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पाकिस्तानी गायिका रेशमा के बेटे का निधन, मां का भारत से था गहरा नाता

Tue, 02 Mar 2021 07:41 PM IST
अमरीन हुसैन एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: अमरीन हुसैन Updated Tue, 02 Mar 2021 07:41 PM IST
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Legendary pakistani lambi judai singer reshma son passed away
रेशमा - फोटो : Social media

मशहूर पाकिस्तानी गायिका रेशमा के बेटे का निधन हो गया है। कार्डियक अरेस्ट की वजह से उनका इंतकाल हो गया। सूत्रों की जानकारी के अनुसार बताया गया है कि गायिका के बेटे सावन ‘सुई नॉर्दर्न गैस कंपनी’ में कार्यरत थे। अब ये खबर सामने आई कि अपनी मां के बाद वो भी दुनिया को अलिवदा कह गए हैं।

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उनके अंतिम संस्कार के समय और स्थान की घोषणा अभी नहीं की गई है। कहा जा रहा है कि बाद में की जाएगी। रेश्मा के बेटे सावन अपनी मां से काफी प्रभावित थे। और, इसीलिए वे गाते भी थे। हालांकि रेशमा को देश विदेश में गायिकी के लिए पहचाना जाता था। सावन के पास वो पहचान नहीं थी।
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रेशमा का साल 2013 में ही निधन हो गया था। उन्हें उनकी कला के लिए कई सम्मान से नवाजा जा चुका था। रेशमा को अन्य अवार्ड के साथ पाकिस्तान में तीसरे सर्वोच्च सम्मान और नागरिक पुरस्कार सितार-ए-इम्तियाज से सम्मानित किया गया था।
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उन्हें लोक गीतों और उनकी पाटदार के आवाज के गायन के लिए याद किया जाता है। रेशमा और भारत के बीच गहरा रिश्ता था। पाकिस्तान में रहते हुए वे कभी भारत को भूल नहीं पाई थीं। रेशमा का जन्म उस वक्त के भारत के राजस्थान में बीकानेर के मलासा गांव में 1947 में हुआ था। आजादी के साथ ही यह परिवार पाकिस्तान में तब्दील हो गया था। रेशमा की कोई औपचारिक शिक्षा नहीं हुई थी। उन्होंने 12 साल की उम्र में गाना शुरू कर दिया था। इसके बाद उन्हें रेडियो पाकिस्तान में 'लाल मेरी' रिकॉर्ड करने का मौका मिला था।

यह गीत हिट होने के बाद 1960 में पहली बार टेलीविजन पर दिखाई दीं रेशमा के प्रशंसकों की गिनती चरम पर पहुंच गई थी। उन्होंने पाकिस्तानी और भारतीय फिल्म उद्योग में काम किया। उनकी आवाज में गाया हुआ ‘लंबी जुदाई’ आज भी अद्वितीय माना जाता है।


अस्सी के दशक में रेशमा कला के कद्रदान डॉ. एसके पूनिया के परिवार से जुड़ गई थीं। उन्हें वो भाई मानती थीं। मुंह बोला भाई बोलने पर तो वो बिल्कुल नाराज ही हो जाती थीं। कहती थीं ये मुंह से नहीं बल्कि दिल से भाई हैं। डॉ एसके पूनिया उनके इलाके के सुजानगढ़ से जुड़े थे।

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