‘मैं हूं बड़े साहब’, दानिश इकबाल ने बताया मेकअप में लगता था कितना समय? ‘धुरंधर 2’ की राजनीति पर कही ये बात
Danish Iqbal On Dhurandhar 2: ‘धुरंधर 2’ में सबसे अधिक उत्सुकता ये जानने की थी कि ‘बड़े साहब’ कौन हैं? अब अभिनेता दानिश इकबाल ने फिल्म के अपने किरदार के बारे में बात की है। जानिए फिल्म की पॉलिटिक्स को लेकर उन्होंने क्या कुछ कहा…
विस्तार
‘धुरंधर 2’ देखने पहुंचे दर्शकों को सबसे ज्यादा उत्सुकता ये जानने की थी कि ‘बड़े साहब’ कौन हैं? अब फिल्म रिलीज होने के साथ ही इस रहस्य से पर्दा उठ चुका है। दानिश इकबाल ने ‘धुरंधर 2’ में बड़े साहब यानी दाउद इब्राहिम का किरदार निभाया है। दानिश इकबाल के काम की तारीफ हो रही है और फैंस के लिए दानिश इकबाल का नाम एक बड़ा सरप्राइज था। अब फिल्म और उनके किरदार को मिल रहे प्यार से दानिश काफी खुश हैं।
मिल रही प्रतिक्रिया से खुश हैं दानिश
इंडिया टुडे से बातचीत में दानिश इकबाल ने कहा कि यह वाकई अद्भुत है, खासकर इसलिए क्योंकि इसे लेकर लोगों में बहुत उत्सुकता थी। सच कहूं तो, पिछले तीन महीनों में कई बार ऐसा हुआ जब मैं हाथ उठाकर कहना चाहता था, 'मैं बड़े साहब हूं'। मैं चाहता था कि पूरी दुनिया को पता चले, लेकिन अपनी प्रतिबद्धताओं से बंधा हुआ था। मैंने 2024 में फिल्म की शूटिंग की थी, जिसमें कुछ सीन की शूटिंग पिछले साल भी हुई थी। शूटिंग का अनुभव यादगार रहा, लेकिन खुद को उस किरदार में देखना उनके लिए बिल्कुल अलग अनुभव था।
सिर्फ लुक की बात नहीं थी
दानिश ने बताया कि दाऊद का किरदार पहले भी कई अभिनेताओं ने निभाया है, लेकिन बात सिर्फ लुक की नहीं थी, बल्कि किरदार में अपना अलग अंदाज डालना भी जरूरी था। उन्होंने कहा कि कुछ छोटी-छोटी बारीकियां डालनी पड़ती हैं। मैंने उसी पर ध्यान केंद्रित किया। मैं एक ट्रेन्ड अभिनेता हूं और जानता हूं कि इस तरह की परिस्थितियों को कैसे संभालना है। फिर आदित्य भी मौजूद थे। उनके मार्गदर्शन में मुझे लगता है कि हमने अच्छा काम किया।
तैयार होने में लगते थे 12 घंटे
अपने किरदार को लेकर दानिश ने बताया कि तैयार होने में उन्हें 10-12 घंटे लगते थे। वो सबसे पहले सेट पर पहुंचते थे और मेकअप शुरू करते थे। फिर वे उस गेट-अप की वजह से न तो खा सकते थे और न ही हिल-डुल सकते थे। ऐसा लग रहा था जैसे मैं रमजान के महीने पहले ही मना रहा हूं। मैं एक मरते हुए व्यक्ति का किरदार निभा रहा था, इसलिए मुझे अपनी टोन और आवाज पर भी काम करना पड़ा। यह एक चुनौती थी, लेकिन जीवन भर का अवसर भी। मैं आभारी हूं कि लोग इसे पसंद कर रहे हैं और मुझे इतना प्यार भेज रहे हैं।
कैसे व्यक्तिगत राजनीति को किरदार से किया अलग
दाऊद जैसे खूंखार व्यक्ति का किरदार निभाते समय अपनी राजनीति को कैसे अलग रखा? इस पर एक्टर ने कहा कि मुझे भी कुछ आशंकाएं थीं, क्योंकि एक व्यक्तिगत मान्यता होती है और एक अभिनेता की। आप उन्हें एक-दूसरे से अलग कैसे करते हैं? यही मेरा संदेह था।
मुझे एहसास हुआ कि जब मैं किसी किरदार को निभाता हूं, तो वही मेरा सच होता है। एक किरदार के अपने अलग पहलू हो सकते हैं, लेकिन एक अभिनेता के रूप में मैं उसका न्याय नहीं कर सकता। मुझे उसके सच को स्वीकार करना पड़ता है, ताकि मैं उसे अच्छे से निभा सकूं। मुझे लगता है कि लोगों को यह पसंद आया। वह जो कुछ भी कर रहा है, उस पर उसे पूरा विश्वास है, यही बात उसे और भी खतरनाक बनाती है।
यह खबर भी पढ़ेंः यामी गौतम से दानिश इकबाल तक; ‘धुरंधर 2’ के वो नए कलाकार, जिन्होंने अपनी एक्टिंग से किया हैरान; जानें किरदार
मैं अभिनेता हूं, नेता नहीं
फिल्म की राजनीति पर दानिश इकबाल ने कहा कि मैं अभिनेता हूं, नेता नहीं। मुझे एक किरदार निभाना है और उसे रोचक बनाना है। यही मेरा काम है। ईमानदारी से कहूं तो, मैं कला का राजनीतिकरण करने में विश्वास नहीं करता। राजनीतिक एजेंडा तय करने वाले हम नहीं हैं। हमारा काम है दर्शकों को एंटरटेन करना, उन अलग-अलग किरदारों के माध्यम से जिन्हें हम निभाते हैं।