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'वो क्या है कि नई दुल्हन नथ को बार बार देखती है'

Mon, 03 Nov 2014 12:48 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला मुंबई
ब्यूरो/अमर उजाला मुंबई Updated Mon, 03 Nov 2014 12:48 PM IST
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sadashiv amrapurkar best dialogues

सदाशिव भले ही अब न रहे हों लेकिन उनके हिट डायलॉग हमें याद भी रहेंगे और हम उनको बोलते भी रहेंगे।

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मैं हूं इस जिस्म के बाजार का महाराजा और नाम है महारानी...। यह डायलॉग फिल्म सड़क का है। जिसने सदाशिव अमरापुरकर को सबसे ज्यादा लोकप्रियता दी। उनकी संवाद अदायगी का अंदाज निराला था। हल्की मिठास वाली उनकी आवाज दिल को चीर जाती थी।


उसमें क्रूरता की धार होती थी। वे जिस्म के बाजार की महारानी से लेकर नेता, गुंडे और अंडरवर्ल्ड डॉन के रूप में पर्दे पर दिखते रहे। उनकी कॉमेडी का भी अंदाज अलग था। एक नजर उनके लोकप्रिय हुए संवादों परः
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*नाग हूं मैं नाग... काला नाग। (-ऐलान-ए-जंग)
*अब हम उसके साथ खेलेंगे... हैवानियत का खेल खेलेंगे। (-ऐलान-ए-जंग)
*तालियां बजाने से काम नहीं होगा, काम करने से काम होगा। (-ऐलान-ए-जंग)
*ये साला भूलने की आदत मैं कब भूलूंगा। (-आंखें)
*इमानदारी कितनी भी बेवकूफ हो, आखिर एक दिन उसकी तरक्की जरूर होती है... और बेईमानी कितनी भी चालाक हो, एक दिन उसे जेल में जरूर जाना पड़ता है। (-आंखें)
*ऐसी मौत मारूंगा इनको कि इश्क करने वालों की रूह कांप जाए। (-इश्क)
*जब बाजी दुक्की और तिक्की से जीती जा सकती है तो उसके लिए इक्का निकालने की क्या जरूरत है। (-इश्क)
*तुम क्या समझती हो कृष्ण भगवान तुम्हें बचाने आएंगे... वो महाभारत में आए थे... इस भारत में नहीं आएंगे। (-आखिरी रास्ता)
*नाम है मेरा हटेला हिटलर... मेरी मक्कारी के सामने हिटलर भी बन जाता है बटलर। (-दो नंबरी)
*राजनीति में गूंगे और बहरे बन कर रहो तो राज करोगे। (-गॉड एंड गन)
*बकरा खुद किसी के घर के सामने जाकर कत्थक करेगा तो उसे कौन बचा सकता है। (-मोहरा)
*तुम्हारी गर्दन के नाप का फंदा तैयार कर लिया है मैंने। (-मोहरा)
*नई नई वर्दी है ना। वो क्या है नई दुल्हान अपनी नथ को बार बार आईने में देखती है। (-मोहरा)
*मैं एक बार कहता हूं... सौ बार समझ लेना। (-दो नंबरी)
*मेरा नाम है घोरपड़े... और मेरे सामने अच्छे अच्छे गिर पड़े। (-हम हैं कमाल के)
*पेड़ चाहे बबूल का हो या चंदन का... कुल्हाड़ी सबको काटती है। (-दो आंखें बारह हाथ)


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