़ा रिस्पॉन्स नहीं मिला, लेकिन इसके सब्जेक्ट और भावनात्मक टोन को व्यापक सराहना मिली है। मनीष का मानना है कि कला चाहे फैशन हो या फिल्में- भावनाएं, कहानियां और इंसानियत को जोड़ने का माध्यम होती है। इसी सोच के साथ उन्होंने प्रोडक्शन की दुनिया में कदम रखा है और साफ है कि ये उनके करियर का नया और रोमांचक अध्याय होगा।
मां ने दिया सपनों का आसमान
शो के दौरान मनीष ने स्वीकार किया कि वो आज जो भी हैं, इसमें 90% योगदान उनकी मां का है। उन्होंने कभी उन्हें रोक-टोका नहीं, कभी कहा नहीं कि ‘लड़के कपड़ों में करियर नहीं बनाते।’ बल्कि उन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया- चाहे वह छोटे कमरे को स्टूडियो बनाने देना हो या उनके अनोखे सपनों पर विश्वास करना।
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'मां ने पूछा- तुम दर्जी बनोगे'
मनीष मल्होत्रा ने कार्यक्रम में एक किस्सा सुनाया जिसने पूरे दर्शकों को मुस्कुराने के साथ सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अपनी मां से कहा कि वो फैशन डिजाइनर बनना चाहते हैं, तो उनकी मां ने हैरानी से पूछा- 'तो तुम दरजी बनोगे?' मनीष ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया- 'उसमें गलत क्या है?'
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यही सादगी और अपने काम से प्यार उनके सफर की सबसे बड़ी ताकत बनी। उन्होंने बताया कि उनकी मां वह महिला थीं, जिन्होंने कभी उनके सपनों पर ताला नहीं लगाया। बचपन में उन्हें नाचने, डिजाइन बनाने और कपड़ों के साथ प्रयोग करने से कभी रोका नहीं गया। यहां तक कि उनका छोटा-सा बेडरूम ही उनका पहला स्टूडियो बन गया था, जहां दो टेलर्स के साथ उन्होंने अपना शुरुआती काम किया।
मनीष ने शुरुआती सफर पर की बात
फैशन इंडस्ट्री में कदम रखना आसान नहीं था। मनीष ने बताया कि शुरू में लोग फैशन डिजाइनिंग को गंभीर पेशे की तरह नहीं देखते थे। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। फिल्मी दुनिया के कॉस्ट्यूम डिजाइन से लेकर इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी पहचान बनाने तक, मनीष ने हर बार साबित किया कि मेहनत और ईमानदारी से सपनों को सच किया जा सकता है।
सिर्फ डिजाइनर नहीं, अब फिल्म प्रोड्यूसर भी
मनीष मल्होत्रा ने हाल ही में बतौर प्रोड्यूसर अपनी पहली फिल्म ‘गुस्ताख इश्क’ के साथ फिल्मों की दुनिया में नई शुरुआत की है। भले ही फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर बड़ा रिस्पॉन्स नहीं मिला, लेकिन इसके सब्जेक्ट और भावनात्मक टोन को व्यापक सराहना मिली है। मनीष का मानना है कि कला चाहे फैशन हो या फिल्में- भावनाएं, कहानियां और इंसानियत को जोड़ने का माध्यम होती है। इसी सोच के साथ उन्होंने प्रोडक्शन की दुनिया में कदम रखा है और साफ है कि ये उनके करियर का नया और रोमांचक अध्याय होगा।
मां ने दिया सपनों का आसमान
शो के दौरान मनीष ने स्वीकार किया कि वो आज जो भी हैं, इसमें 90% योगदान उनकी मां का है। उन्होंने कभी उन्हें रोक-टोका नहीं, कभी कहा नहीं कि ‘लड़के कपड़ों में करियर नहीं बनाते।’ बल्कि उन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया- चाहे वह छोटे कमरे को स्टूडियो बनाने देना हो या उनके अनोखे सपनों पर विश्वास करना।