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इंटरव्यू: ‘म्यूजिकल इवेंट में शाहरुख को बुला लेंगे’, आयोजकाें पर क्यों भड़के कैलाश खेर? बोले- संगीत की पहचान..

Wed, 16 Sep 2026 08:30 AM IST
Kiran Vinod Kumar Jain किरण जैन
Updated Wed, 16 Sep 2026 08:30 AM IST
सार

Kailash Kher Interview: कैलाश खेर इन दिनों अपने नए गाने ‘थम जा’ को लेकर चर्चा में हैं। गाने में जिंदगी के उन खूबसूरत पलों को थाम लेने की चाहत को आवाज दी गई है, जिन्हें इंसान याद बन जाने से पहले अपने साथ रोक लेना चाहता है।

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Kailash kher on independent music and Shahrukh khan dance in musical shows
कैलाश खेर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाल ही में अमर उजाला से इसी गाने को लेकर हुई बातचीत में कैलाश खेर ने इसके पीछे के विचार से लेकर म्यूजिक इंडस्ट्री में बदलाव की जरूरत तक कई बातें साझा कीं। खास तौर पर उन्होंने फिल्मी संगीत से अलग इंडिपेंडेंट म्यूजिक की अपनी पहचान और उसे मिलने वाले सम्मान की जरूरत पर बात की।

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‘ऐसे मोमेंट्स के लिए ही समर्पित किया था गाना’
‘थम जा’ के पीछे का विचार बताते हुए कैलाश खेर ने कहा कि जिंदगी में कुछ ऐसे पल आते हैं, जिन्हें इंसान यादों में बदलने से पहले ही रोक लेना चाहता है। उन्होंने कहा, ‘जीवन में बहुत ऐसे पल होते हैं, जो हमारी यादों में बन जाने से पहले ही मन करता है कि समय ही थम जाए। तो ऐसे मोमेंट्स के लिए ही समर्पित किया था गाना।

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और ये विचार आया तो हम तो इसी जीवन में रहते हैं, प्रेम में रहते हैं और इसी प्रकार के विचारों से संगीत बनाते रहते हैं। ऐसी कल्पना थी कि जब भी आप खुश होते हैं, जब भी आप आनंद में होते हैं, कोई ऐसा रस आपके जीवन में आता है, तो मन करता है कि काश यही मोमेंट, यही समय थम जाए।’

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कैलाश खेर - फोटो : अमर उजाला

‘मेरे जीवन का हर पल बहुत यादगार बनता है’
जब उनसे पूछा गया कि उनकी अपनी जिंदगी में ऐसा कौन सा पल रहा, जिसे उन्होंने रोक लेना चाहा हो, तो उन्होंने कहा, ‘हमारे जीवन का हर पल बहुत यादगार बनता है, क्योंकि हम परमात्मा से जुड़े रहते हैं, ध्यान में रहते हैं, परमेश्वर में व्यस्त रहते हैं और भक्ति में डूबे रहते हैं। सांसारिक अचीवमेंट बताऊं तो वो बहुत छोटा लगता है, लेकिन जब आप आनंद में डूबे रहते हैं, प्रेम में रहते हैं तो ऐसा लगता है जैसे यही पल है।' प्रेम की ताकत के बारे में उन्होंने कहा, ‘प्रेम ही एक ऐसी ताकत है, ऐसी स्थिति है, जब आप असंभव को भी संभव कर लेते हैं।’

‘म्यूजिक को इज्जत मिले' 
म्यूजिक इंडस्ट्री में वह कौन सा बदलाव देखना चाहते हैं, इस पर कैलाश खेर ने प्रोफेशनलिज्म और संगीत को सम्मान दिए जाने की बात कही। उनका कहना है कि भारत में फिल्मी संगीत और स्वतंत्र संगीत को अलग पहचान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘हम यही बदलाव चाहते हैं कि प्रोफेशनलिज्म हो और म्यूजिक को इज्जत मिले। यहां पर म्यूजिक जैसे ही आप शब्द बोलते हैं तो फिल्मी म्यूजिक को ही म्यूजिक मानते हैं लोग। अरे, फिल्मी म्यूजिक को फिल्मी म्यूजिक लिखिए और म्यूजिक को म्यूजिक लिखिए।

 

Kailash kher on independent music and Shahrukh khan dance in musical shows
कैलाश खेर - फोटो : सोशल मीडिया

‘वो इंडिपेंडेंट म्यूजिक होता है’ 
कैलाश खेर के मुताबिक फिल्मी संगीत और इंडिपेंडेंट म्यूजिक की प्रकृति अलग है। फिल्मी गाना कई लोगों के मिलकर काम करने से बनता है, जबकि इंडिपेंडेंट म्यूजिक में एक कलाकार खुद लिखने, कंपोज करने, गाने और लाइव परफॉर्म करने तक की भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा, ‘फिल्म का गाना अलग होता है। उसमें कोई और लिख रहा है, कोई और धुन बना रहा है, कोई और गा रहा है और कोई और उसके ऊपर नाच रहा है। उसमें टीमवर्क होता है अलग ही।
लेकिन जब आप किसी एक म्यूजिक को ऐसे देखते हैं कि इन्होंने गाना लिखा भी, कंपोज भी किया, गाया भी और लाइव परफॉर्म भी कर रहे हैं, वो इंडिपेंडेंट म्यूजिक होता है। उसकी अपनी पहचान होनी चाहिए।’

‘U2 का फिल्म से क्या कनेक्शन है?’ 
‘अपनी बात समझाने के लिए कैलाश खेर ने U2 (आइरिश रॉक बैंड) का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, ‘U2 तो कोई यूट्यूब  का और फिल्म का तो कनेक्शन नहीं है न जी। लेकिन वो अपने आप में बड़ा, फिल्म से भी बड़ा इंडस्ट्री है।

इसी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कोल्डप्ले बैंड (ब्रिटिश रॉक बैंड) का उदाहरण दिया। कैलाश ने कहा, ‘ये कोई फिल्म है क्या? नहीं है। ये फिल्म के गाने नहीं गाते, इनकी पहचान अपने संगीत से है।  दूसरे देशों में ऐसे म्यूजिक एक्ट्स की अपनी पहचान होती है, जबकि भारत में म्यूजिक को अक्सर फिल्मों से जोड़कर देखा जाता है।'

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शाहरुख खान के साथ कैलाश खेर - फोटो : सोशल मीडिया

‘हमारे यहां म्यूजिक की बात होगी तो शाहरुख खान को बुला लेंगे’
कैलाश खेर ने कहा कि भारत में म्यूजिक की चर्चा अक्सर फिल्मों और फिल्मी सितारों से जुड़ जाती है। उन्होंने इसी सोच पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘हमारे यहां ऐसी कोई म्यूजिक की बात होगी तो शाहरुख खान को बुला लेंगे लोग। म्यूजिक के लिए सोचिए जी। और वो फिर ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ के गानों पर नाचने लगे। अगर म्यूजिक की पहचान इसी तरह फिल्मों और सितारों के जरिए होगी, तो इंडिपेंडेंट संगीत की अपनी जगह कैसे बनेगी?'

‘इंडिपेंडेंट म्यूजिक को अपनी पहचान मिलनी चाहिए’
कैलाश खेर की पूरी बात का सार यही है कि फिल्मी संगीत और इंडिपेंडेंट म्यूजिक को एक ही श्रेणी में रखकर नहीं देखा जाना चाहिए। इसी बदलाव को लेकर उन्होंने कहा, ‘तो हमारे यहां यदि कुछ बदले तो मानसिकता बदले और म्यूजिक को म्यूजिक की तरह डिफाइन करके लिखे। फिल्म अलग रखे। फिल्में तो सौ साल से बननी शुरू हुईं, जबकि म्यूजिक तो युगों-युगों से बनता आ रहा है। तो अगर कुछ बदला जाए तो ये बदला जाए।’

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