Explainer: जहां शिकारे में थिरके शम्मी कपूर, वहां से क्यों दूर हुआ सिनेमा? पढ़ें कश्मीर से फिल्मों का नाता
Cinema History of Jammu and Kashmir: जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में हाल ही में 38 साल में पहली बार बॉलीवुड फिल्म 'ग्राउंड जीरो' की स्क्रीनिंग हुई। जानते हैं कि इतने सालों में कश्मीर सिनेमा से क्यों दूर रहा और हाल ही में हुए पहलगाम हमले का असर वहां के सिनेमा पर किस तरह पड़ेगा...
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जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में हाल ही में 38 साल बाद बॉलीवुड अभिनेता इमरान हाशमी की फिल्म 'ग्राउंड जीरो' की स्क्रीनिंग हुई थी। यह पहली बार था जब इतने लंबे समय बाद जम्मू-कश्मीर में किसी हिंदी फिल्म का रेड कारपेट प्रीमियर हुआ हो। यह प्रीमियर खासतौर पर BSF के जवाने के लिए आयोजित किया गया था।
फिल्म के लीड अभिनेता इमरान हाशमी ने एक इंटरव्यू में इस बात की उम्मीद जताई थी कि इस प्रीमियर के बाद जम्मू-कश्मीर में बॉलीवुड की और फिल्मों के प्रीमियर किए जाएंगे। हालांकि, इसके ठीक चार दिन बाद 22 अप्रैल को पहलगाम के बैसरन घाटी इलाके में आतंकी हमला हो गया।
इस हमले ने एक बार फिर कश्मीर को दहला दिया जिसमें 26 पर्यटकों की जान चली गई। अब इस आतंकवादी हमले का असर जम्मू कश्मीर में ही नहीं, बल्कि वहां प्रीमियर होने वाली फिल्मों पर भी पड़ेगा।
इस खबर में जानिए कि इतने सालों में जम्मू-कश्मीर भारतीय सिनेमा के लिए किस तरह खास रहा ? और इतने वर्षों तक वहां के लोग सिनेमा से दूर क्यों रहे?
1980 तक कश्मीर था सिनेमा का पसंदीदा ठिकाना
1960 और 1970 के दशक में कश्मीर हिंदी सिनेमा की शूटिंग के लिए सबसे पसंदीदा जगहों में से एक था। डल झील, गुलमर्ग के बर्फीले पहाड़ और श्रीनगर की खूबसूरत वादियां बॉलीवुड फिल्मों का हिस्सा बनती थीं। 'जंगली', 'कश्मीर की कली', और 'बॉबी' जैसी फिल्में यहां शूट हुईं। श्रीनगर में कई सिनेमाघर भी थे जैसे रीगल, पल्लैडियम और नीलम। यहां लोग फिल्में देखने के लिए उत्साहित रहते थे लेकिन 1980 के अंत तक यहां सब कुछ बदल गया।
आतंकवाद ने सिनेमा को कर दिया गायब
1980 के दशक के अंत में कश्मीर में आतंकवाद ने जोर पकड़ा। 1989-90 में हालात इतने खराब हो गए कि आतंकियों ने सिनेमाघरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। आतंकवादी संगठनों ने सिनेमा को गैर-इस्लामिक बताकर सिनेमाघरों को बंद करने की धमकी दी। कई सिनेमाघरों में आग लगा दी गई, जैसे श्रीनगर का रीगल सिनेमा। कुछ सिनेमाघरों को गोदाम या दुकानों में बदल दिया गया। लोगों में डर बैठ गया और सिनेमा हॉल खाली होने लगे। जो लोग फिल्म देखना चाहते थे, उन्हें 300 किलोमीटर दूर जम्मू जाना पड़ता था। इस दौरान कश्मीर में फिल्मों की शूटिंग भी बंद हो गई।
1990 से 2020 तक पूरी तरह गायब रहा सिनेमा
1990 के बाद से कश्मीर में सिनेमा पूरी तरह गायब हो गया। आतंकवाद, अशांति और कर्फ्यू के कारण न तो फिल्में शूट हुईं और न ही सिनेमाघर खुले। इस दौरान कश्मीर की छवि एक संघर्षग्रस्त इलाके की बन गई। बॉलीवुड ने भी कश्मीर को अपनी कहानियों से दूर रखा।
हालांकि, कुछ फिल्में जैसे मिशन कश्मीर (2000) और हैदर (2014) में कश्मीर का बैकग्राउंड दिखाए गए, लेकिन इनकी शूटिंग भी ज्यादातर कश्मीर के बाहर हुई। सिनेमाघरों की हालत इतनी खराब हो गई कि 2010 तक श्रीनगर में एक भी काम करने वाला सिनेमा हॉल नहीं बचा था।
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2022 में सिनेमाघरों की वापसी
2022 में कश्मीर में सिनेमाघरों की वापसी की कोशिश शुरू हुई। श्रीनगर के शिवपोरा इलाके में एक मल्टीप्लेक्स खोला गया, जो 31 साल बाद घाटी का पहला सिनेमा हॉल था। इसके बाद सरकार ने कश्मीर को फिर से पर्यटन और सिनेमा का केंद्र बनाने की कोशिशें तेज कीं।
2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद हालात कुछ हद तक सामान्य होने लगे थे, जिसके चलते फिल्ममेकर्स ने कश्मीर की ओर रुख किया। इस दौरान सिंहासन खाली है (2023) और आर्टिकल 370 (2024) जैसी फिल्मों की शूटिंग यहां हुई।
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38 साल बाद ग्राउंड जीरो की स्क्रीनिंग
18 अप्रैल 2025 को श्रीनगर के इनॉक्स थिएटर में फिल्म ग्राउंड जीरो का रेड कारपेट प्रीमियर हुआ, जो 38 साल बाद कश्मीर में पहली बार किसी बॉलीवुड फिल्म की स्क्रीनिंग थी। यह फिल्म एक बीएसएफ ऑफिसर नरेंद्र नाथ धर दुबे की कहानी है, जिन्होंने 2001 के संसद हमले के मास्टरमाइंड गाजी बाबा को मार गिराया था।
फिल्म में इमरान हाशमी मुख्य भूमिका में हैं। इस स्क्रीनिंग में बीएसएफ जवानों को खास तौर पर आमंत्रित किया गया था। इमरान हाशमी ने इसे कश्मीर के लिए एक ऐतिहासिक पल बताया और कहा कि इससे कश्मीर में सिनेमा की वापसी को बढ़ावा मिलेगा।
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पहलगाम हमला और फिर डर का माहौल
हालांकि, 'ग्राउंड जीरो' की स्क्रीनिंग के चार दिन बाद 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने एक बार फिर कश्मीर को हिलाकर रख दिया। बैसरन के खूबसूरत घास के मैदान में आतंकियों ने 26 पर्यटकों को मार डाला। आतंकियों ने सेना की वर्दी पहनकर इस हमले को अंजाम दिया, जिससे पर्यटकों को भ्रम हुआ।
इस घटना ने कश्मीर में पर्यटन और सिनेमा की नई उम्मीदों पर सवाल खड़े कर दिए। 'ग्राउंड जीरो' की स्क्रीनिंग के बाद अन्य बॉलीवुड फिल्ममेकर्स से अपील की गई थी कि वे भी कश्मीर में अपनी फिल्मों का प्रचार करें और स्क्रीनिंग करें, इस मुद्दे को जोर मिल ही रहा था कि पहलगाम आतंकी हमले ने एक बार फिर जगती हुई उम्मीद को डर के साए तले रौंद दिया।