मैं अकेले बैठ कर रोता था: टाइगर श्रॉफ
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टाइगर श्रॉफ ने पहली दो फिल्मों की कामयाबी के साथ बॉलीवुड में अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है। अब वह कुछ हट कर नजर आने वाले हैं। सुपर हीरो के रोल में। फिल्म होगी, फ्लाइंग जट। इस फिल्म और कुछ अन्य मुद्दों पर टाइगर श्रॉफ से बातचीत की रवि बुले ने।
जब से चर्चा थी कि आप सुपर हीरो बन रहे हैं, बच्चों की इस पर निगाह थी। बच्चों के फैन बेस को कैसे देखते हैं?
मुझे भी नहीं पता कि कैसे ये हो गया! मुझमे क्या है नहीं मालूम कि शुरू से बच्चे मेरे फैन हैं। टाइगर, ये नाम शायद थोड़ा यूनिक है। बच्चे मिलते हैं तो सेल्फी लेते हैं। मुझसे डांस कराते हैं। बातें करते हैं। बच्चों के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूं।
फ्लाइंग जट में आप किस तरह के सुपर हीरो हैं?
यह सुपर हीरो नॉर्मल लड़का है। ऊंचाइयों से डरता है। ज्यादा ऊंचा नहीं उड़ सकता। स्पीड से डरता है। तेज भागना चाहता है मगर नहीं भाग पाता। उसे लड़ना पसंद नहीं। शांतिप्रिय है। मगर फिल्म में एक बिंदु आता है कि उसे लड़ना पड़ता है। उसके पास एक जिम्मेदारी है। वह निभानी पड़ेगी।
आप बचपन में अपने सुपर हीरो में क्या खूबियां देखना चाहते थे?
मैं स्पाइडर मैन को बहुत मानता था क्योंकि वह इंसान होने के बहुत करीब थे। एक अंडरडॉग थे। वह परफेक्ट सुपर हीरो नहीं है। मैंने उन्हें अपना रोल निभाने के लिए रेफरेंस पॉइंट की तरह रखा।
बेटा सब्जीवाला तुझसे पैसे नहीं लेगा
आम तौर पर सुपर हीरो के आस पास के लोग नहीं जानते कि वह सुपर हीरो है। परंतु आपकी कहानी में ऐसा नहीं है!
मेरे मामले में सिर्फ मां को यह पता है। वह इसका फायदा भी उठाती है कि जब मैं उड़ रहा तो उसका कॉल आ जाएगा कि बेटा सब्जी लेते आना! जब मैं मना करता हूं तो वह कहती है कि बेटा सब्जीवाला तुझसे पैसे नहीं लेगा।
सुपर हीरो के लिए कॉस्ट्यूम का महत्व होता है। आपका कॉस्ट्यूम कैसे तैयार हुआ?
कॉस्ट्यूम पहचान बन जाती है, जो बहुत जरूरी है। मेरी कॉस्ट्यूम पंजाबी निहंग के ड्रेस के आधार पर तैयार किया गया है। उनके कलर्स है। मैंने कड़ा पहना है। पगड़ी पहनी है। यह कहीं न कहीं उनका प्रतिनिधित्व करता है।
हमने सुपर हीरो देखे हैं जिनमें उनका धर्म नहीं बताया जाता। आपका किरदार धर्म से भी जुड़ा है!
हकीकत है कि यह सुपर हीरो सरदार है। मगर शुरू में वह दाढ़ी नहीं रखता। पगड़ी नहीं पहनता। फिल्म बताती है कि वह धीरे-धीरे कैसे धर्म को अपनाता है क्योंकि उसकी मां खुद को बहुत गर्व से सरदारनी बताती है। आपने ट्रेलर में देखा होगा कि मां उसे डांट रही है कि बाल कटवा लिए... तू तो सरदार भी नहीं है। असल में उसे बचपन में सब चिढ़ाते थे कि तू सरदार है, बारह बजने वाले हैं। हमने फिल्म में दिखाया है कि यह कितनी महान कौम है।
निःसंदेह यह महान कौम है परंतु जैसे फिल्म में बारह बजे वाली बात आई। संता-बंता जोक्स का मामला कोर्ट तक गया है। इसे आप किस तरह देखते हैं?
मुझे लगता है कि ऐसे जोक्स नहीं बनने चाहिए। मैं व्यक्तिगत रूप से इसे सही नहीं मानता। मैं इसे यूं देखता हूं कि कोई मुझ पर चुटकुला बनाता तो मैं कैसे देखता। हमने फिल्म में बारह बजे वाली बात बताई है कि ऐसा क्यों कहा जाता है।
सीरियल किसर बनने में परेशानी नहीं
अपने सेंसर ऑफ ह्यूमर को आप कैसे आंकते हैं?
सेंस ऑफ ह्यूमर है मुझमें। दस में से सात-आठ नंबर दूंगा खुद को।
आप नए आए थे तो आपके नाम और लुक को लेकर सोशल मीडिया में चुटकुले बने। उसे कैसे हेंडल किया?
शुरू में मैं बहुत सेंसेटिव था। किसी को नहीं बताता था। घर पर बैठ कर रोता था। मुझे तो पापा को देख कर लगता था कि बॉलीवुड में रहना बहुत आसान है। जब ट्रेलर आया तो देखा कि मेरे नाम और अपीयरेंस को लेकर लोग बातें बना रहे हैं। मुझे बहुत दुख हुआ। परंतु फिल्म रिलीज होने के बाद जब सफल हुई तो बहुत खुशी हुई।
क्या आपने घर में अपनी भावनाओं को शेयर किया था?
नहीं, कभी नहीं। मैं अपने मां-बाप को टेंशन देना नहीं चाहता था।
कहा जा रहा है कि आप न्यू सीरियल किसर हैं!
मैंने कभी यह नोट नहीं किया, पर जब खबरें पढ़ीं तो यह एहसास हुआ कि हीरोपंती में, बागी में किस किया हीरोइन को। इस फिल्म में भी किसिंग है। मैंने तो जो डायरेक्टर चाह रहे थे, वह किया।
ये बातें इमेज से जुड़ जाती हैं। इमरान हाशमी लंबे समय से कोशिश कर रहे हैं इस टैग से अलग होने की।
मुझे इसमें कोई समस्या नहीं दिखती। एक पहचान बन रही है। लोग मुझे ऐक्शन हीरो कहते हैं। अब सीरियल किसर कह रहे हैं। मुझे लगता है कि अगर मेरे काम से कोई मैसेज जा रहा है तो मुझे परेशानी नहीं है।