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'बहन होगी तेरी' फिल्म देखने से पहले जरूर जान लें ये 8 बातें

Sat, 10 Jun 2017 10:17 AM IST
रवि बुले
रवि बुले Updated Sat, 10 Jun 2017 10:17 AM IST
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Rajkumar Rao And Shruti Hassan Film 'Behen Hogi Teri' Review In 10 Points
'बहन होगी तेरी' फिल्म
इस शुक्रवार राजकुमार राव और श्रुति हसन की फिल्म 'बहन होगी तेरी' रिलीज हुई है। गली-मोहल्ले के प्यार को हल्के-फुल्के अंदाज में दर्शाती इस फिल्म को क्रिटिक्स से मिक्स्ड रिव्यू मिले हैं। अगर आपने भी फिल्म देखने का मन बनाया है तो उससे पहले फिल्म के बारे में ये 10 बातें पढ़ लें-
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1. अपने मूल आइडिया में यह रोचक फिल्म है। स्कूल में छात्र प्रतिज्ञा की यह पंक्ति अक्सर किशोरों को खटकती है कि 'हम सब भारतवासी आपस में भाई-बहन 'हैं। खयाल आता है कि सब कैसे भाई-बहन? एक को तो छोड़ना होगा।
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2. थोड़े क्रिकेट और थोड़े रोमांस के बीच लखनऊ में रहने वाले गट्टू (राजकुमार राव) की भी यही हालत है। गली में सामने रहने वाली बचपन से साथ खेली, बड़ी हुई बिन्नी (श्रुति हासन) के लिए उसका दिल धड़कता है मगर गली-परिवार वालों को लगता है कि मोहल्ले की लड़की तो गट्टू की बहन जैसी है।
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3. जब तक गट्टू इजहार-ए-मोहब्बत करे बिन्नी से सगाई के लिए एनआरआई दूल्हा मौजूद हो जाता है। गट्टू को दोस्त का सहारा मिलता है मगर कैसे? क्या मोहब्बत ऐसे अंजाम तक पहुंच पाती है जहां रोना न आए?

4. अपनी पहली फिल्म के साथ आए निर्देशक अजय पन्नालाल अगर मूल आइडिया पर टिके रहते तो फिल्म बांधे रहती। परंतु दूसरे हिस्से में उन्होंने कुछ और छोटी-छोटी कहानियों को पिरोने की कोशिश की है।

5. लंबा खींचने के चक्कर में दूसरे हिस्से में फिल्म ढीली हो जाती है। इसके बावजूद अगर आप हल्के-फुल्के कॉमिक रोमांस और चुटीली बातों से आनंदित हो सकते हैं तो 'बहन होगी तेरी' मनोरंजन करेगी।

6. छोटे शहरों में प्यार के इजहार की सकुचाहट के कुछ पल इसमें खूबसूरती से उभरकर आए हैं। फिल्म राजकुमार राव के कंधों पर है। उन्होंने बेहतरीन अभिनय से इसे खूब संभाला है। गंभीर फिल्में करने वाले राजकुमार साधारण लड़के लगे हैं और मासूमियत के साथ उनकी घबराहट भी अच्छी लगती है।


7. फिल्म को और बेहतर बनाने के लिए अच्छी अभिनेत्री की दरकार थी। इस मामले में श्रुति हासन खरी नहीं उतरतीं और कमजोर कड़ी बन जाती हैं। पंजाबी कुड़ी बनने के लिए श्रुति अतिरिक्त कोशिश करती हैं। बात बन नहीं पाती।

8. निर्देशक ने लखनऊ को खूबसूरती से पर्दे पर उतारा है और फिल्म के संपादन में कसावट है। संगीत बेहतर होता तो फिल्म को फायदा मिलता।
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