बायोपिक के बहाने हो रही राजनीति में अब इस मशहूर शख्सियत पर लगा दांव, मुंबई में बिछने लगी ये नई बिसात
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सिनेमा में राजनीति और सिनेमा की राजनीति में फर्क बहुत बारीक सा है। पिछले कई हफ्तों से मुंबई में सिनेमा से राजनीति होती रही है। तमाम बड़े निर्माता, निर्देशकों और कलाकार दबी जुबान से कहने लगे कि उनको अपने दैनिक जीवन की अभिरुचियों और देश की राजनीति पर टिप्पणियों को लेकर निशाना बनाया जा रहा है। इनके पास संदेश पहुंच रहे हैं कुछ खास तरीके की फिल्में बनाने के, ऐसा ही एक संदेश आया है उन हरी सिंह नलवे पर फिल्म या सीरीज बनाने का जिनका जिक्र आपने मनोज कुमार की फिल्म 'उपकार' के गाने 'मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती...' में ही पहली बार सुना होगा।
हिंदी सिनेमा का ये सच है कि बीते तीन चार साल से हिंदी सिनेमा के तमाम निर्माता निर्देशकों को ऐसी फिल्में बनाने के लिए दीक्षित करने का मिशन भी चलता रहा है, जो एक खास विचारधारा की पोषक बनें और जिनमें कुछ खास राजनीतिक दलों या समाज के वर्गों को नकारात्मक छवि के साथ पेश किया जा सके। ये अलग बात है कि हिंदी सिनेमा के दर्शकों ने एक दो को छोड़कर ऐसा कोई प्रयोग अब तक सफल होने नहीं दिया।
पिछले कुछ साल से हिंदी सिनेमा में इतिहास पर आधारित कुछ ऐसे मुद्दों पर फिल्में बनाई जा रही हैं जिनके बारे में आम लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं रही है। जो इतिहास में दिलचस्पी रखते हैं उनको भी इन विषयों के बारे में खास पता नहीं रहा है। इसी अभियान के तहत 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर', 'पीएम नरेंद्र मोदी', 'उरी- द सर्जिकल स्ट्राइक', 'मणिकर्णिका- द क्वीन ऑफ झांसी', 'तानाजी- द अनसंग वॉरियर' जैसी फिल्में तो बनाई जा चुकी हैं और 'पृथ्वीराज', 'ऊधम सिंह' और 'पुलवामा' जैसी फिल्में बन रही हैं। इसी कड़ी में अब एक नया नाम जुड़ा है सरदार हरि सिंह नलवा का।
मुंबई में बनने वाले सिनेमा और इन्हें बनाने वालों में अधिकतर अब तक धर्म, जाति या पार्टी के नाम पर बंटे नहीं हैं। उनके बीच लकीरें खींचने की कोशिशें अब से नहीं पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय से होती आ रही हैं, पर पार्टी कोई भी हो, मुंबई में बनने वाले सिनेमा और सीरीज के लोग कभी धर्म, जाति या दलों के खेमे में बंटे नहीं। दर्शकों ने भी वर्ग विभेद वाली फिल्मों को अब तक ज्यादा तवज्जो नहीं दी है। इसी के चलते 'पीएम नरेंद्र मोदी' और 'एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' जैसी फिल्में जमकर प्रमोशन के बावजूद फेल हो गईं। 'गोलियों की रासलीला राम-लीला' और 'पद्मावत' तमाम विरोध के बावजूद हिट रहीं।
अब जो नई कहानी मुंबई में शनिवार सुबह से तैर रही है वह है सरदार हरि सिंह नलवा की। वह सिख साम्राज्य की खालसा फौज के कमांडर इन चीफ थे। कहा जाता है उन्होंने अपने कार्यकाल में उन्होंने करीब 22 लड़ाइयों में भाग लिया और सभी में फतेह हासिल की। पर्दे पर हरि सिंह के चरित्र को बड़े पैमाने पर फिल्माए जाने की कोशिश है ताकि पंजाब में आने वाले चुनाव से पहले कुछ बड़ा किया जा सके। ये कोशिश वैसी ही है जैसी पिछले आम चुनाव से ठीक पहले दक्षिण के नामी निर्देशक एस एस राजामौली के पिता के विजयेंद्र प्रसाद ने की थी। वह शिवाजी से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक की कहानी को पांच हिस्सों में बनाना चाहते थे, जिसकी हर कहानी को एक बड़े हीरो और एक बड़े निर्देशक के साथ बनाया जाना था। लेकिन, इस फिल्म में पैसा लगाने को देश कोई धन्ना सेठ तैयार नहीं हुआ।
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