Guru Dutt: फिल्मी करियर में चढ़ीं सफलता की सीढ़ियां, व्यक्तिगत जीवन में नहीं मिली खुशी; तन्हाई ने ले ली जिंदगी
Guru Dutt 100th Birth Anniversary: गुरु दत्त की गिनती हिंदी सिनेमा के दिग्गज निर्माता-निर्देशक और एक्टर में होती है। उनकी फिल्म मेकिंग ने हिंदी सिनेमा को एक अलग और नया नजरिया दिया। आज उनकी 100वीं जयंती है।
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कुछ लोगों के पास जिंदगी में सबकुछ होते हुए भी वो तन्हा होते हैं और उनकी ये तन्हाई कई बार उनकी जान तक ले लेती है। कुछ ऐसा ही हुआ था भारतीय सिनेमा के दिग्गज निर्देशक, निर्माता, अभिनेता, राइटर और कोरियोग्राफर गुरु दत्त के साथ। गुरु दत्त की गिनती हिंदी सिनेमा के ऐसे फिल्ममेकर्स में होती है, जिन्होंने बॉलीवुड को एक नया आयाम दिया है, नए बेंचमार्क सेट किए हैं। ‘प्यासा’, ‘साहेब बीवी और गुलाम’ और ‘कागज के फूल’ जैसी कल्ट क्लासिक फिल्में देने वाले गुरु दत्त की आज 100वीं जयंती है। इस मौके पर जानते हैं गुरु दत्त के करियर, स्ट्रगल, लव लाइफ, दोस्ती और उनकी मौत की कहानी के बारे में।
गुरु दत्त नहीं था असली नाम
9 जुलाई 1925 को बेंगलुरु में जन्में गुरु दत्त का असली नाम वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण था। लेकिन बचपन में उनके साथ एक खतरनाक एक्सीडेंट हो गया था। जिसके बाद एक संत की सलाह पर उनका नाम बदलकर गुरु दत्त रख दिया गया। गुरु दत्त के जन्म के बाद पिता की नौकरी के चलते उनका परिवार कोलकाता शिफ्ट हो गया। यहां गुरु दत्त लंबे समय तक रहे इसलिए वो बंगाली कल्चर से काफी प्रभावित हुए और उन्हें बंगाली भाषा भी बोलनी अच्छे से आती थी। यहां गुरु दत्त नुक्कड़ नाटकों से जुड़ गए। इसके चलते डांस और एक्टिंग में उनकी रुचि हो गई।
प्रभात स्टूडियो में की डांस असिस्टेंट डायरेक्टर की नौकरी
गुरु दत्त एक कोरियोग्राफर भी थे। उन्होंने 1942 में उदय शंकर के स्कूल ऑफ डांसिंग एंड कोरियोग्राफी से डांस सीखा था। इसके अलावा उन्होंने अपने मुश्किल वक्त में कोलकाता की एक फैक्ट्री में टेलीफोन ऑपरेटर के तौर पर नौकरी भी की थी। इस दौरान उनके माता-पिता मुंबई शिफ्ट हो चुके थे। यहीं उनके अंकल ने उन्हें प्रभात स्टूडियो में असिस्टेंट डांस निर्देशक की नौकरी लगवा दी। इसी दौरान गुरु दत्त ने डांस की कई बारीकियों को सीखा। साथ ही उन्होंने यहीं से फिल्म मेकिंग की एबीसीडी भी सीखी। क्योंकि वो डांस डायरेक्टर के अलावा भी बाकी काम करते थे।
देव आनंद की शर्ट पहनकर स्टूडियो पहुंचे गुरुदत्त, फिर हो गई पक्की दोस्ती
प्रभात स्टूडियो में नौकरी करने के दौरान ही गुरु दत्त को दो लोग मिले जो आजीवन को उनके दोस्त बन गए। इनमें एक थे बाद में बॉलीवुड के आईकॉनिक एक्टर बने देव आनंद और दूसरे थे एक्टर रहमान। इस दौरान गुरुदत्त और देव आनंद एक ही कॉलोनी में रहते थे। यहां सिर्फ एक ही लॉन्ड्री थी। एक बार गुरु दत्त जब अपनी शर्ट लॉन्ड्री से लेने गए तो वो धुली नहीं थी। उनके पास वो ही एक शर्ट थी। इसलिए उन्होंने वहां से किसी और की एक शर्ट पहन ली। इसके बाद जब वो प्रभात स्टूडियो पहुंचे तो वहां उन्हें देव आनंद मिले। देव आनंद ने उन्हें देखते ही कहा कि तुम्हारी शर्ट बहुत अच्छी लग रही है। इस पर गुरुदत्त ने कहा कि ये मेरी शर्ट नहीं है, किसी और की है। तब देव आनंद ने बताया कि ये मेरी शर्ट है। इस मजेदार किस्से के बाद दोनों की दोस्ती और भी पक्की हो गई।
गुरु दत्त और देव आनंद की जोड़ी बनी हिट
देव आनंद और गुरुदत्त की दोस्ती इतनी पक्की हो गई कि दोनों ने एक वादा किया। देव आनंद ने कहा कि जब मैं प्रोड्यूसर बनूंगा तो तुमसे ही वो फिल्म डायरेक्ट कराऊंगा और जब तुम प्रोड्यूसर-डायरेक्टर बनना तो मुझे ही अपनी फिल्म में हीरो लेना। देव आनंद ने अपना वादा निभाया। उन्होंने साल 1951 में आई फिल्म ‘बाजी’ को प्रोड्यूस किया और एक्टिंग की। इस फिल्म का निर्देशन किया गुरु दत्त ने।
फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही और दोनों की दोस्ती भी हिट हो गई। इसके बाद 1952 में आई ‘जाल’ में एक बार फिर देव आनंद और गुरु दत्त की जोड़ी आई और फिल्म सुपरहिट हो गई। इसके बाद 1956 में आई फिल्म ‘सीआईडी’ को गुरु दत्त ने प्रोड्यूस किया और फिल्म के लीड रोल में देव आनंद को लिया। ‘सीआईडी’ भी बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त हिट रही। इस तरह से देव आनंद और गुरु दत्त की जोड़ी ने कई हिट फिल्में दीं। हालांकि, बाद में देव आनंद के भाई व निर्देशक-निर्माता चेतन आनंद और गुरु दत्त के बीच कुछ क्रिएटिव डिफ्रेंस देखने को मिले।
अबरार अल्वी थे गुरु दत्त के पक्के दोस्त
देव आनंद के अलावा गुरु दत्त की दोस्ती लेखक, निर्देशक अबरार अल्वी से भी काफी गहरी थी। अबरार ने उनकी अधिकांश फिल्मों की कहानी और डायलॉग लिखे हैं। अबरार ने ही ‘साहब बीवी और गुलाम’ का निर्देशन भी किया था। इसके लिए उन्हें अवॉर्ड भी मिला था। गुरु दत्त की आखिरी रात भी अबरार उनके साथ काफी देर रात तक बैठे रहे थे।
एक्टर-डायरेक्टर के तौर पर दीं बैक टू बैक हिट फिल्में
गुरु दत्त ने निर्देशन के साथ-साथ एक्टिंग में अपना डेब्यू किया 1953 में आई फिल्म ‘बाज’ में। इस फिल्म को गुरु दत्त ने डायरेक्ट और प्रोड्यूस भी किया था, साथ ही इसमें एक्टिंग भी की थी। लोगों को गुरु दत्त की एक्टिंग काफी पसंद आई और फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही। इसके बाद गुरु दत्त ने बैक टू बैक हिट फिल्में दीं। इनमें ‘आर पार’ (1954), ‘मिस्टर एंड मिसेज 55’ (1955), ‘सैलाब’ (1956) और ‘प्यासा’ (1957) शामिल रहीं। ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल रहीं और गुरु दत्त भारतीय सिनेमा के एक दिग्गज निर्माता-निर्देशक और एक्टर बन गए। इन सभी फिल्मों में गुरु दत्त ने एक अलग नजरिया और एक अलग कहानी दिखाई, जो उनकी अनोखी फिल्म मेकिंग को दिखाता है।
ड्रीम प्रोजेक्ट ‘कागज के फूल’ फ्लॉप होने से टूट गए थे गुरु दत्त
गुरु दत्त एक के बाद एक हिट फिल्में दे रहे थे। गुरु दत्त की फिल्मों को कई मायनों में काफी खास माना जाता था। साल 1960 में गुरु दत्त ने फिल्म बनानी शुरू की ‘कागज के फूल’। ये फिल्म उनका ड्रीम प्रोजेक्ट थी। हालांकि, उन्हें ये फिल्म बनाने के लिए कई लोगों ने ये कहते हुए मना किया कि ये समय से पहले की फिल्म है। इसे न बनाओ, लोग पसंद नहीं करेंगे। लेकिन गुरु दत्त ने कहा कि ये फिल्म मैं अपने लिए बना रहा हूं। उन्होंने अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा किया। इस फिल्म को गुरु दत्त ने डायरेक्ट-प्रोड्यूस किया था। साथ ही फिल्म में लीड रोल में भी थे। फिल्म में उनके साथ वहीदा रहमान प्रमुख भूमिका में थीं। फिल्म एक निर्देशक की कहानी थी जो न्यू कमर एक्ट्रेस के प्यार में पड़ जाता है। इस फिल्म को गुरु दत्त की ऑटोबायोग्राफी भी बताया जाता है।
(गुरु दत्त और वहीदा रहमान)
ये पहली फिल्म थी जिसे सिनेमास्कोप फॉर्मेट में शूट किया गया था। ‘कागज के फूल’ रिलीज हुई और बॉक्स ऑफिस पर डिजास्टर साबित हुई। इस फिल्म के फ्लॉप होने से गुरु दत्त पूरी तरह से टूट गए। उन्होंने इस फिल्म में अपना सबकुछ झोंक दिया था। हालत ये हो गई थी कि फिल्म के फ्लॉप होने पर उनका स्टूडियो बिकने तक की नौबत आ गई थी। ‘कागज के फूल’ गुरु दत्त द्वारा प्रोड्यूस एकमात्र फिल्म है जो बॉक्स ऑफिस पर डिजास्टर साबित हुई। इस फिल्म के फ्लॉप होने से गुरु दत्त डिप्रेशन में चले गए थे और काफी ज्यादा शराब पीने लगे थे। इसके बाद उन्होंने कोई और फिल्म का निर्देशन नहीं किया।
फिल्मों में जारी रखी एक्टिंग
‘कागज के फूल’ फ्लॉप होने के बाद गुरु दत्त की जिंदगी पूरी तरह से बदल गई। हालांकि, इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में अभिनय जरूर किया, वो हिट भी हुईं। लेकिन गुरु दत्त अंदर ही अंदर काफी दुखी रहने लगे। इस दौरान उन्होंने ‘चौदवीं का चांद’ (1969), ‘साहेब बीबी और गुलाम’ (1952) और ‘सांझ और सवेरा’ (1964) में काम किया। ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर भी सफल रहीं। लेकिन गुरु दत्त फिर भी काफी उदास रहते थे। गुरु दत्त की अधिकतर फिल्मों में वहीदा रहमान उनके साथ प्रमुख भूमिका में होती थीं।
शादीशुदा जीवन में कभी खुश नहीं रहे गुरु दत्त
गुरु दत्त अपने करियर और फिल्मों की तरह ही अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर भी हमेशा चर्चाओं में रहते थे। अपने करियर में अपार सफलता पाने वाले गुरु दत्त अपने निजी जीवन में कभी खुश नहीं रह पाए। गुरु दत्त ने गीता रॉय से शादी की थी। गीता रॉय एक मशहूर सिंगर थीं। गीता गुरु दत्त को उनकी पहली निर्देशित फिल्म ‘बाजी’ के दौरान मिली थीं और तभी गुरु गत्त को उनसे प्यार हो गया। तीन साल तक इंगेज रहने के बाद साल 1953 में गुरु दत्त ने गीता रॉय से शादी कर ली थी। इस शादी से दोनों के तीन बच्चे भी हुए। हालांकि, गुरु दत्त का शादीशुदा जीवन ज्यादा दिन अच्छा नहीं रहा। उनकी शराब और सिग्रेट की लत और उनके अफेयर के चलते उनके पत्नी गीता से अक्सर झगड़े होने लगे। अंतत: गीता और गुरु दत्त अलग हो गए और कहा जाता है कि इसकी वजह थीं अभिनेत्री वहीदा रहमान।
शादीशुदा होने के बाद भी वहीदा के प्यार में थे गुरु दत्त
गुरु दत्त शादीशुदा होने के बावजूद अभिनेत्री वहीदा रहमान के प्यार में पड़ गए थे। गुरु दत्त ने वहीदा रहमान को साउथ की फिल्मों में देखा था। इसके बाद उन्होंने ‘सीआईडी’ में वहीदा रहमान को पहला मौका दिया। बाद में गुरु दत्त की अधिकांश फिल्मों में वहीदा रहमान ही लीड रोल में नजर आईं। इसी दौरान गुरु दत्त वहीदा रहमान के प्यार में पड़ गए। वहीदा के साथ गुरु दत्त के प्यार के बारे में उनकी पत्नी गीता को भी पता चल गया था। जिसके चलते उनके आपस में और भी झगड़े होने लगे। कहा तो यहां तक जाता है कि इसी के चलते गुरु दत्त ने एक बार पत्नी गीता पर हाथ तक उठा दिया था। यही कारण था कि उनकी शादीशुदा जिंदगी खराब होने में वहीदा को भी एक प्रमुख वजह माना जाता है।
पहले ‘कागज के फूल’ का फ्लॉप होना और फिर पत्नी गीता से अलग होना और इस सबके चलते वहीदा रहमान से भी दूरियां बनाना, इन सब वजहों के चलते गुरु दत्त शराब के और भी करीब आ गए और वो हद से ज्यादा शराब पीने लगे। यही नहीं कहा तो यहां तक जाता है कि गुरु दत्त ने दो बार सुसाइड करने का भी प्रयास किया था। वो अक्सर अपने दोस्तों से मरने की बातें भी किया करते थे। इसके बाद आई वो रात जब गुरु दत्त अपने दोस्त अवरार अल्वी के साथ बैठकर शराब पी रहे थे। गुरु दत्त ने उस रात बहुत शराब पी। अवरार के देर रात जाने के बाद भी वो शराब पीते रहे। उन्होंने गीता से अपने बच्चों से मिलने के लिए उनके पास भेजने की बात कही लेकिन गीता ने कह दिया कि बहुत रात हो चुकी है, मैं उन्हें नहीं भेज सकती। कल देखती हूं।
इसके बाद गुरु दत्त ने उनसे कहा कि अगर उन्होंने बच्चों को अभी नहीं भेजा तो कल वो मेरा मरा मुंह देखेंगी। फिर अगली सुबह जब नौकरों के कई बार खटखटाने पर भी गुरु दत्त ने कमरे का दरवाजा नहीं खोला तो दरवाजे को तोड़ा गया और अंदर गुरु दत्त का शव मिला। 10 अक्टूबर 1964 को एक महान निर्माता-निर्देशक और एक्टर इस दुनिया को हमेशा-हमेशा के लिए छोड़कर चला गया। उनकी मौत अत्यधिक शराब और नींद की गोलियां लेने की वजह से हुई। हालांकि, कुछ लोगों ने इसे सुसाइड भी बताया, लेकिन गुरु दत्त के भाई का कहना है कि वो सुसाइड नहीं कर सकते। गुरु दत्त को नींद नहीं आती थी इसलिए वो गोलियां खाते थे, उस रात उन्होंने नशे में ज्यादा गोलियां ले लीं, इस वजह से उनकी मौत हो गई।