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Love Hostel Review: बॉबी देओल का एक और चौंकाने वाला अवतार, पढ़िए कहां कहां चूकी जी5 की हरियाणवी फिल्म

Fri, 25 Feb 2022 10:00 AM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 25 Feb 2022 10:00 AM IST
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Love Hostel Review in Hindi by Pankaj Shukla ZEE5 Bobby Deol Vikrant Massey Sanya Malhotra Raj Arun Shanker Raman
लव हॉस्टल - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
लव हॉस्टल
कलाकार
बॉबी देओल , विक्रांत मैसी , सान्या मल्होत्रा और राज अरुण
लेखक
शंकर रमन , महक जमाल और योगी सिंघा
निर्देशक
शंकर रमन
निर्माता
रेड चिलीज एंटरटेनमेंट और दृश्यम फिल्म्स
रेटिंग
2/5

‘लव हॉस्टल’ नाम है उस इमारत का जिसमें घरवालों से भागकर शादी करने वाले जोड़े अदालत के आदेश पर पुलिस की सुरक्षा मे पनाह पाते हैं। इमारत का नामकरण इसकी चौकीदारी करने वाले एक पुलिसकर्मी ने कर रखा है। ओटीटी जी5 ने एक देसी कहानी पर फिल्म पेश करके फिर से हिम्मत का काम किया है। बॉबी देओल ने इस फिल्म के बारे में तब बताया था जब पिछली बार उनसे शाहरुख खान की कंपनी रेड चिलीज एंटरटेनमेंट की वेब सीरीज ‘क्लास ऑफ 83’ की रिलीज से पहले बात हुई थी। रेड चिलीज एंटरटेनमेंट ने ये फिल्म मनीष मूंद़ड़ा की कंपनी दृश्यम फिल्म्स के साथ मिलकर बनाई है। दोनों कंपनियां मिलकर इसके पहले संजय मिश्रा के साथ फिल्म ‘कामयाब’ बना चुकी हैं। शाहरुख खान का अपनी कंपनी की वेब सीरीज या ओरीजनल फिल्मों को बनाने में दखल शायद ही होता हो, क्योंकि अगर ऐसा होता तो वह कम से कम ‘लव हॉस्टल’ जैसी फिल्म तो कतई न बनाते। ये ठीक है कि देश में अब भी अपराध होते हैं, कानून के रखवाले अब भी अपराधियों की चाल से मात खाते हैं, लेकिन ऐसा भी कहीं नहीं है कि देश में कोई किसी एक इलाके में दर्जनों हत्याएं करता फिरे और पुलिस उसे दबोच ही न पाए।

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Love Hostel Review in Hindi by Pankaj Shukla ZEE5 Bobby Deol Vikrant Massey Sanya Malhotra Raj Arun Shanker Raman
लव हॉस्टल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म ‘लव हॉस्टल’ सिनेमैटोग्राफर के साथ साथ पटकथा लेखन और निर्देशन का हुनर रखने वाले शंकर रमन का सोचा हुआ ख्वाब है। और, किसी ख्वाब जैसी ही ये फिल्म भी है। क्या क्या दिखता रहता है! और, फिर? झटके से ख्वाब टूट जाता है। हाथ कुछ नहीं आता। बस घड़ी देखकर समझ ये आता है कि 90 मिनट के करीब वक्त दर्शक वह देखता रहा है जिसका हासिल निकालना शायद इसकी टीम भी भूल गई। कहानी ऑनर किलिंग से ज्यादा हॉरर किलिंग की है। प्रेमी जोड़े अदालतों में घर वालों की मर्जी के खिलाफ शादी करने पहुंचते हैं। अदालत से घर वालों को सम्मन जाता है। और, अगली तारीख तक की मियाद उन्हें पुलिस की हिफाजत में एक ऐसी इमारत में गुजारनी है जहां रहना किसी सजा से कम नहीं। कहानी का असल किरदार है डागर जिसने ऐसे प्रेमी जोड़ों को ढूंढकर मार देने का बीड़ा उठा रखा है। कनपटी जली हुई है। दाढ़ी बढ़ी हुई है। नाक पर आगे तक लटक आने वाली ऐनक लगाता है। रान पर कटार बांधे फिरता है और साइलेंसर लगी पिस्तौल से खोपड़ी पर निशाना अचूक लगाता है।

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Love Hostel Review in Hindi by Pankaj Shukla ZEE5 Bobby Deol Vikrant Massey Sanya Malhotra Raj Arun Shanker Raman
लव हॉस्टल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

निर्देशक शंकर रमन की फिल्म ‘लव हॉस्टल’ अपने ट्रेलर में ही बता चुकी है कि इसे देखने के लिए कलेजे की जरूरत पड़ेगी। खून खराबा बहुत होगा। लेकिन, इसका असर दर्शकों के दिमाग पर कम करने या कहें कि परदे के खून खराबे की तरफ से ध्यान हटाने के लिए फिल्म में दो जगह बच्चे कातिल को बताते हैं कि उसके बदन पर खून लगा है। और, कातिल हैं कि न उन्हें पुलिस की परवाह है, न अपनों की और न ही अपने निशाने पर आए लोगों के अपनों की। एक सपाट सी कहानी है। दर्शकों को झटका देते रहने के लिए छिड़के गए फ्लैशबैक हैं। बस ऐसी कहानियों के लिए जरूरी इमोशन नहीं हैं। और, वह इसलिए क्योंकि इस कहानी में कोई हीरो नहीं है। दो जरायमपेशा एक दूसरे को मारने पर उतारू हैं। बीच में समलैंगिकता का तड़का भी है। ये पहलू इन दिनों फिल्म या वेब सीरीज में न हो तो शायद ओटीटी वाले ऐसी फिल्में और वेब सीरीज खरीदते नहीं हैं।

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Love Hostel Review in Hindi by Pankaj Shukla ZEE5 Bobby Deol Vikrant Massey Sanya Malhotra Raj Arun Shanker Raman
लव हॉस्टल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म देखने की इकलौती वजह है फिल्म मे केंद्रीय किरदार निभा रहे बॉबी देओल। जूनियर देओल को इस उम्र में आकर वह सब कुछ करने का मौका मिल रहा है जिससे उनके भीतर का कलाकार बाहर झांक पा रहा है लेकिन पिंजड़े से झांकते इस अदाकार को उड़ने का खुला आसमान मिलना अब भी बाकी है। बताते हैं कि बॉबी ने पहले पहले इस कहानी को पढ़ने के बाद इसके लिए ना कर दी थी लेकिन बॉबी ने दूसरी बार की कोशिश में ये फिल्म कर ली। बॉबी या कहें कि देओल परिवार को चाहने वाले ये फिल्म देखेंगे और देखेंगे कि कैसे एक बेहतरीन कलाकार एक बार फिर एक कमजोर कहानी में फंसकर रह गया है। डागर के किरदार में बॉबी देओल का काम बेहतरीन है। उनका गेटअप उनकी क्रूरता बढ़ाने में मदद करता है लेकिन उनके संवाद उतने दमदार और असरदार हो नहीं पाए जितने की उम्मीद उनसे की जाती है।

Love Hostel Review in Hindi by Pankaj Shukla ZEE5 Bobby Deol Vikrant Massey Sanya Malhotra Raj Arun Shanker Raman
लव हॉस्टल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

विक्रांत मैसी और सान्या मल्होत्रा प्रेमी पंछी हैं। एक बार घर से उड़ते हैं तो फिर कहीं घोंसला बनाने के लिए तिनके भी नहीं जुटा पाते। बस हवा में फड़फड़ाते रहते हैं। दोनों ने अपने अपने हिस्से की मेहनत भी पूरी की लेकिन हर किस्से के हिस्से कामयाब हो भी कहां पाते हैं। फिल्म की शूटिंग मध्य प्रदेश में हुई है। फिल्म का ताना बाना हरियाणा का है। सब हरियाणवी ही बोलते हैं। सुनने में ये बोली अच्छी भी लगती है लेकिन फिल्म के सहयोगी कलाकारों को लेकर इसके निर्माताओं ने कंजूसी बरती है। जिन लोगों ने ‘बालिका वधू’ में सुरेखा सीकरी का अभिनय देखा है, वे उन्हें ये फिल्म देखते हुए बहुत मिस करेंगे। क्योंकि, यहां जो दादी है वह अकड़ तो वैसी ही दिखाती है लेकिन इस अभिनय में जान नहीं है। विवेक शाह के कैमरे से दिखती फिल्म रात में भागती है, दिन में सुस्ताती है। खाली पड़ी फैक्ट्री में ग्राफिक्स से बना मोर भी दिखाती है। कुत्ते इस कहानी के दमदार किरदार हैं। फिल्म के क्लाइमेक्स के ट्विस्ट्स भी उन्हीं के हिस्से हैं।

Love Hostel Review in Hindi by Pankaj Shukla ZEE5 Bobby Deol Vikrant Massey Sanya Malhotra Raj Arun Shanker Raman
लव हॉस्टल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म की अवधि शायद शुरू से 90 मिनट ही तय की गई होगी तभी इसके वीडियो एडीटर्स नितिन बैद और शान मोहम्मद ने तमाम घटनाएं ऐसी भी फिल्म में बनाए रखी हैं, जिनको हटा देने से फिल्म की कहानी पर कोई फर्क नहीं पड़ता। क्लिंटन सेरेजो का बैकग्राउंड म्यूजिक फिल्म के एहसासों के हिसाब से ठीक नहीं है। उन्हें कुछ रागिनियां सुननी चाहिए थीं। हरियाणा के लोकवाद्यों और लोकगीतों का असर भी इसमें लाना चाहिए था। हरियाणा का और भी बहुत कुछ फिल्म में लाया जा सकता था। देसी कहानियों को कहने वाले भी अगर देसी सोच के ही हों तो बात दूसरी होती है, नहीं तो मामला फिर नकली सा ही दिख्खन लागे है।

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