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Digital Review: बदलते दौर में युवाओं की दिलचस्प कहानी है 'हे प्रभु'
Sun, 24 Feb 2019 02:40 PM IST
शिप्रा सक्सेना
मुंबई डेस्क, अमर उजाला
मुंबई डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिप्रा सक्सेना
Updated Sun, 24 Feb 2019 02:40 PM IST
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Hey Prabhu Digital Review
- फोटो : twitter
डिजिटल रिव्यू: हे प्रभु (वेब सीरीज)
कलाकार: रजत मारमेचा, पारुल गुलाटी, अचिंत कौर, ऋतुराज सिंह, शीबा चड्ढा। लेखक: निहित भावे।
निर्देशक: शशांक घोष
ओटीटी: एमएक्स प्लेयर
ओटीटी का बाजार फैलता ही जा रहा है। और, जब कानपुर, कोल्हापुर जैसे शहरों में किसी वेब सीरीज के होर्डिंग लगने लगें तो तय हो जाता है कि मनोरंजन उद्योग आने वाले समय में मोबाइल पर ही चलेगा। ऑस्कर तक जा पहुंची वेब फिल्मों के समय में वेब सीरीज हे प्रभु बदलते दौर के युवाओं की एक दिलचस्प कहानी पेश करती है।
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कलाकार: रजत मारमेचा, पारुल गुलाटी, अचिंत कौर, ऋतुराज सिंह, शीबा चड्ढा। लेखक: निहित भावे।
निर्देशक: शशांक घोष
ओटीटी: एमएक्स प्लेयर
ओटीटी का बाजार फैलता ही जा रहा है। और, जब कानपुर, कोल्हापुर जैसे शहरों में किसी वेब सीरीज के होर्डिंग लगने लगें तो तय हो जाता है कि मनोरंजन उद्योग आने वाले समय में मोबाइल पर ही चलेगा। ऑस्कर तक जा पहुंची वेब फिल्मों के समय में वेब सीरीज हे प्रभु बदलते दौर के युवाओं की एक दिलचस्प कहानी पेश करती है।
वेबसीरीज का घेरा बदलते मीडिया पर भी करारा व्यंग्य कसता है कि कैसे किसी के सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स की संख्या भी उसको पत्रकार बनाने में मदद करती है। लेकिन, फॉलोअर्स की संख्या किसी को अच्छा पत्रकार भी बना दे, इसकी परते उधेड़कर ये वेब सीरीज व्यंग्य से कहीं आगे की बात भी कह देती है। कथ्य के हिसाब से वेबसीरीज दमदार है।
तरुण प्रभु बागी प्रवृत्ति का किशोर है। अपने माता पिता के अनुशासन में रहना उसको भाता नहीं। एक बड़ा मीडिया हाउस उसे अपने यहां रख लेता है लेकिन सोशल मीडिया पर लाइक्स और हिट पाने के लिए कुछ भी लिख देना और कायदे की कॉपी लिखना, दोनों अलग अलग बातें हैं, ये तरुण को जल्दी ही समझ आने लगता है। संपादक उसके पीछे एक सीनियर रिपोर्टर लगा देती है। दोनों के रिश्ते बदलते हैं और तरुण को इन्हीं धाराओं के बीच उस कमजोरी का जवाब भी मिल जाता है, जिसे मर्दाना ताकत कहते हैं।
तरुण प्रभु बागी प्रवृत्ति का किशोर है। अपने माता पिता के अनुशासन में रहना उसको भाता नहीं। एक बड़ा मीडिया हाउस उसे अपने यहां रख लेता है लेकिन सोशल मीडिया पर लाइक्स और हिट पाने के लिए कुछ भी लिख देना और कायदे की कॉपी लिखना, दोनों अलग अलग बातें हैं, ये तरुण को जल्दी ही समझ आने लगता है। संपादक उसके पीछे एक सीनियर रिपोर्टर लगा देती है। दोनों के रिश्ते बदलते हैं और तरुण को इन्हीं धाराओं के बीच उस कमजोरी का जवाब भी मिल जाता है, जिसे मर्दाना ताकत कहते हैं।
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वेब सीरीज वयस्क दर्शकों के मनोविज्ञान के अनुसार बनी है और वीरे दी वेडिंग जैसी फिल्म बना चुके शशांक घोष ने इसे पेश करने का तरीका भी इस फिल्म जैसा ही चुना है। निहित भावे ने पटकथा को चुस्त रखते हुए भी इसमें ऐसे हास्य और व्यंग्य के ऐसे तमाम छींटे इसमें डाले हैं, जो हकीकत के करीब दिखते हैं।