जूही चावला: 5जी विरोध से पहले इन मुद्दों पर खुलकर राय रख चुकी हैं अभिनेत्री, दिखा था एक्टिविस्ट अवतार
हाल ही में जूही चावला ने भारत में 5जी तकनीक को लेकर याचिका दायर की थी। जूही का कहना है कि 5G टेक्नोलॉजी को लागू किए जाने से पहले इससे जुड़े तमाम तरह के अध्ययनों पर बारीकी से गौर किया जाना चाहिए। इससे पहले भी जूही कई बार लोगों के इसके प्रति जागरुक कर चुकी हैं। पर्यावरण से जुड़े कई मुद्दों पर भी जूही खुलकर अपनी राय रख चुकी हैं।
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बॉलीवुड अभिनेत्री जूही चावला अक्सर लोगों को सुरक्षा, सफाई और अन्य जरूरी चीजों के लिए जागरुक भी करती रहती हैं। हाल ही में उन्होंने भारत में 5जी तकनीक को लेकर याचिका दायर की थी। जूही चावला की ओर से दाखिल याचिका में मांग की गई है कि 5G टेक्नोलॉजी को लागू किए जाने से पहले इससे जुड़े तमाम तरह के अध्ययनों पर बारीकी से गौर किया जाए और फिर उसके बाद ही इस टेक्नोलॉजी को भारत में लागू करने के बारे में विचार किया जाए। इसके बाद से चारों तरफ जूही के ही चर्चे हो रहे हैं।
पहले भी कई मुद्दों पर खुलकर रख चुकी हैं राय
ऐसा पहली बार नहीं है कि जूही का एक्टिविस्ट अवतार लोगों के सामने आया हो। इससे पहले भी वो कई बार लोगों के इसके प्रति जागरुक कर चुकी हैं। पर्यावरण से जुड़े कई मुद्दों पर भी जूही खुलकर विरोध कर चुकी हैं। साल 2011 में जूही चावला और आसपास रह रहे लोगों ने इलाके में लगे मोबाइल टावर के खिलाफ शिकायत की थी जिसके बाद प्रशासन ने वहां से कई टावर्स को हटा दिया था।
इसके बाद से ही जूही लगातार मोबाइल टावर से होने वाली रेडिएशन को लेकर लोगों का जागरुक कर रही हैं। इसके अलावा जूही सिटिजन फॉर टुमौरो नाम का संगठन भी चलाती हैं। साल 2013 में जूही चावला ने मोबाइल रेडिएशन से होने वाले नुकसान के बारे में एक इंटरव्यू के दौरान कहा था, “हम टेलीकॉम कंपनियों के खिलाफ नहीं हैं। हम बस यह कहना चाहते हैं कि यदि टेलीकॉम कंपनियां मार्केंटिंग पर इतने पैसे खर्च कर रही हैं तो उन्हें इसे सुरक्षित बनाने पर भी खर्च करना चाहिए।”
साल 2018 में जूही ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी कि मोबाइल टावर/एंटीना से निकलने वाले EMF रेडिएशन से थकान, मेमोरी लॉस समेत कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। इससे बचने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। साथ ही जूही का कहना था कि लोगों पर इसके प्रतिकूल प्रभावों के शोध के बिना इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए।
हाल ही में जूही द्वारा दायर की गई याचिका में भी उन्होंने यही मांग की है कि 5G वायरलेस नेटवर्क को देश में लागू किए जाने से पहले इससे जुड़ी तमाम रिसर्च पर ध्यान दिया जाए। उनका कहना है कि इससे नागरिकों, जानवरों और पेड़-पौधों पर विकिरण के बुरे प्रभाव देखने को मिलेंगे जो कि सही नहीं है। 5G टेस्टिंग पर रोक लगानी चाहिए।