नए साल में नीलेश लिखेंगे नए मिजाज के गाने, इंटरव्यू में बोले- 'फिल्मों के गानों से ऊब गया था'
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कभी आवारापन, बंजारापन जैसे गाने से चर्चा में आए गीतकार, लेखक और रेडियो उद्घोषक नीलेश मिसरा फिर से हिंदी सिनेमा में लौटने की तैयारी में हैं। उससे पहले वह एक नए मोबाइल ऐप पर लेकर आए हैं अपने कुछ नए ऑडियो शो।
सबसे पहले तो ये बताइए कि फिल्मी गीतों से आपने दूरी क्यों बना रखी है?
हिंदी फिल्मों के गाने लिखने से मैं ऊब गया। इसी वजह से यह दूरी बढ़ी। इन दिनों के गानों में चल रही बदतमीजी भरी पंक्तियों और भाषा से मेरा मेल नहीं हो सकता। इससे मेरी कोई जीविका भी नहीं चल रही थी इसलिए मैंने फिल्मों के लिए गीत लिखना बंद कर दिया। पिछले सात-आठ साल से मैं अपने दूसरे कामों में व्यस्त रहा अब मैं 2020 से यह दूरी घटाने जा रहा हूं। आने वाले समय में पुराना वाला नीलेश मिसरा फिर सामने आएगा।
आपके ऑडियो शोज में क्या खास है?
'ऑडिबल सुनो' के लिए मैं दो शो कर रहा हूं। एक शो का नाम है 'योद्धा', जो फौजियों की कहानी है। यह जो कहानियां हैं उनके पीछे भी चेहरे हैं, लोग हैं। जो बहुत ही मुश्किलों से सब कुछ करते हैं। उनके काम के पीछे उनका कोई भी व्यक्तिगत स्वार्थ ही नहीं होता है। दूसरे शो का नाम है, भूतकाल। मैं हमेशा ही भूतों की कहानी से बहुत डरता हूं। बहुत मेहनत से हमारी मंडली ने ये शो बनाया है। दोनों शोज में 30-30 कहानियां हैं।
लोग इन दिनों यूट्यूब और टिक टॉक से चिपके रहते हैं, ऑडियो शोज का क्या भविष्य दिखता है आपको?
अपने शोज के बारे में बात करूं तो ऑडियो माध्यम मेरी नजरों में विजुअल माध्यम से बड़ा है। जब मैं कहता हूं, 'मेरी पड़ोसन' तो करोड़ों लोग अपनी-अपनी पड़ोसन की कल्पना करते हैं। इसलिए कहीं ना कहीं प्रत्येक ऑडियो कहानी के साथ आप अपनी एक छोटी सी दुनिया बना लेते हैं। अब अगर यह अनुभव और अच्छा हो जाए तो फिर चार चांद लग जाते हैं। अगर ऑडिबल सुनो की टेक्नोलॉजी और हमारी जमीनी ज्ञान मिल जाए तो वह यह सफर और भी सुहावना हो सकता है।
इंटरनेट पर पाठकों की संख्या बढ़ रही है ऐसे में ऑडियो शोज का क्या भविष्य देखते हैं आप?
ये सही है कि पाठकों की संख्या बढ़ रही है लेकिन जैसे जैसे इंटरनेट के दाम कम होंगे और मोबाइल घर घर में पहुंचेगा। वैसे वैसे लोग अपने निजी समय में इसे सुनेंगे। आप कोई भी काम कर रहे हों उस दौरान भले आप पढ़ ना सकें, देख ना सकें लेकिन सुन जरूर सकते हैं। इस दौरान आप ढेरों कहानियां निपटा देते हैं। बहुत लोग मुझे संदेश भेजते हैं कि वह ट्रेन में कहानी सुना करते हैं।
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