Zeenat Aman: जीनत अमान को इस सुपरहिट में काम न कर पाने का आज भी है अफसोस, वर्षों बाद अभिनेत्री ने किया खुलासा
Zeenat Aman: जीनत अमान ने हाल ही में 'आस्क मी एनीथिंग' सत्र के दौरान कई दिलचस्प बातें बताईं। इस दौरान उन्होंने उस फिल्म के बारे में भी बताया जिसमें काम न कर पाने का उन्हें आज भी अफसोस है।
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70 और 80 की सबसे बोल्ड अदाकारा जीनत अमान आज भी फैंस के दिलों पर राज करती हैं। वह सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा सक्रिय रहती हैं। जीनत अमान अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अक्सर अपने विचार साझा करती हैं। वह अपने फैंस के साथ इंटरएक्टिव सत्र आयोजित करती रहती हैं। इसी कड़ी में हाल ही में उन्होंने रेडिट पर 'आस्क मी एनीथिंग' सत्र का आयोजन किया। यहां उन्होंने अपने करियर और निजी जीवन से जुड़े कई दिलचस्प खुलासे किए।
सत्र के दौरान एक फैन ने उनसे पूछा कि क्या ऐसा कोई रोल है जिसे आपने छोड़ दिया हो और अब आपको उसका पछतावा होता हो? इस पर जीनत ने जवाब दिया, "मुझे अफसोस है कि मुझे 'अमर अकबर एंथनी' में जो रोल ऑफर किया गया था, वह मैंने छोड़ दिया। निर्देशक और निर्माता के साथ मेरी बातचीत ठीक से नहीं हो पाई। हालांकि, मुझे अपने सिद्धांतों पर खड़ा रहना कोई गलती नहीं लगती, लेकिन मुझे इस रोल को मिस करने का अफसोस है। यह एक मजेदार प्रोजेक्ट लगता था।"
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इसके अलावा एक अन्य फैन ने उनसे पूछा कि कौन सी फिल्म वह आज भी नहीं करना चाहतीं। इस पर जीनत ने बिना हिचकिचाए कहा, "सच कहूं तो मुझे 'जानवर' फिल्म करने का अफसोस है। इस फिल्म को बनाने में आठ साल लग गए। अंत में हम बस थक चुके थे। यह फिल्म कई वर्षों तक टुकड़ों-टुकड़ों में शूट की गई, जो काफी थकाने वाली थी।"
एक फैन ने जीनत से पूछा, "आप 70 के दशक की एक बोल्ड अदाकारा थीं। उस समय महिलाओं को अक्सर घर में चुपचाप रहकर अपना काम करने की भूमिका दी जाती थी, लेकिन आपने जो किरदार निभाए, उन्होंने सबको गलत साबित कर दिया। उस समय की परिस्थितियों में आपको कैसा महसूस हुआ और क्या लोगों ने आपको समर्थन दिया?" जीनत ने इसका जवाब देते हुए कहा, "मुझे लगता है कि 70 के दशक का समय बहुत दिलचस्प था, क्योंकि उस समय महिलाएं घर और कार्यस्थल दोनों जगहों पर अपनी आवाज ढूंढ़ने लगी थीं। मुझे खुद को सख्त या आसान व्यक्ति नहीं कहना, लेकिन मुझे यह भी नहीं लगता कि मैं किसी के दबाव में आई। समाज या मीडिया जैसा चाहे वैसा दिखाए, मैं अपने रास्ते पर चली। उस समय कई युवतियां सार्वजनिक जीवन में संघर्ष कर रही थीं।"