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गैर फिल्मी गानों पर सेंसर बोर्ड की मांग, दिल्ली हाई कोर्ट में दायर की गई याचिका

एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: अमरीन हुसैन Updated Fri, 09 Apr 2021 12:04 PM IST
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दिल्ली हाई कोर्ट
दिल्ली हाई कोर्ट - फोटो : Social media

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ओटीटी और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को लेकर दिशा निर्देश तैयार किए जा चुके हैं और जल्द ही उन्हें अमली जामा भी पहना दिया जाएगा। लंबे समय से ओटीटी और ऑनलाइन कंटेंट को सेंसर करने की मांग चल रही थी, जिसपर सरकार ने फैसला लिया और सख्त नियम बनाए जा रहे हैं। वहीं, इससे ही जुड़ा एक और नया मामला सामने आया है, जिसमें गैर फिल्मी गानों पर सेंसर लगाने की मांग की गई है। इसके लिए एक शिकायतकर्ता ने टोनी और नेहा कक्कड़ के गाने ‘शोना शोना’ व हनी सिंह के ‘सैयां जी’ और ‘मखना’ का हवाला दिया है। शिकायतकर्ता ने ऐसे नॉन फिल्मी गानों पर प्रतिबंध लगाने और समिति गठन करने की मांग की है।

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इसको लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें तत्काल प्रभाव से इंटरनेट पर मौजूद अश्लील और गैर फिल्मी गानों की जांच करने की अपील की गई है। साथ इनपर प्रतिबंध लगाने के लिए कहा गया है। वहीं, जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस जसमीत सिंह की बेंच ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय को एक नोटिस जारी किया है। इसके अनुसार 17 मई की सुनवाई से पहले मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं।

 

ये याचिका दिल्ली हाई कोर्ट में अभ्यासाधीन अधिवक्ता नेहा कपूर और मोहित भादु द्वारा दर्ज कराई गई है। उन्होंने नॉन फिल्मी गानों के लिए सर्टिफिकेट जारी करने की मांग की है। दोनों अधिवक्ताओं ने अपनी याचिका में कहा है कि ‘इस तरह की सामग्री को नियंत्रित नहीं किया गया तो हम लैंगिक समानता के मामले में पीछे की ओर आ जाएंगे और महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल भी नहीं बना पाएंगे।‘

 

गानों को लेकर कहा गया है कि ‘गैर फिल्मी गाने लोगों को महिलाओं के खिलाफ उकसाते हैं। ये अपराध को बढ़ावा दे रहे हैं। आज के युवा ऐसे गानों से भटक रहे हैं। क्योंकि इन गानों की लेखनी अश्लील होती है, जो युवा और समाज में व्यापक रूप से गलत प्रभाव डाल रही है। ऐसे गानों की जांच के लिए समिति होनी चाहिए, जो इनकी जांच कर प्रकाशित करने की मंजूरी दे।‘

 

बता दें कि पिछले काफी समय से ओटीटी और सोशल मीडिया पर भी सेंसर लगाने को लेकर कोर्ट और सरकार के पास शिकायतें आ रही थीं, जिसके बाद सरकार ने इसको लेकर कानून भी बना दिया है। अब इस मामले में 17 मई को सुनवाई होनी है, जिसके बाद इस पर भी फैसला लिया जाएगा।

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