फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Bollywood ›   indian idol fame abhijeet sawant interview on social media pressure on musicians and singers

इंटरव्यू: ‘दर्शकों की पसंद के हिसाब से चलने लगे कलाकार’, सोशल मीडिया के बढ़ते दबाव पर क्या बोले अभिजीत सावंत?

Fri, 23 Oct 2026 08:30 AM IST
Kiran Vinod Kumar Jain किरण जैन
Updated Fri, 23 Oct 2026 08:30 AM IST
सार

  • ‘इंडियन आइडल’ के पहले विजेता अभिजीत सावंत ने 22 साल के सफर और संगीत की बदलती दुनिया पर बात की।
  • उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में कलाकारों पर दर्शकों की पसंद के मुताबिक चलने का दबाव बढ़ा है।
  • वहीं, फिल्मों के हिसाब से संगीत बनने के कारण गानों की अपनी पहचान भी कम हुई है।

विज्ञापन
indian idol fame abhijeet sawant interview on social media pressure on musicians and singers
इंडियन आइडल फेम अभिजीत सावंत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

‘इंडियन आइडल’ ने अभिजीत सावंत को घर-घर में पहचान दिलाई। करीब 22 साल बाद वह एक बार फिर उसी मंच पर लौटे हैं। इस दौरान संगीत की दुनिया काफी बदल गई है। दर्शकों का कलाकारों से जुड़ने का तरीका भी बदल गया है। सोशल मीडिया ने नए सिंगर्स को आगे बढ़ने का मौका दिया है। लेकिन इसके साथ ही कलाकारों पर दर्शकों की पसंद के हिसाब से काम करने का दबाव भी बढ़ा है। अभिजीत सावंत भी आज की म्यूजिक इंडस्ट्री में यह बदलाव महसूस करते हैं।
विज्ञापन


हाल ही में अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने इंडियन आइडल से मिली पहचान, 22 साल के सफर, शोहरत, रियलिटी शो में आए बदलाव, सोशल मीडिया के बढ़ते दबाव, सिंगर्स और म्यूजिशियंस को मिलने वाले सम्मान, इंडिपेंडेंट म्यूजिक की पहचान और फिल्मी गानों की बदलती दुनिया पर बात की। पढ़िए बातचीत के प्रमुख अंश।
विज्ञापन
Trending Videos

indian idol fame abhijeet sawant interview on social media pressure on musicians and singers
अभिजीत सावंत - फोटो : अमर उजाला
कभी आप इस शो के सबसे बड़े चेहरे थे। आज इतने साल बाद यहां लौटना कितना अलग है?
सच कहूं तो यह मेरे लिए बहुत खास है। करीब 22 साल पहले मेरी और इंडियन आइडल की जर्नी एक साथ शुरू हुई थी। हमने अपना सफर साथ शुरू किया था। इस मंच ने मुझे बहुत कुछ दिया है। आज मेरी जो पहचान है, उसमें इस शो का बड़ा हाथ है। इसलिए इस मंच के प्रति मेरी भी जिम्मेदारी है। यहां बहुत सारी यादें बनी थीं। अब उन्हें दोबारा जीने का मौका मिल रहा है।

क्या इंडियन आइडल ने आपको वह पहचान दी, जो सिर्फ प्लेबैक सिंगिंग से मिलना मुश्किल था?
देखिए, इस शो ने मुझे सिंगर के साथ-साथ एक पहचान भी दी। हमारे यहां फिल्मों और प्लेबैक सिंगिंग का काफी असर है। ऐसे में सिंगर्स के लिए अपनी अलग पहचान बनाना आसान नहीं होता। मुझे जो पहचान मिली, उसमें इंडियन आइडल की बड़ी भूमिका रही। टेलीविजन के इस मंच ने मुझे घर-घर तक पहुंचाया। लोगों के बीच मेरी अपनी पहचान बनी।
विज्ञापन

indian idol fame abhijeet sawant interview on social media pressure on musicians and singers
अभिजीत सावंत - फोटो : सोशल मीडिया
22 साल बाद शोहरत को लेकर आपकी सोच कितनी बदली है?
पहले लगता था कि लोग आज याद कर रहे हैं, कल भूल जाएंगे। लेकिन अब समझ आया है कि इतने साल तक लोगों के दिलों में जगह बनाए रखना कितनी बड़ी बात है। आज मैं उनके प्यार की अहमियत समझता हूं। उसे बनाए रखने की जिम्मेदारी भी महसूस करता हूं।
इतने साल में मैं भी बदला हूं और मेरे साथ मेरे दर्शक भी बड़े हुए हैं। आज उनके पास मनोरंजन के कई विकल्प हैं। उनकी पसंद भी बदली है। इसके बावजूद वे आज भी मुझसे जुड़े हैं, तो यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात है।

अगर आज के अनुभव के साथ 2005 के अभिजीत सावंत से बात कर पाते, तो उन्हें क्या सलाह देते?
मैं खुद से कहता कि मानसिक दबाव लिए बिना अपने काम पर ध्यान दो। कई बार हमारे पास बहुत कुछ होता है, लेकिन हमारा ध्यान उन चीजों पर रहता है, जो हमें नहीं मिल पाईं। मन में यही चलता रहता है कि यह तो ठीक है, लेकिन मुझे कुछ और चाहिए था।
हम उन चीजों के पीछे भागते रहते हैं, जो हमारे हाथ में नहीं हैं। इससे निराशा और चिड़चिड़ापन बढ़ता है। हम अपनी जर्नी का मजा लेना भूल जाते हैं, जबकि उस मुकाम तक पहुंचने में काफी समय लगा होता है। इसलिए मैं खुद से कहता कि यह मत सोचो कि क्या मिलेगा और क्या नहीं। अपना काम करते रहो। सेहत का ध्यान रखो और मेहनत करते रहो।
विज्ञापन

indian idol fame abhijeet sawant interview on social media pressure on musicians and singers
अभिजीत सावंत - फोटो : एक्स
शो का पहला सीजन जीतने के बाद आपको रातोंरात शोहरत मिली। क्या आप इस बदलाव के लिए तैयार थे?
सच कहूं तो यह बहुत मुश्किल था। इंडस्ट्री में आने से करीब छह महीने पहले तक मैं सामान्य जिंदगी जी रहा था। फिर अचानक सब कुछ बदल गया। आमतौर पर किसी कलाकार को इंडस्ट्री में आने के बाद खुद को तैयार करने का समय मिलता है। वह दूसरे कलाकारों को देखता है, उनसे सीखता है और उनकी जर्नी समझता है। उनके अनुभवों से अपनी राह बनाने की कोशिश करता है।

मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ। मेरे पास कोई उदाहरण नहीं था। कोई गॉडफादर नहीं था और न ही कोई ऐसा था, जिससे सीखकर आगे बढ़ सकता।

मैंने जो कुछ हासिल किया, अपने दम पर किया। यह आसान सफर नहीं था। सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि उसे समझना और दूसरों को समझाना भी मुश्किल था। अचानक मिली पहचान और शोहरत के साथ जिंदगी में बहुत कुछ बदल गया।

indian idol fame abhijeet sawant interview on social media pressure on musicians and singers
अभिजीत सावंत - फोटो : सोशल मीडिया
जब आपने शुरुआत की थी और आज के रियलिटी शो में क्या फर्क देखते हैं?
लोगों का नजरिया बदल गया है। सिंगर्स को पसंद करने और नापसंद करने का तरीका भी बदल गया है। इसमें सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका है। जब हमने शुरुआत की थी, तब लोग टीवी पर शो देखते थे। घरों में उसकी चर्चा होती थी। दर्शक वोट करके किसी प्रतिभागी को आगे बढ़ा सकते थे या पीछे कर सकते थे। उनकी भागीदारी ज्यादातर यहीं तक थी।

आज दर्शक सीधे कलाकारों से बात करते हैं। कमेंट करते हैं, ताने मारते हैं और कई बार निजी बातों को लेकर भी आलोचना करने लगते हैं। इस बदलाव का अच्छा पहलू भी है। कलाकार सीधे अपने दर्शकों से जुड़ सकते हैं। लोग उनके काम पर अपनी राय दे सकते हैं। लेकिन इसका दबाव भी है।

हर कलाकार की अपनी सोच, परवरिश और अनुभव होते हैं। वह इनके आधार पर फैसले लेना चाहता है। लेकिन आज दर्शक शुरू से ही उसे बताने लगते हैं कि क्या सही है और क्या गलत। ऐसे में अपनी राह चुनना मुश्किल हो जाता है। कई बार कलाकार को अपनी सोच से ज्यादा दर्शकों की पसंद के हिसाब से चलना पड़ता है।

indian idol fame abhijeet sawant interview on social media pressure on musicians and singers
अभिजीत सावंत - फोटो : सोशल मीडिया
अगर संगीत की दुनिया में एक बदलाव ला सकते, तो क्या बदलना चाहेंगे?
सिंगर्स और म्यूजिशियंस को जितनी आजादी और मौके मिलने चाहिए, उतने अब तक नहीं मिले हैं। उन्हें जितना सम्मान मिलना चाहिए, वह भी कम है। हम लंबे समय से ऐसी व्यवस्था में काम कर रहे हैं, जहां सिंगर्स और म्यूजिशियंस को उनकी पूरी अहमियत नहीं मिलती। समय के साथ कुछ बदलाव जरूर हुए हैं, लेकिन पुरानी व्यवस्था का असर आज भी दिखता है।

मेरे हिसाब से सिंगर्स और म्यूजिशियंस को अपने संगीत और प्रतिभा के दम पर पहचान बनाने के ज्यादा मौके मिलने चाहिए। उन्हें वह सम्मान मिलना चाहिए, जिसके वे हकदार हैं।

क्या हमारे यहां इंडिपेंडेंट म्यूजिक को फिल्मों से अलग पहचान देने की जरूरत है?
मेरे हिसाब से सबसे जरूरी चीज आजादी है। हमारे यहां लंबे समय से फिल्म इंडस्ट्री और संगीत को एक ही नजर से देखा गया है। लेकिन दुनिया के कई देशों में फिल्म और म्यूजिक इंडस्ट्री की अलग पहचान है। वहां फिल्मों और अभिनेताओं की तरह इंडिपेंडेंट सिंगर्स, म्यूजिशियंस और पॉप स्टार्स की भी अपनी पहचान होती है। उनके संगीत को भी उसकी गुणवत्ता और लोकप्रियता के आधार पर महत्व मिलता है।

वहां, अगर ऑस्कर जैसे फिल्म पुरस्कार अहम हैं, तो ग्रैमी जैसे संगीत पुरस्कारों का भी अपना महत्व है। संगीत की अपनी दुनिया है और उसे उसी रूप में पहचान मिलनी चाहिए।

हमारे देश में इंडिपेंडेंट म्यूजिक को पहचान देने वाले मंचों और पुरस्कारों की कमी महसूस होती है। संगीत को उसकी अपनी पहचान के आधार पर सम्मान देने की व्यवस्था और मजबूत होनी चाहिए। पहले कलाकारों को एक तय ढांचे में रहकर काम करना पड़ता था। आगे बढ़ने के लिए उसी व्यवस्था का हिस्सा बने रहना जरूरी माना जाता था। अपनी अलग राह बनाने के मौके कम थे।

सोशल मीडिया ने इस स्थिति को कुछ हद तक बदला है। अब कलाकार अपना संगीत सीधे लोगों तक पहुंचा सकते हैं। उन्हें अपनी अलग पहचान बनाने का मंच मिला है। मुझे लगता है कि आगे स्वतंत्र संगीत को और महत्व मिल सकता है।

indian idol fame abhijeet sawant interview on social media pressure on musicians and singers
अभिजीत सावंत - फोटो : अमर उजाला
आज किसी गाने की सफलता उसके व्यूज और लाइक्स से भी आंकी जाती है। क्या इससे कलाकारों पर दबाव बढ़ा है?
दबाव तो है। सोशल मीडिया पर दर्शक बताते हैं कि उन्हें किस तरह का संगीत पसंद है। वे कहते हैं कि उन्हें कैसा गाना सुनना है और वे किसी सिंगर को किस रूप में देखना चाहते हैं। हर कलाकार की अपनी सोच और पसंद होती है। लेकिन जब दर्शक लगातार अपनी उम्मीदें बताते रहते हैं, तो उसका असर कलाकार पर भी पड़ता है।

दूसरी तरफ, सोशल मीडिया ने नए कलाकारों के लिए मौके भी बनाए हैं। पहले कई सिंगर्स और म्यूजिशियंस को बड़ा मंच नहीं मिल पाता था। अब वे अपना संगीत सीधे लोगों तक पहुंचा सकते हैं। ऐसा जरूरी नहीं है कि कोई कलाकार बड़ा नाम हो, तभी लोग उसे सुनें। कई बार बड़े कलाकार भी ऐसे सिंगर्स के नाम लेते हैं, जिन्हें आम दर्शक नहीं जानते। हर किसी की अपनी पसंद होती है।

सिर्फ लोकप्रियता से किसी की प्रतिभा का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। किसी छोटे गांव में बैठा कलाकार भी अच्छा संगीत बना सकता है। उसे लोगों तक पहुंचने के लिए मुंबई आना जरूरी नहीं है। मेरे हिसाब से यह बहुत बड़ा बदलाव है।

फिल्मी गानों में भी बदलाव आया है। क्या अब गाने की अपनी पहचान से ज्यादा फिल्म की जरूरत को ध्यान में रखा जाता है?
फिल्मी संगीत काफी बदल गया है। पहले जिस तरह का संगीत बनता था, आज वैसा दौर नहीं है। संगीत बनाने का नजरिया बदला है और इसका असर गानों पर भी दिखता है।

आज फिल्म की जरूरत के हिसाब से संगीत बनाने पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। गानों का इस्तेमाल फिल्म के दृश्यों को बेहतर और प्रभावशाली बनाने के लिए भी होता है। पहले कई गानों की अपनी अलग पहचान होती थी। वे फिल्म से अलग भी याद रखे जाते थे। लोग उन्हें उनकी धुन और गायकी के लिए पसंद करते थे।

मुझे लगता है कि आज गानों की अपनी अलग पहचान कुछ कम हुई है। अब फिल्म की जरूरत के हिसाब से संगीत बनाने पर ज्यादा जोर दिया जाता है। यह बदलाव साफ दिखाई देता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें मनोरंजन समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे बॉलीवुड न्यूज़, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट हॉलीवुड न्यूज़ और मूवी रिव्यु आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed