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Hansal Mehta: 'मैं बहुत शराब पीता था...', हंसल मेहता ने अपने जीवन के कठिन दौर को किया बयां
Fri, 22 Sep 2023 10:41 AM IST
आकांक्षा गुप्ता
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: आकांक्षा गुप्ता
Updated Fri, 22 Sep 2023 10:41 AM IST
सार
हंसल मेहता ने अपने जीवन के उन पलों को साझा किया, जब 30 के दशक में उन्होंने शराब पीना शुरू किया था। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी सफीना हुसैन ने उन्हें इन सबसे बाहर आने में मदद की।
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हंसल मेहता
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
जाने-माने निर्देशक हंसल मेहता ने कई शानदार फिल्मों को निर्देशित किया है। उन्होंने 'सिटीलाइट्स', 'शाहिद', 'अलीगढ़' और 'दस कहानियां' जैसी कई अन्य फिल्मों को निर्देशित किया है। बड़े पर्दे पर उन्होंने भले ही कई कहानियों को निर्देशित किया है, मगर अपनी रियल लाइफ कहानी को पर्दे से छुपाए रखने में वह सफल रहे। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान हंसल मेहता ने अपने जीवन के उस कठिन दौर को बताया। उन्होंने बताया कि कैसे उनकी पत्नी सफीना हुसैन ने उन्हें इन सबसे बाहर आने में मदद की।
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अपने कठिन दौर को किया साझा
इंटरव्यू के दौरान हंसल मेहता ने अपने जीवन के उन पलों को साझा किया, जब 30 के दशक में उन्होंने शराब पीना शुरू किया था। निर्देशक ने कहा, मैं जब 25-30 वर्ष का था, खासकर जब मैंने 2000 में रिलीज हुई फिल्म 'दिल पर मत ले यार' बनाई थी। उस समय में 31 या 32 साल का था और 6 से 7 सालों तक मेरी जिंदगी में यही दौर रहा था। फिर मुझे एहसास हुआ कि कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा। उस वक्त सब चीजें बस खराब हो रही थीं, गलत हो रही थीं। मेरी फिल्में भी कुछ खास चल नहीं रही थीं।
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जीवन के कठिन समय को कैसे किया पार
हंसल मेहता ने आगे बताया, 'मैं अलग रहने लगा था। एक ही वक्त में काफी सारी चीजें हुईं। वहां मेरे बच्चे थे और मुझे पता ही नहीं था कि मैं अपनी जिम्मेदारियां कैसे निभाऊं। मैं बहुत ज्यादा शराब पीता था, जो मेरे स्वास्थ के लिए भी ठीक नहीं थी।' इंटरव्यू के दौरान जब उनसे सवाल किया गया कि उस कठिन समय को कैसे पार किया जाए। तो उन्होंने इसका पूरा श्रेय अपनी पत्नी को दिया कि उनसे मिलने के बाद उनके जीवन में थोड़ी स्थिरता आई।
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'शाहिद के बाद मुझे अपना काम पसंद'
'अलीगढ़' निर्देशक ने कहा, 'उसके आने के बाद धीरे-धीरे इन सबसे बाहर आने में मदद मिली। इसमें भी काफी समय लगा। मेरा मतलब कि शुरुआत में उसे भी काफी मुश्किल हो रहा था कि कितना पीते हो। उसने मुझे बताया और फिर यह एक चीज बन गई जिस पर मुझे काम करना था। मैं कोई शराबी नहीं था, लेकिन मैं शराब पीता था। मैं अभी भी कभी-कभी पीता हूं, लेकिन मुझे पता होता है कि कितनी मात्रा में पीनी है, जिससे अगले दिन मैं काम भी कर सकूं। मेरा फोकस अब धीरे-धीरे बदल रहा है। 'शाहिद' के बाद से मुझे अपना काम पसंद है।'
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अपने कठिन दौर को किया साझा
इंटरव्यू के दौरान हंसल मेहता ने अपने जीवन के उन पलों को साझा किया, जब 30 के दशक में उन्होंने शराब पीना शुरू किया था। निर्देशक ने कहा, मैं जब 25-30 वर्ष का था, खासकर जब मैंने 2000 में रिलीज हुई फिल्म 'दिल पर मत ले यार' बनाई थी। उस समय में 31 या 32 साल का था और 6 से 7 सालों तक मेरी जिंदगी में यही दौर रहा था। फिर मुझे एहसास हुआ कि कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा। उस वक्त सब चीजें बस खराब हो रही थीं, गलत हो रही थीं। मेरी फिल्में भी कुछ खास चल नहीं रही थीं।
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जीवन के कठिन समय को कैसे किया पार
हंसल मेहता ने आगे बताया, 'मैं अलग रहने लगा था। एक ही वक्त में काफी सारी चीजें हुईं। वहां मेरे बच्चे थे और मुझे पता ही नहीं था कि मैं अपनी जिम्मेदारियां कैसे निभाऊं। मैं बहुत ज्यादा शराब पीता था, जो मेरे स्वास्थ के लिए भी ठीक नहीं थी।' इंटरव्यू के दौरान जब उनसे सवाल किया गया कि उस कठिन समय को कैसे पार किया जाए। तो उन्होंने इसका पूरा श्रेय अपनी पत्नी को दिया कि उनसे मिलने के बाद उनके जीवन में थोड़ी स्थिरता आई।
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'शाहिद के बाद मुझे अपना काम पसंद'
'अलीगढ़' निर्देशक ने कहा, 'उसके आने के बाद धीरे-धीरे इन सबसे बाहर आने में मदद मिली। इसमें भी काफी समय लगा। मेरा मतलब कि शुरुआत में उसे भी काफी मुश्किल हो रहा था कि कितना पीते हो। उसने मुझे बताया और फिर यह एक चीज बन गई जिस पर मुझे काम करना था। मैं कोई शराबी नहीं था, लेकिन मैं शराब पीता था। मैं अभी भी कभी-कभी पीता हूं, लेकिन मुझे पता होता है कि कितनी मात्रा में पीनी है, जिससे अगले दिन मैं काम भी कर सकूं। मेरा फोकस अब धीरे-धीरे बदल रहा है। 'शाहिद' के बाद से मुझे अपना काम पसंद है।'
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