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जब मन्ना डे को जेल भेजने की तैयारी में थी पुलिस, टुनटुन थी साथ में, ऐसे बच पाए

Mon, 23 Oct 2017 07:38 AM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला
टीम डिजिटल / अमर उजाला Updated Mon, 23 Oct 2017 07:38 AM IST
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when manna dey Entrapment in police case with actress tuntun
कम लोगों को ही पता होगा कि लखनऊ को दिल-ओ जान से चाहने वाले मन्ना डे साहब को शहर जेल की सौगात देने वाला था। एक आयोजन में यहां स्टेज शो के लिए पहुंचे मन्ना डे को पब्लिक के हंगामे, शिकायत पर पुलिस धोखाधड़ी के आरोप में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की तैयारी कर रही थी।
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अकेले वे ही नहीं फिल्मों में हास्य अभिनेत्रियों की पहली कतार में खड़ी टुनटुन भी पुलिसिया शिकंजे में फंसने जा रही थी, लेकिन तब नगर के तमाम रंगकर्मियों-संस्कृति कर्मियों ने उन्हें बचाया था।
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नगर के वरिष्ठ रंगकर्मी आतमजीत सिंह ने बताया कि बात 80 के दशक की शुरुआत से पहले की है। शहर में चारबाग रलेवे स्टेशन के पास एक संगीत समारोह का आयोजन होना था।
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उसमें गायक मन्ना डे, हास्य अभिनेत्री टुनटुन (उमादेवी) अन्य कई हस्तियां भी शरीक होनी थी। प्रचार-प्रसार कई दिनों से चल रहा था, इसलिए आयोजकों ने जमकर टिकट बेचे।

आतमजीत याद करते हैं, 'याद नहीं आ रहा कि तब ‘दादा’ शायद दिल्ली या मुंबई कहां से आए थे। इधर स्टेज पर कार्यक्रम के लिए दर्शक इंतजार कर रहे थे और उधर आयोजक रफूचक्कर। काफी देर रात तक दादा भी इंतजार करते रहे, लेकिन आयोजकों का कोई पता नहीं लगा। आखिरकार पुलिस में शिकायत कर दी गई और दादा परेशान हो गए।'

वह बताते हैं कि अगले दिन हम अपनी टीम के साथ रवीन्द्रालय में लैला मजनू नौटंकी की रिहर्सल में जुटे हुए थे कि रवीन्द्रालय के उस समय के मैनेजर मि. टंडन के पास हुसैनगंज पुलिस से एक फोन आया। हम सब पहुंचे तो पता चला कि पुलिस आयोजकों के फुर्र होने के बाद मेहमान अतिथियों से ही पूछताछ कर कार्रवाई का मन बना रही थी।

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नामी रंगकर्मियों ने पूरा मामला साफ किया, तब पुलिस ने दादा और टुनटुन को छोड़ा। काफी दिनों बाद पता चला कि उस समय तक कुछेक पुलिसवाले दादा को पहचान भी नहीं पाए थे।

वरिष्ठ रंगकर्मी ने बताया कि इससे करीब 10-12 साल पहले दादा केडी सिंह बाबू स्टेडियम में भी एक आयोजन में पहुंचे थे। आयोजन केदौरान तब उन्होंने अपना हालिया हिट नंबर कसमे वादे प्यार वफा..भी अन्य हिट तरानों के साथ सुनाया था।

वे उठे और बोले, मेरे संग बजाओगे

भातखंडे संगीत संस्थान सम विवि केतबला शिक्षक पं. रविनाथ मिश्र बताते हैं कि 1980-81 में फिल्मफेयर के एक कार्यक्रम में वो कई कलाकारों के साथ मुंबई में प्रस्तुतियां देने गए थे। कुछ कलाकारों की प्रस्तुतियां के बाद उनकी करीब 12-15 मिनट की तबला एकल प्रस्तुति हुई।

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सामने दादा मन्ना डे, प्रेम चोपड़ा, अमरीश पुरी समेत अन्य भी थे। प्रस्तुति के बाद दादा खुशी से झूमकर उठे और बोले...वाह उस्ताद दिल जीत लिया। क्या मेरे लिये भी बजाओगे?

गाते-गाते झुंझला उठे और लगाई फटकार

11 अप्रैल, 2010 को दादा स्कार्पियो क्लब में शहरियों के सामने बैठे थे। उनके साथ पूरे दिन के टूर में होटल ताज से ही शामिल रहे आकाशवाणी के कलाकार अनिमेष मुखर्जी ने बताते हैं कि दादा की तबीयत तब ठीक नहीं थी, फिर भी लखनऊ में परफार्मेंस को वे मना न कर सके।

उनके सामने क्या खास, क्या आम...सब आ जमे। सांसद सतीश चंद्र मिश्र, प्रमुख सचिव नवनीत सहगल, आईजी एके जैन, सांसद बृजेश पाठक समेत तमाम हस्तियां उनके सामने पहली पंक्ति में ही थी।

वे मंच पर उतरे और एक से बढ़कर अपने नगमों से दिल जीत लिया। दादा पूरी रौ में ‘फुलगेंदवा ना मारो लागत करेजवा पे चोट..’ सुना ही रहे थे कि साउंड में दिक्कत आ गई तब उन्होंने साउंड वाले फटकार भी लगाई थी।
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