{"_id":"5b6d670b4f1c1b913e8b640e","slug":"suniel-shetty-best-dialogue-on-his-birthday","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक्टिंग के अलावा सुनील शेट्टी के ये दमदार डायलॉग्स भी हैं मशहूर, तीसरा वाला तो सबसे जबरदस्त है","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
एक्टिंग के अलावा सुनील शेट्टी के ये दमदार डायलॉग्स भी हैं मशहूर, तीसरा वाला तो सबसे जबरदस्त है
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Updated Sat, 11 Aug 2018 01:49 PM IST
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बॉलीवुड के दमदार एक्टर सुनील शेट्टी कल यानी 11 अगस्त को अपना 57वां जन्मदिन मनाने वाले है। फिल्म इंडस्ट्री में 'अन्ना' के नाम से मशहूर सुनील शेट्टी की हिंदी सिनेमा में एक अलग ही पहचान है। उन्होंने साल 1992 में फिल्म 'बलवान' से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। सुनील शेट्टी ने अपनी पहली फिल्म से ही कई कलाकारों को पीछे छोड़ दिया था। उन्होंने 'बलवान' के बाद कई शानदार फिल्में की। कई सहयोगी कलाकार के साथ भी उन्होंने अपनी एक्टिंग से दर्शकों को हैरान किया। केवल एक्टिंग ही नहीं फिल्मों सुनील शेट्टी के डायलॉग्स भी काफी मशहूर हुए। उन्होंने कई फिल्मों अपने दमदार डायलॉग्स से सिनेप्रेमियों के दिलों जीता। जन्मदिन के खास मौके पर आज हम आपको उनके ऐसे ही कुछ दमदार डायलॉग्स से रूबरू करवाते हैं।
डायलॉग- प्यार तो उसने किया, हमने तो बस दिल्लगी की
फिल्म- दिलवाले (1994)
डायलॉग- ना हिंदू से है, ना मुसलमान से है, इस मुल्क में तकलीफ बेईमानों से है
फिल्म- कयामत (2003)
डायलॉग- मैं तुम्हें भूल जाऊं ये हो नहीं सकता, और तुम मुझे भूल जाओ ये मैं होने नहीं दूंगा
फिल्म- धड़कन (2000)
डायलॉग- मुजरिम मां के पेट से जन्म नहीं लेता, उसे जन्म देता है तुम्हारा कानून, तुम्हारी पुलिस
फिल्म- मोहरा (1994)
डायलॉग- सांप के बिल में हाथ डालने वाला उसका जेहर उतारना भी जानता है।
फिल्म- गोपी किशन (1994)
डायलॉग- हमारे धंधे में माफी नहीं चलती सिर्फ लक चलता है।
फिल्म- सपूत (1996)
डायलॉग- मोहब्बत करने वाले कभी मोहब्बत के दूश्मन नहीं होते हैं
फिल्म- रेफ्युजी (2000)
डायलॉग- दिलवाले तो बहुत देखे, लेकिन प्यार में पागल हो जाए, ऐसे दिलवाले को आज पहली बार देखा है।
फिल्म- दिलवाले (1994)
डायलॉग- इस जन्म क्या वो सात जन्म तक जीत नहीं सकता है।
फिल्म- धड़कन (2000)
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डायलॉग- प्यार तो उसने किया, हमने तो बस दिल्लगी की
फिल्म- दिलवाले (1994)
डायलॉग- ना हिंदू से है, ना मुसलमान से है, इस मुल्क में तकलीफ बेईमानों से है
फिल्म- कयामत (2003)
डायलॉग- मैं तुम्हें भूल जाऊं ये हो नहीं सकता, और तुम मुझे भूल जाओ ये मैं होने नहीं दूंगा
फिल्म- धड़कन (2000)
डायलॉग- मुजरिम मां के पेट से जन्म नहीं लेता, उसे जन्म देता है तुम्हारा कानून, तुम्हारी पुलिस
फिल्म- मोहरा (1994)
डायलॉग- सांप के बिल में हाथ डालने वाला उसका जेहर उतारना भी जानता है।
फिल्म- गोपी किशन (1994)
डायलॉग- हमारे धंधे में माफी नहीं चलती सिर्फ लक चलता है।
फिल्म- सपूत (1996)
डायलॉग- मोहब्बत करने वाले कभी मोहब्बत के दूश्मन नहीं होते हैं
फिल्म- रेफ्युजी (2000)
डायलॉग- दिलवाले तो बहुत देखे, लेकिन प्यार में पागल हो जाए, ऐसे दिलवाले को आज पहली बार देखा है।
फिल्म- दिलवाले (1994)
डायलॉग- इस जन्म क्या वो सात जन्म तक जीत नहीं सकता है।
फिल्म- धड़कन (2000)