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SPECIAL: 45 साल से अमिताभ बच्चन को चमकाने वाले मेकअप आर्टिस्ट से मिलिए
amarujala.com- Written by: आनंद
Updated Sat, 02 Dec 2017 11:25 AM IST
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दीपक सावंत फिल्मों के सबसे चर्चित मेकअप आर्टिस्ट हैं। 45 साल से सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ हैं। इस बीच दीपक ने भोजपुरी एवं हिंदी में चार फिल्में भी बनाईं। उनकी हर फिल्म में अमिताभ हैं। आठ दिसंबर को आ रही 'द ग्रेट लीडर' में भी बिग बी दिखेंगे। इंडस्ट्री और अमिताभ के साथ लंबे सफर पर दीपक से अमर उजाला की विशेष बातचीत...
-अमितजी आपकी बनाई हर फिल्म में होते हैं। वह कहने मात्र से आ जाते हैं या स्क्रिप्ट दिखानी पड़ती है?
वह एकदम हां नहीं कहते। मुझे उनकी आदत मालूम है। पहली फिल्म 'गंगा' में उन्होंने मना कर दिया था। मैंने स्क्रिप्ट दी और कहा कि सर पढ़ लीजिए। अच्छी न लगे, तो मेरे सामने कचरे के डिब्बे में डाल दीजिएगा ताकि जिंदगी में कभी फिल्म न बनाऊं। तब उन्होंने कहा कि रखो-रखो। आठ-दस दिन बाद बोले कि फिल्म बनाओगे, तो मेरा काम छोड़ के चले जाओगे। मैंने कहा कि नहीं, डायरेक्टर, यूनिट और बाकी टीम काम देखेगी। इसके बाद सिलसिला (गंगोत्री, गंगादेवी, द ग्रेट लीडर) चल पड़ा।
-सूटेड-बूटेड अमितजी का सिर्फ चेहरा, कलाइयां, पंजे दिखते हैं। इससे उनके स्वास्थ्य पर कई लोग संदेह करते हैं?
वह बिल्कुल फिट हैं। दो घंटे एक्सरसाइज करते हैं। एक घंटे योगा करते हैं। उनकी ड्रेस ही ऐसे डिजाइन की जाती है। हां, वह बोटॉक्स नहीं करते। जैसे बाकी लोग स्किन टाइट का इंजेक्शन मार दिया। स्किन क्लीनिंग ट्रीटमेंट ले लिया। उनका बोटॉक्स मैं अपने मेकअप से करता हूं, 50-55 के करीब लेकर आता हूं, जबकि वह 75 के हैं।
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-आप शुरू से मेकअप आर्टिस्ट बनना चाहते थे?
मैं इलेक्ट्रीशियन था। लगता था जिंदगी में कुछ बड़ा करूं, तो एक कंपनी में गोडाउन कीपर बन गया। फिर एक फैक्ट्री रिप्रेंजटेेटिव बन। इसके बाद सेल्समैन। कंपनी बंद हुई, तो उसने कहा कि पूना चलो। पिताजी मेकअप आर्टिस्ट थे और मैं इस इंडस्ट्री से नफरत करता था, क्योंकि पिताजी को काम नहीं मिलता था। घर में फाके पड़ते थे। तब मेकअप आर्टिस्ट पर्नसल नहीं होते थे। फिल्म कंपनी में काम करते थे। कंपनी चार महीने या साल भर चलती, फिर छुट्टी। पैसे नहीं होते थे।
-आप कैसे इंडस्ट्री में आए?
नौकरी छूटी, तो पिताजी ने कहा कि एक बार इंडस्ट्री देख लो। मैंने सोचा प्रोडक्शन/डायरेक्शन/कैमरा देखता हूं। पता लगा कि हर डिपार्टमेंट में गाली पड़ती है। तभी राजेश खन्ना को आते देखा। हैंडसम-स्मार्ट हीरो। 'दुश्मन' की शूटिंग थी। वह मेकअप रूम में गए और बाहर निकले, तो ट्रक ड्राइवर बनकर। तब एहसास हुआ कि मेकअप कितनी बड़ी कला है। एक आदमी को दूसरे आदमी में बदल देती है।
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-अमितजी आपकी बनाई हर फिल्म में होते हैं। वह कहने मात्र से आ जाते हैं या स्क्रिप्ट दिखानी पड़ती है?
वह एकदम हां नहीं कहते। मुझे उनकी आदत मालूम है। पहली फिल्म 'गंगा' में उन्होंने मना कर दिया था। मैंने स्क्रिप्ट दी और कहा कि सर पढ़ लीजिए। अच्छी न लगे, तो मेरे सामने कचरे के डिब्बे में डाल दीजिएगा ताकि जिंदगी में कभी फिल्म न बनाऊं। तब उन्होंने कहा कि रखो-रखो। आठ-दस दिन बाद बोले कि फिल्म बनाओगे, तो मेरा काम छोड़ के चले जाओगे। मैंने कहा कि नहीं, डायरेक्टर, यूनिट और बाकी टीम काम देखेगी। इसके बाद सिलसिला (गंगोत्री, गंगादेवी, द ग्रेट लीडर) चल पड़ा।
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-सूटेड-बूटेड अमितजी का सिर्फ चेहरा, कलाइयां, पंजे दिखते हैं। इससे उनके स्वास्थ्य पर कई लोग संदेह करते हैं?
वह बिल्कुल फिट हैं। दो घंटे एक्सरसाइज करते हैं। एक घंटे योगा करते हैं। उनकी ड्रेस ही ऐसे डिजाइन की जाती है। हां, वह बोटॉक्स नहीं करते। जैसे बाकी लोग स्किन टाइट का इंजेक्शन मार दिया। स्किन क्लीनिंग ट्रीटमेंट ले लिया। उनका बोटॉक्स मैं अपने मेकअप से करता हूं, 50-55 के करीब लेकर आता हूं, जबकि वह 75 के हैं।
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-आप शुरू से मेकअप आर्टिस्ट बनना चाहते थे?
मैं इलेक्ट्रीशियन था। लगता था जिंदगी में कुछ बड़ा करूं, तो एक कंपनी में गोडाउन कीपर बन गया। फिर एक फैक्ट्री रिप्रेंजटेेटिव बन। इसके बाद सेल्समैन। कंपनी बंद हुई, तो उसने कहा कि पूना चलो। पिताजी मेकअप आर्टिस्ट थे और मैं इस इंडस्ट्री से नफरत करता था, क्योंकि पिताजी को काम नहीं मिलता था। घर में फाके पड़ते थे। तब मेकअप आर्टिस्ट पर्नसल नहीं होते थे। फिल्म कंपनी में काम करते थे। कंपनी चार महीने या साल भर चलती, फिर छुट्टी। पैसे नहीं होते थे।
-आप कैसे इंडस्ट्री में आए?
नौकरी छूटी, तो पिताजी ने कहा कि एक बार इंडस्ट्री देख लो। मैंने सोचा प्रोडक्शन/डायरेक्शन/कैमरा देखता हूं। पता लगा कि हर डिपार्टमेंट में गाली पड़ती है। तभी राजेश खन्ना को आते देखा। हैंडसम-स्मार्ट हीरो। 'दुश्मन' की शूटिंग थी। वह मेकअप रूम में गए और बाहर निकले, तो ट्रक ड्राइवर बनकर। तब एहसास हुआ कि मेकअप कितनी बड़ी कला है। एक आदमी को दूसरे आदमी में बदल देती है।
-आपकी शुरुआत कैसे हुई?
राजेश खन्ना पहले एक्टर थे, जिन्होंने पर्सनल मेकअप आर्टिस्ट रखा। वह कहीं चला गया, तब पिताजी के पास मैसेज आया कि आप संभालो। मैंने पिताजी से कहा कि मैं यह काम करना चाहता हूं। वह नाराज हुए। डांटा कि तुम भी यही करोगे, तो आगे भी घर में फाके पड़ेंगे। मैंने कहा, आपने अपने हिसाब से किया, मैं अपने हिसाब से करूंगा। आता-जाता कुछ था नहीं। यही लगता था कि सिर्फ आईना दिखाना होता है।
खैर, मैं राजेश खन्ना के साथ काम पर लग गाया। वह जोर से दहाड़ते थे ‘मेकअप’। मैंने भी उतनी जोर से आवाज लगाई, ‘यस, आई एम हियर सर।’ लोग हैरान। राजेश खन्ना ने दो बार मुझे ऊपर से नीचे निहारा। आईने में देखा, चले गए। दो दिन यह चला। तीसरे दिन बीआर फिल्म्स से ऑफर आया। वहां पंढरी दादा नाम के प्रसिद्ध और सबसे व्यस्त मेकअप मैन थे। फिल्म थी, 'दास्तान'। असिस्टेंट की जरूरत थी। 200 रुपये मिले। इसके बाद यश जी ने मुझे 195 रुपये मासिक पगार पर रख लिया।
-'दास्तान' में दिलीप कुमार थे?
जी। दिलीप साहब सफेद कपड़े पहनते थे। साफ-सफाई पसंद थे। उन दिनों मेकअप रूम गंदे, अस्त-व्यस्त रहते थे। मैंने उनका मेकअप रूम चकाचक करके टेबल सजा दिया। कुर्सी पर सफेद तौलिया लगाया। सफेद फूलों से रूम सुंदर बना दिया। वह आए, तो देखते रह गए। पूछा किसने किया, तो मैंने बताया कि मैंने। तब उन्होंने प्रोडक्शन वालों को बुलाकर कहा कि आज से मेरे कमरे में दीपक के अलावा कोई नहीं आएगा। एक दिन दिलीप साहब ने कहा कि पंढरी दादा के पास समय नहीं रहता। वह आते नहीं हैं, इसलिए अगली दो फिल्मों में मेरा मेकअप तुम करोगे। मेरी लाइफ का पहला मेकअप जो है... वह दिलीप साहब का है।
-अमिताभ बच्चन कैसे मिले?
फिल्म थी, 'रास्ते का पत्थर'। वहां पहला परिचय हुआ। जो काम दिलीप साहब के लिए करता था, वहीं अमितजी के लिए करता था। वह मेहबूब स्टूडियो के आठ नंबर कमरे में बैठते थे। वह आकर पहले कमरा देखते। एक बार उनका मेकअप करने का मौका मिला। उन्हें पसंद आया। उन्होंने मेरे हेड ऑफ द डिपार्टमेंट से पूछा कि दीपक ही मेरा मेकअप करे, तो चलेगा क्या? वह मान गए। उस दिन से आज तक करीब 45 साल हो रहे हैं, मैं उनके साथ हूं।
खैर, मैं राजेश खन्ना के साथ काम पर लग गाया। वह जोर से दहाड़ते थे ‘मेकअप’। मैंने भी उतनी जोर से आवाज लगाई, ‘यस, आई एम हियर सर।’ लोग हैरान। राजेश खन्ना ने दो बार मुझे ऊपर से नीचे निहारा। आईने में देखा, चले गए। दो दिन यह चला। तीसरे दिन बीआर फिल्म्स से ऑफर आया। वहां पंढरी दादा नाम के प्रसिद्ध और सबसे व्यस्त मेकअप मैन थे। फिल्म थी, 'दास्तान'। असिस्टेंट की जरूरत थी। 200 रुपये मिले। इसके बाद यश जी ने मुझे 195 रुपये मासिक पगार पर रख लिया।
-'दास्तान' में दिलीप कुमार थे?
जी। दिलीप साहब सफेद कपड़े पहनते थे। साफ-सफाई पसंद थे। उन दिनों मेकअप रूम गंदे, अस्त-व्यस्त रहते थे। मैंने उनका मेकअप रूम चकाचक करके टेबल सजा दिया। कुर्सी पर सफेद तौलिया लगाया। सफेद फूलों से रूम सुंदर बना दिया। वह आए, तो देखते रह गए। पूछा किसने किया, तो मैंने बताया कि मैंने। तब उन्होंने प्रोडक्शन वालों को बुलाकर कहा कि आज से मेरे कमरे में दीपक के अलावा कोई नहीं आएगा। एक दिन दिलीप साहब ने कहा कि पंढरी दादा के पास समय नहीं रहता। वह आते नहीं हैं, इसलिए अगली दो फिल्मों में मेरा मेकअप तुम करोगे। मेरी लाइफ का पहला मेकअप जो है... वह दिलीप साहब का है।
-अमिताभ बच्चन कैसे मिले?
फिल्म थी, 'रास्ते का पत्थर'। वहां पहला परिचय हुआ। जो काम दिलीप साहब के लिए करता था, वहीं अमितजी के लिए करता था। वह मेहबूब स्टूडियो के आठ नंबर कमरे में बैठते थे। वह आकर पहले कमरा देखते। एक बार उनका मेकअप करने का मौका मिला। उन्हें पसंद आया। उन्होंने मेरे हेड ऑफ द डिपार्टमेंट से पूछा कि दीपक ही मेरा मेकअप करे, तो चलेगा क्या? वह मान गए। उस दिन से आज तक करीब 45 साल हो रहे हैं, मैं उनके साथ हूं।
-बीच में ब्रेक आया था, जब अमितजी राजनीति में चले गए थे?
मैंने तब सिर्फ स्मिता पाटिल जी का काम किया। उनकी सारी कमर्शियल फिल्मों का मेकअप मैंने किया। यहां तक कि उनकी डेड बॉडी में उन्हें सुंदर सुहागन रूप में सजाने का काम भी मैंने किया। वह चाहती थीं कि उन्हें ऐसे ही विदा किया जाए।
मुझे लगता है कि यह कला की कद्र है। वह मेकअप करते हुए, मैं रो रहा था। स्मिता जी के बाद मैंने किसी के साथ काम नहीं किया। अमितजी जब राजनीति से फिल्मों में वापस आए, तो उन्होंने मुझे बुलाया और मैं फिर उनके लिए काम करने लगा।
किस्सा फ्रेंच कट का
बात 'अक्स' की शूटिंग की है। डायरेक्टर (राकेश ओमप्रकाश मेहरा) ने अमितजी के किरदार को फ्रेंच कट दाढ़ी दी थी। तब हमें स्पिरिट गम (गोंद) से दाढ़ी चिपकानी पड़ती थी। स्पिरिट गम से बहुत जलन होती है। यह बात मुझे अच्छी नहीं लगती थी। अमितजी रोज दाढ़ी करके आते। तब मैंने कहा कि आप तीन-चार दिन दाढ़ी रख लीजिए, उस पर नकली फ्रेंच कट लगाएंगे। उन्होंने यही किया।
उसी समय टीवी पर कौन बनेगा करोड़पति की शूटिंग आ गई। एक साथ दो गेट-अप शूट नहीं हो सकते। दाढ़ी निकाल दी, तो 'अक्स' की शूटिंग में स्पिरिट गम वाली दाढ़ी की तकलीफ झेलनी पड़ेगी। तब अमितजी ने केबीसी में भी हल्की फ्रेंच कट दाढ़ी रख ली। लोगों ने ‘लुकिंग चेंज’ का वो हल्ला किया कि दाढ़ी अमितजी के चेहरे पर फिक्स हो गई।
मुझे लगता है कि यह कला की कद्र है। वह मेकअप करते हुए, मैं रो रहा था। स्मिता जी के बाद मैंने किसी के साथ काम नहीं किया। अमितजी जब राजनीति से फिल्मों में वापस आए, तो उन्होंने मुझे बुलाया और मैं फिर उनके लिए काम करने लगा।
किस्सा फ्रेंच कट का
बात 'अक्स' की शूटिंग की है। डायरेक्टर (राकेश ओमप्रकाश मेहरा) ने अमितजी के किरदार को फ्रेंच कट दाढ़ी दी थी। तब हमें स्पिरिट गम (गोंद) से दाढ़ी चिपकानी पड़ती थी। स्पिरिट गम से बहुत जलन होती है। यह बात मुझे अच्छी नहीं लगती थी। अमितजी रोज दाढ़ी करके आते। तब मैंने कहा कि आप तीन-चार दिन दाढ़ी रख लीजिए, उस पर नकली फ्रेंच कट लगाएंगे। उन्होंने यही किया।
उसी समय टीवी पर कौन बनेगा करोड़पति की शूटिंग आ गई। एक साथ दो गेट-अप शूट नहीं हो सकते। दाढ़ी निकाल दी, तो 'अक्स' की शूटिंग में स्पिरिट गम वाली दाढ़ी की तकलीफ झेलनी पड़ेगी। तब अमितजी ने केबीसी में भी हल्की फ्रेंच कट दाढ़ी रख ली। लोगों ने ‘लुकिंग चेंज’ का वो हल्ला किया कि दाढ़ी अमितजी के चेहरे पर फिक्स हो गई।