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शादी के बाद पत्नी का सरनेम क्यों बदल देते हैं भारतीय पति, इस देश में तो नहीं होता ऐसे

Fri, 11 May 2018 01:41 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Fri, 11 May 2018 01:41 PM IST
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Married Women In Greece Can not Change their surname post marriage like sonam kapoor Ahuja
तीन दिन से बॉलीवुड अदाकारा सोनम कपूर की शादी की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर ऐसे घूम रहे हैं जैसे हम सब बाराती हों। और जब सोनम कपूर ने अपने नाम में अपने पति का सरनेम आहुजा जोड़ने का ऐलान भी इंस्टाग्राम और ट्विटर पर किया तो लगा सचमुच ये मेरी-आपकी ज़िंदगी से बहुत क़रीब से जुड़ा मामला है।
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क्या उन्होंने सही किया? क्या औरत को पति का सरनेम अपनाना चाहिए या पिता का ही रखना चाहिए? अब विकल्प तो यही दो हैं ना। औरत का अपना या उनकी मां का सरनेम तो है नहीं। उसकी पहचान या तो पिता या पति के सरनेम से जुड़ी है। कम से कम भारत में हिंदू परिवारों में तो शादी के बाद यही रिवाज़ है। कई जगह लड़की का नाम ही बदल दिया जाता है तो कई जगह रीत है कि उसका नाम ना बदलें पर पति का सरनेम साथ जोड़ दिया जाए।
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Married Women In Greece Can not Change their surname post marriage like sonam kapoor Ahuja
उत्तर-पूर्वी और दक्षिण भारतीय राज्यों को छोड़ दें तो बाक़ी देश में ये लंबे समय से चला आ रहा है। ज़ाहिर है लीक से हटकर अपना सरनेम बदलने की जगह, जब शिल्पा शेट्टी ने कुंद्रा, ऐश्वर्या राय ने बच्चन और करीना कपूर ने ख़ान अपने पुराने नाम में जोड़ा तो बहुत सोचा होगा। क्या ये बच्चन या ख़ान नाम का वज़न अपने साथ जोड़ने के लिए था या इसलिए कि वो अपनी पहचान को पूरी तरह नहीं खोना चाहती थीं?

पिछले दशकों में नई सोच बनी है कि शादी के बाद नाम बदलना औरत को कमतर मानने जैसा है, उसकी पहचान ख़त्म करने जैसा है। शादी एक नया रिश्ता है उसमें दोनों लोगों का अपना व्यक्तित्व वैसे ही बना रहना ज़रूरी है। पति का नाम नहीं बदलता तो पत्नी का भी नहीं बदलना चाहिए। बॉलीवुड के जाने-माने नाम- शबाना आज़मी, विद्या बालन और किरण राव ने शादी के बाद अपना नाम नहीं बदला। शादी के बाद औरत का नाम बदलने का इतिहास बहुत पुराना है और सिर्फ़ भारत तक सीमित भी नहीं।

इतिहास

Married Women In Greece Can not Change their surname post marriage like sonam kapoor Ahuja
इतिहासकार बताते हैं की ये सोच 14वीं सदी में बनी जब ये माना गया कि, शादी के बाद औरत अपना नाम खो देती है वो सिर्फ़ किसी की पत्नी हो जाती है, औरत और मर्द एक हो जाते हैं और पति का नाम इस एकता का प्रतीक है। जैसे-जैसे औरतों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठी इस समझ में बदलाव आया। कई औरतों ने अपने पति के नाम लेने से इनकार किया। कई देशों में इसके लिए क़ानून तक बनाए गए। 1970 और 80 के दशकों में ग्रीस में लाए गए सुधारों औरतों के लिए ये अनिवार्य कर दिया गया कि वो शादी के बाद भी मां-बाप के द्वारा तय किया गया नाम ही रखें।

यानी यहां शादी के बाद पति का सरनेम अपने नाम के साथ जोड़ना ग़ैर-क़ानूनी है। जब बच्चे पैदा हों तो उनके नाम के साथ मां का सरनेम जुड़े या पिता का इसके बारे में भी क़ायदा साफ़ है - ये मां-बाप का आपस का फ़ैसला है। ये इकलौती पहल नहीं थी, इस दौर में ग्रीस में शिक्षा और रोज़गार के क्षेत्रों में भी औरतों को बराबर मौक़े दिए जाने के लिए मूलभूत सुधार किए गए।
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इसी तरह इटली में भी 1975 में परिवारों से जुड़े क़ानून में बड़ा सुधार लाया गया और औरतों को शादी के बाद भी अपना 'मेडन' यानी शादी से पहले का नाम रखने का अधिकार दिया गया। बेल्जियम में भी शादी के बाद नाम नहीं बदले जाते हैं। साल 2014 से पहले क़ानून था कि बच्चा अपने पिता का नाम ही लेगा लेकिन उसमें बदलाव किया गया है और अब बच्चे को मां या पिता किसी का सरनेम दिया जा सकता है। नीदरलैंड में तो शादी के बाद पति भी अपना नाम बदलकर अपनी पत्नी का सरनेम ले सकते हैं। बच्चों के लिए छूट है कि वो मां का सरनेम लें या पिता का।

ये बहस बार-बार छिड़ती रही है। साल 2013 में, 'टाइटैनिक' जैसी सुपरहिट फ़िल्मों में अभिनय कर चुकीं केट विन्सलेट ने कहा था कि वो अपने पति का 'फ़ैमिली' नाम नहीं अपनाना चाहती हैं। ये उनकी तीसरी शादी थी और उन्होंने कहा कि उन्हें अपना नाम पसंद है, उन्होंने इसे कभी नहीं बदला और अब भी नहीं बदलेंगी।

केट विंस्लेट की पहली शादी 1998 में हुई थी और उन्होंने तब भी अपना नाम नहीं बदला था। भारत के संदर्भ में नाम ना बदलना बराबरी की तरफ़ एक प्रतीकात्मक पहल हो सकती है पर ग़ौर फ़रमाइए कि अब भी शादी के बाद औरत ही अपने पति के घर में जाकर रहती है। पति अगर पत्नी के परिवार के साथ रहे तो अक़्सर तंज़ और मज़ाक का पात्र बनता है, मानो उसकी मर्दानगी कम हो गई हो। तो बराबरी कैसी और कितनी हो?शादी के बाद अपना नाम ना बदलना या उसमें पति का सरनेम जोड़ना एक शुरुआत भर है। आगे क्या हो सकता है और क्या कुछ बदलना चाहिए ये तो हमें ही तय करना है।
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