Swara Bhasker: चार घंटे तक कस्टम ऑफिस में फंसा रहा भाई, रक्षाबंधन पर स्वरा भास्कर ने सुनाया मजेदार किस्सा
Swara Bhasker Celebrate Rakshabandhan: स्वरा भास्कर की जिंदगी में भाई ईशान का रोल बहुत अहम है। वह सबसे मुश्किल वक्त में उनका सहारा बना था। रक्षाबंधन के खास मौके पर स्वरा भास्कर इस त्योहार से जुड़ी पुरानी यादों को अमर उजाला के साथ साझा कर रही हैं।
विस्तार
स्वरा भास्कर इन दिनों रियलिटी शो ‘पति पत्नी और पंगा’ में अपने बेबाक अंदाज से दर्शकों का दिल जीत रही हैं। शो में वह अपने रिश्तों और जिंदगी के जुड़े कुछ पहलुओं को भी सामने ला रही हैं। ऐसे में रक्षाबंधन के मौके पर अपने भाई ईशान के साथ प्यारा रिश्ता याद आना लाजमी था। अमर उजाला डिजिटल से खास बातचीत में स्वरा भास्कर ने भाई के साथ अपने प्यारे रिश्ते, रक्षाबंधन से जुड़ी पुरानी यादों को साझा किया है।
राखी के दिन का कोई ऐसा किस्सा जिसे सोचकर आज भी आप हंसी रोक नहीं पातीं?
मैं और मेरा भाई ईशान तब शायद 13-14 साल के रहे होंगे। रक्षाबंधन का दिन था, मैंने प्यार से उसे राखी बांधी और बदले में उसने बहुत प्राउड से मेरी तरफ वही बीस रुपए बढ़ा दिए। वह पैसे उसने कुछ दिन पहले मुझसे उधार लिए थे। उस वक्त मैं कुछ पल के लिए ठिठकी...थोड़ा गुस्सा, थोड़ा हंसने जैसा मन हुआ। लगा ये कैसा तोहफा है? लेकिन अब जब उस पल को याद करती हूं, तो चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। वो 20 रुपए तब भले ही मामूली लगे हों, लेकिन अब लगता है उसमें भाई की मासूम समझ और एक छोटा-सा अहसास भी छिपा था, जिम्मेदारी निभाने का। बचपन के त्योहार ऐसे ही होते हैं...सादे, प्यारे और हमेशा याद रहने वाले।
भाई-बहन के रिश्ते में मस्ती ज्यादा होती है या तकरार? क्या आज भी बचपन वाली वह मासूम दोस्ती जिंदा है?
दरअसल, ईशान सिर्फ मेरा छोटा भाई नहीं है, बल्कि अब वह मेरा मैनेजर भी है। एक तरह से वह मेरा बॉस भी बन गया है, वही मेरे सारे कॉन्ट्रैक्ट, प्रोफेशनल काम और मीटिंग्स संभालता है। हम दोनों के बीच का रिश्ता बहुत गहरा है। जितनी गहरी हमारी दोस्ती है, उतनी ही तेज हमारी बहसें भी होती हैं। कभी किसी काम को लेकर टकरार होती है, तो कभी बिना किसी वजह के एक-दूसरे की टांग खींच लेते हैं। दुनिया में अगर कोई मुझसे सबसे ज्यादा परेशान है, तो वो मेरा भाई ही है। लेकिन वही मेरी सबसे ज्यादा फिक्र भी करता है। हमारे बीच का बचपना आज भी वैसा ही है, जैसा बरसों पहले था और यही हमारे रिश्ते की सबसे खास बात है।
कभी राखी भेजने को लेकर कोई दिलचस्प या अजीब अनुभव हुआ?
हां, हुआ है और बहुत मजेदार था। पिछले साल मैंने ईशान को इंडोनेशिया में राखी भेजी थी, जहां वह अब रहता है। डिब्बे में राखी के साथ मौली, चावल और मिठाई भी थी। जब वह पैकेज इंडोनेशिया के कस्टम ऑफिस पहुंचा, तो उन्हें समझ नहीं आया कि ये सब क्या है? उन्होंने पैकेट खोलकर पूछा कि क्या हम चावल के बीज भेज रहे हैं? राखी का कॉन्सेप्ट ही उन्हें नहीं समझ आया। नतीजा ये हुआ कि ईशान को कस्टम में चार घंटे लग गए। वह मुझसे बार-बार कह रहा था कि अब से राखी मत भेजा करो, ये तो सजा है। इस बार जब वह दिल्ली आया था, तो मैंने राखी पहले से पैक करके दे दी थी और कहा था कि राखी वाले दिन ही खोलना। लेकिन वह इतना लालची निकला कि इंडोनेशिया पहुंचते ही राखी के साथ दी गई मिठाई खा गया।
कोई ऐसा पल जब ईशान आपके साथ न होते हुए भी सबसे बड़ा सहारा बना?
ऐसे कई पल आए हैं, लेकिन एक बात मुझे आज भी बहुत याद है। एक समय था जब मम्मी-पापा मेरी शादी को लेकर काफी परेशान रहते थे। उन्हें लगता था कि अब तक शादी क्यों नहीं हुई और इसका दबाव मुझ पर भी आ रहा था। मैं सोच रही थी कि क्या मुझे अरेंज मैरिज करनी चाहिए, क्या यही सही रास्ता है। तभी एक दिन ईशान ने मम्मी-पापा और मुझे साथ बैठाया और खुलकर बात की। उसने मम्मी-पापा से कहा कि मैं एक काबिल और आत्मनिर्भर लड़की हूं, जिसने अपनी जिंदगी में बहुत कुछ हासिल किया है, फिर शादी इतनी जरूरी क्यों बन गई है। उसने मुझे भी टोकते हुए कहा कि अगर मुझे ट्विटर पर समझौता करने में दिक्कत होती है, तो शादी के समझौते कैसे झेलूंगी? उसकी बातों ने मुझसे वो मानसिक दबाव हटा दिया और मम्मी-पापा को भी राहत दी। मुझे लगा कि उस दिन उसका वो स्टैंड मेरे लिए बहुत मायने रखता था।
क्या प्रोफेशनल लाइफ में भी उसने आपकी मदद की है?
बिलकुल की है और वो मदद सिर्फ इमोशनल नहीं, बल्कि पूरी तरह प्रैक्टिकल भी रही है। कुछ साल पहले जब मेरे फाइनेंशियल हालात थोड़े कमजोर थे, मेरे अकाउंट्स बिखरे हुए थे। टैक्स, डॉक्यूमेंट्स, जीएसटी - कुछ समझ नहीं आ रहा था। तब ईशान ने सब कुछ संभाल लिया। उसने मेरे सारे पेपर्स सही किए, अकाउंट्स सेट किए और यहीं से उसने मेरा काम मैनेज करना शुरू किया। मुझे याद है, एक फिल्म के लिए उसने जो डील की, उसमें मेरी फीस पहले से तीन गुना बढ़ गई। तब मुझे लगा कि वो मेरे करियर को लेकर मुझसे भी ज्यादा गंभीर है। कई बार मैं किसी प्रोजेक्ट को लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं होती, तब भी वो पूरी रिसर्च करता है और कहता है कि मैं उस रोल को बेहतर कर सकती थी। ईशान सिर्फ भाई नहीं, मेरा सबसे बड़ा आलोचक और सबसे मजबूत समर्थन भी है।
मैं खासकर भाइयों से कहना चाहती हूं कि राखी एक पवित्र रिश्ता है, जिसका आधार प्यार और सुरक्षा है। लेकिन ये सुरक्षा कभी कंट्रोल में नहीं बदलनी चाहिए। हर बहन की जिंदगी उसके अपने फैसलों से बननी चाहिए, न कि किसी के आदेश से। हर लड़की को अपने सपनों को जीने का हक है। उसका हां और ना, दोनों उतने ही अहम हैं जितने किसी और के। भाई का काम सिर्फ बहन को बाहर की दुनिया से बचाना नहीं, बल्कि उसके आत्मविश्वास को बढ़ाना भी है। उसे सपोर्ट करना चाहिए, न कि उस पर अपने विचार थोपने चाहिए। मैं चाहती हूं कि हर भाई अपनी बहन के फैसलों का सम्मान करे और उसे आगे बढ़ने की आजादी दे। यही असली रक्षा है।