Shantanu Moitra: विज्ञापन एजेंसी से शुरुआत, इस फिल्म में संगीत देकर चमके शांतनु के किस्मत के सितारे
Shantanu Moitra: शांतनु मोइत्रा एक भारतीय पियानोवादक और कंपोजर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत विज्ञापन एजेंसी में की, जहां उन्होंने जिंगल्स बनाए। बाद में, उन्होंने फिल्मों में संगीत देने की शुरुआत की।
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शांतनु मोइत्रा एक ऐसा नाम है जिसे भारतीय संगीत इंडस्ट्री में हमेशा सम्मान से याद किया जाएगा। पियानोवादक, संगीतकार के रूप में उन्होंने न केवल फिल्मों के संगीत से लोगों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी, बल्कि अपनी प्रतिभा से उन्होंने संगीत जगत को नया दृष्टिकोण भी दिया। आइए उनके जन्मदिन पर जानते हैं उनसे जुड़ी खास बातें...
शांतनु मोइत्रा का जन्म लखनऊ में एक बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था। हालांकि, इसके बाद उनके परिवार ने जल्दी ही दिल्ली का रुख कर लिया। उन्होंने पश्चिमी दिल्ली के पटेल नगर में अपनी शिक्षा शुरू की। यहां पढ़ाई के दौरान उन्होंने संगीत में अपनी रुचि दिखाई और एक बैंड के लीडर और गायक के रूप में स्कूल में प्रस्तुति देनी शुरू की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के देशबंधु कॉलेज से अर्थशास्त्र में डिग्री प्राप्त की, लेकिन उनका दिल हमेशा संगीत में लगा रहा।
शांतनु ने अपने करियर की शुरुआत एक विज्ञापन एजेंसी में क्लाइंट सर्विसिंग एग्जीक्यूटिव के तौर पर की थी। हालांकि, उनका संगीत के प्रति प्यार कभी नहीं कम हुआ। उन्होंने जिंगल्स बनाने की शुरुआत की और अपना पहला जिंगल एक प्रमुख चिप्स ब्रैंड के लिए बनाया, जो जबरदस्त हिट हुआ। इसके बाद उन्होंने अपने क्रिएटिव हेड प्रदीप सरकार के साथ अन्य विज्ञापन ब्रांड्स के लिए कई और जिंगल्स बनाए।
शांतनु मोइत्रा ने फिल्म इंडस्ट्री में कदम 2002 में रखा। उन्होंने सुधीर मिश्रा की फिल्म हजारों ख्वाहिशें ऐसी के लिए संगीत दिया। स्वानंद किरकिरे के साथ उनकी जोड़ी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। 'बावरा मन' जैसे गाने आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। यह उनकी पहली फिल्म थी। इसके बाद बॉलीवुड में वह आगे बढ़ते चले गए। उनको पहली बड़ी पहचान परिणीता (2005) से मिली, जिसमें उनके संगीत को बेहद सराहा गया। इस फिल्म से उनके किस्मत के सितारे चमक गए। उन्हें इस फिल्म के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया। उसी साल उन्हें नए संगीत प्रतिभा के लिए फिल्मफेयर आरडी बर्मन पुरस्कार भी मिला। हिंदी में परिणीता (2005), हजारों ख्वाहिशें ऐसी (2005), लगे रहो मुन्नाभाई (2006), और 3 इडियट्स (2009) जैसी फिल्मों में उनके संगीत को अपार सफलता मिली।
इसके बाद शांतनु ने कई हिट फिल्मों में संगीत दिया और उन्होंने बंगाली फिल्मों में भी अपने संगीत का जादू बिखेरा। 2009 में उन्होंने अपनी पहली बंगाली फिल्म 'अंतहीन' के लिए संगीत तैयार किया। इसके अलावा उनके निजी एल्बम 'मन के मंजीरे' और 'अब के सावन' भी बेहद लोकप्रिय हुए, जिनमें शुभा मुद्गल की आवाज थी। 2014 में उन्हें ना बंगारू टल्ली के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला। उनकी फेरारी मोन - मेमोरीज नाम की किताब भी प्रकाशित हो चुकी है।