शीबा अजहर सम्राट: एक्ट्रेस बनने की चाहत पर मिली तेजाब डालने की धमकी? अभिनेत्री ने सुनाई बचपन की दर्दनाक कहानी
- टीवी अभिनेत्री शीबा अजहर सम्राट के लिए अभिनय की दुनिया तक पहुंचना आसान नहीं रहा।
- उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से आने वाली शीबा को बचपन में फिल्मों के शौक के लिए मार तक खानी पड़ी।
- परिवार को डर था कि वह खानदान का नाम खराब कर देंगी। हाल ही में उन्होंने अपने सफर पर बात की।
विस्तार
शीबा अजहर सम्राट के अभिनय की दुनिया में आने के फैसले पर परिवार में विरोध हुआ। पिटाई हुई। टीवी और फिल्मों में काम करने की कोशिश की, तो रिश्तेदारों ने विरोध किया। उनके भाई को भी उनके काम से शर्मिंदगी महसूस होती थी। लेकिन वक्त के साथ परिवार की सोच बदली। आज वही भाई उन्हें गर्व से अपने साथ बाजार घुमाने ले जाते हैं। शीबा ने अमर उजाला डिजिटल से बातचीत में अपने संघर्ष, पिता से जुड़ी अधूरी इच्छा और छोटे शहर की लड़कियों के लिए अपने सपनों के बारे में बात की।
बचपन में फिल्मों के शौक के लिए खानी पड़ी मार
बचपन से एक्टिंग का कोई शौक नहीं था। मुझे पता ही नहीं था कि एक्टिंग क्या होती है या एक्टर कौन होते हैं। बस फिल्मों को देखने का बहुत शौक था। मैं टीवी की बहुत बड़ी शौकीन थी। कहीं भी चली जाती थी। किसी के घर में भी टीवी देखने पहुंच जाती थी। इसके लिए बचपन में कई बार मार भी खानी पड़ी। परिवार को लगता था कि मैं बड़ी होकर खानदान का नाम खराब कर दूंगी। मुझे बचपन से यही सुनने को मिलता था कि यह लड़की बहुत टीवी देखती है, फिल्में देखना पसंद करती है। बड़ी होकर नाक कटवाएगी।
मैं ऐसे परिवार और गांव से आती हूं, जहां लड़कियों को करियर बनाने या अपने सपने देखने के बारे में बताया ही नहीं जाता। बचपन से यही सुनने को मिला कि शादी करनी है, बच्चे करने हैं। पढ़-लिखकर क्या करोगी? लड़कियों को कुछ करने की जरूरत ही क्या है? ऐसे माहौल से निकलकर अपने लिए रास्ता बनाना मेरे लिए बहुत मुश्किल था। मैंने 2013 में थिएटर शुरू किया था। इसके बाद से मैं इससे जुड़ी रही हूं। मैंने काम कम किया है, लेकिन कोशिश रही कि अच्छा काम करूं।
17 साल की उम्र से शादी का दबाव, परिवार को था बदनामी का डर
जब मैंने फिल्मों और टीवी में काम करने की बात मां को बताई, तो उन्होंने पूछा कि इसमें कोई ऐसा काम तो नहीं करना पड़ेगा, जैसा वह सोच रही थीं। मैंने उन्हें समझाया कि ऐसा कुछ नहीं होगा। मुझे डर था कि अगर गांव के लोगों को मेरे काम के बारे में पता चला, तो वे मेरे परिवार को बातें सुनाएंगे। मेरे चाचा अक्सर घर आते थे। मैं करीब 17 साल की थी, तभी से वे मेरी शादी कराने की कोशिश करने लगे थे। उन्हें लगता था कि मुझे मुंबई से वापस बुला लेना चाहिए, वरना मैं खानदान का नाम खराब कर दूंगी।
एक बार मेरे चाचा ने मेरे पिता से कहा था कि फिल्म इंडस्ट्री में काम पाने के लिए प्रोड्यूसर के सामने नंगा होकर नाचना पड़ता है। उनके मन मुताबिक काम करना पड़ता है। यह सुनकर मेरे पिता की आंखों में आंसू आ गए। मेरे लिए भी यह बहुत भावुक पल था। मैं अपनी जिंदगी में कुछ करना चाहती थी, लेकिन मेरे काम को लेकर इस तरह की बातें कही जा रही थीं।
भाई को मेरे काम पर शर्मिंदगी होती थी, अब गर्व से ले जाते हैं बाजार
मेरे भाई की गांव में एक छोटी-सी दुकान है। जब कोई उनसे कहता था कि उसने मुझे किसी शो में देखा है, तो उन्हें शर्मिंदगी महसूस होती थी। उन्होंने मुझसे कहा था कि जब कोई तुम्हारे काम का जिक्र करता है, तो मुझे लगता है कि मैं पानी में डूबकर मर जाऊं। मैं अपना मुंह कहां छिपाऊं? उस वक्त मैं भी बहुत संघर्ष कर रही थी। एक दिन मैंने भाई से कहा कि आप ऐसा समझ लीजिए कि आपकी एक बहन मर चुकी है। तब जब कोई मेरे बारे में बात करेगा, तो आपको कम तकलीफ होगी।
अब चीजें बदल गई हैं। करीब दो साल पहले जब मैं गांव गई थी, तो मेरे भाई मुझे अपने एक दोस्त की दुकान पर ले गए। पहली बार वह मुझे गर्व से अपने साथ बाजार घुमाने ले गए थे। पहले जिस काम को लेकर उन्हें शर्मिंदगी होती थी, उसी काम को लेकर अब वह मुझ पर गर्व करते हैं। परिवार और समाज की सोच बदलने में वक्त लगता है। मेरे मामले में इस बदलाव में करीब 12-13 साल लग गए।
पिता चाहते थे कि मैं उन्हें सेट पर बुलाऊं, लेकिन ऐसा नहीं कर पाई
मेरे पिता का आठ साल पहले निधन हो गया था। उन्होंने मुझसे कहा था कि बेटा, मैं देखना चाहता हूं कि तुम जहां काम करने जाती हो, वहां क्या काम होता है और कैसे होता है। मैंने उनसे कहा था कि मैं आपको बुलाऊंगी। लेकिन मेरे पास ऐसा काम ही नहीं था कि उन्हें सेट पर बुला पाती। मैं इंतजार करती रही कि कोई अच्छा काम मिले, तो उन्हें बुलाकर अपना काम दिखाऊं। लेकिन मैं ऐसा कर पाती, उससे पहले ही उनका निधन हो गया। मुझे इस बात का हमेशा अफसोस रहेगा कि मैं उनकी यह इच्छा पूरी नहीं कर पाई।
मैं चाहती हूं कि मुझे अच्छी फिल्मों और वेब सीरीज में काम करने का मौका मिले। मुझे लगता है कि मेरी एक्टिंग की समझ अच्छी है। मैं थिएटर से जुड़ी रही हूं और हमेशा सीखने के लिए तैयार रहती हूं। इंडस्ट्री में कई बार आपको यह साबित करने में बहुत वक्त लग जाता है कि आप अच्छे एक्टर हैं। मैं चाहती हूं कि कास्टिंग डायरेक्टर्स मुझे मौका दें। मेरा ऑडिशन लें, ताकि मैं खुद को साबित कर सकूं।
कास्टिंग में मेरा ऑडिशन तक नहीं लेते थे
शुरुआती दिनों में कास्टिंग को लेकर बहुत मुश्किलें आईं। मैं प्रोडक्शन हाउस जाती थी, लोगों से मिलती थी, लेकिन कई बार मेरा ऑडिशन तक नहीं लिया जाता था। मुझे लगता था कि जिन लड़कियों का बैकग्राउंड अच्छा था, जो आर्थिक रूप से मजबूत थीं या जिनके इंडस्ट्री में अच्छे संपर्क थे, उन्हें आगे बढ़ने में आसानी होती थी। मेरे पास न आर्थिक मजबूती थी और न ही ऐसे दोस्त, जो मुझे सही लोगों तक पहुंचा सकें। कभी बहुत कोशिशों के बाद ऑडिशन होता भी था, तो तारीफ मिलती थी, लेकिन उसके बाद आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलता था।
हमारे शो के प्रोड्यूसर अरविंद बब्बल सर के साथ एक लड़का बैठा था। किसी किरदार को लेकर चर्चा हो रही थी, तो उसने कहा कि वह एक लड़की को जानता है, जो इस भूमिका के लिए सही हो सकती है। इसके बाद उसके एक दोस्त ने मुझे मैसेज किया। मैं ऑडिशन देने गई और मेरा चयन हो गया। मैं मानती हूं कि जब कोई चीज आपकी किस्मत में होती है, तो वह किसी न किसी रास्ते से आप तक पहुंच जाती है। जरूरी नहीं कि हर दरवाजा आपके लिए खुले। कई बार आपको खुद रास्ता तलाशना पड़ता है।
गांव की लड़कियों के लिए बदलना चाहती हूं सोच
मैं चाहती हूं कि मेरे गांव और मोहल्ले की लड़कियां भी अपनी जिंदगी में कुछ कर सकें। जिस समाज से मैं आती हूं, वहां लड़कियों को बताया ही नहीं जाता कि उनका अपना करियर और पहचान भी हो सकती है। आज भी कई लड़कियां ऐसी शादियों में फंसी हुई हैं, जहां उन्हें लगातार बच्चे पैदा करने का दबाव झेलना पड़ता है। कुछ के चार बच्चे हैं, कुछ के छह। कई महिलाएं घरेलू हिंसा का सामना करती हैं। हो सकता है कि उनमें भी प्रतिभा हो, लेकिन उन्हें कभी मौका ही नहीं मिलता।
मेरे बचपन में एक ऐसी घटना हुई थी। मेरे परिवार में लड़कियों के करियर बनाने को लेकर विरोध था। रिश्तेदारों को डर था कि मेरे टीवी और फिल्मों में काम करने से खानदान की बदनामी होगी और परिवार की दूसरी लड़कियों की शादी पर असर पड़ेगा। जिसके बाद मेरे खानदान के लोगों ने कहा था कि मेरे चेहरे पर तेजाब डालकर उसे जला देना चाहिए। उस माहौल से निकलकर आज मैं अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही हूं।
मैं चाहती हूं कि मेरे गांव और मोहल्ले की लड़कियां मुझे देखकर सोचें कि अगर मैं अपनी जिंदगी में कुछ कर सकती हूं, तो वे भी कर सकती हैं। उन्हें भी आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए।
वर्क फ्रंट:
शीबा अजहर सम्राट टीवी, फिल्मों और थिएटर में काम कर चुकी हैं। उनके प्रमुख प्रोजेक्ट्स में 'वसुधा', 'गुरी धैर्य की लव स्टोरी', 'ताजा खबर', 'महारानी', 'चूना', 'तरला', 'षड्यंत्र' और 'गुप्ता निवास' शामिल हैं। फिलहाल वह टीवी शो 'वसुधा' में सावित्री के किरदार में नजर आ रही हैं।