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फिल्म उद्योग में अब नहीं चलेगा फेडरेशन का ‘डंडा’, इम्पा ने निर्माताओं को भेजी सीसीआई के आदेश की कॉपी

Mon, 08 Jun 2020 05:25 PM IST
अपूर्वा राय पंकज शुक्ल
पंकज शुक्ल Published by: अपूर्वा राय Updated Mon, 08 Jun 2020 05:25 PM IST
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competition commission of india rules in favour of film producer fwice finds itself in tight spot
शूटिंग - फोटो : Social Media

कोरोना काल मुंबई में काम करने वाले फिल्म उद्योग के लिए एक बड़ी सौगात ले आया है। एक तरफ जब फिल्म इंडस्ट्री लॉकडाउन में चल रही बंदी से जूझ रही थी, उसी समय कोटिंलो पिक्चर्स की अपील पर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने एक ऐसा फैसला सुना दिया है कि फिल्म इंडस्ट्री में बरसों से अपना दबदबा कायम किए हुए फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लाइज (एफडब्लूआईसीई) के अस्तित्व को ही खतरा पैदा हो गया। इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएसशन (इम्पा) ने इस बारे में सोमवार को सभी फिल्म निर्माता संगठनों और फिल्म निर्माण में सक्रिय सभी यूनियनों को एक सर्कुलर भी जारी कर दिया है।

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एफडब्लूआईसीई, जिसे आम बोलचाल में मुंबई फिल्म उद्योग में फेडरेशन कहकर ही बुलाया जाता है, मजदूरों के हितों के संरक्षण के नाम पर निर्माताओं के साथ दशकों से भिड़ी रही है। सरकारी बैठकों में भी फेडरेशन खुद को फिल्म मजदूरों की एक मात्र प्रतिनिधि संस्था बताती रही है। फिल्म उद्योग की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय फिल्ममेकर अशोक पंडित इन दिनों फेडरेशन के मुख्य सलाहकार हैं। वह फिल्म एंड टीवी डायरेक्टर्स एसोसिएशन (इफ्टडा) के भी अध्यक्ष हैं। इम्पा के अध्यक्ष टी पी अग्रवाल को भी अब तक उन्हीं के खेमे का निर्माता माना जाता रहा है। लेकिन, सीसीआई के एक फैसले ने फिल्म संगठनों की राजनीति का ये सारा खेल ही उल्टा कर दिया है। और, पहली बार टी पी अग्रवाल को भी ये अंदाजा हुआ कि इस युद्ध में उन्हें किस तरह खड़े रहना है।

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competition commission of india rules in favour of film producer fwice finds itself in tight spot
प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने सिने एंड टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन, सिनटा और एफडब्ल्यूआईसीई - फोटो : सोशल मीडिया

इम्पा ने सोमवार की सुबह सारे निर्माता संगठनों और फिल्म निर्माण में लगी यूनियनों को जो सर्कुलर भेजा है, दरअसल वह फेडरेशन को लिखे एक लंबे पत्र की कॉपी है। इस पत्र में इम्पा ने फेडरेशन से सीधा मोर्चा खोल दिया है। इम्पा ने कहा है कि फेडरेशन का खुद को फिल्म कारीगरों की एकमात्र प्रतिनिधि संस्था होने का दावा करना भ्रामक और असत्य है। पत्र में ये भी कहा गया है कि फेडरेशन का लाखों कामगारों की नुमाइंदगी करने का दावा भी गलत निकला है।


उल्लेखनीय है कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग यानी कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया ने 26 मई को एक आदेश पारित किया है। इस आदेश की कापी की प्रति सीसीआई में अपील करने वाली कंपनी कोंटिलो पिक्टर्स को एक जून को भेजी गई है। इस पत्र में साफ लिखा है कि फेडरेशन अब किसी भी फिल्म या धारावाहिक निर्माता को अपनी सदस्य यूनियनों के सदस्य के साथ ही काम करने के लिए बाध्य नहीं कर सकती। और, न ही वह अपनी सदस्य यूनियनों को किसी निर्माता की शूटिंग का बहिष्कार करने का निर्देश दे सकती है। सीसीआई ने फेडरेशन को निर्माताओं पर जुर्माना लगाने की आदतों से भी बाज आने को कहा है।

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अपने इस आदेश में कंपटीशन कमीशन ने ये जिक्र किया कि फेडरेशन ने उनके पिछले आदेश को न मानकर आयोग की अवहेलना की है। इस पर फेडरेशन के वकील ने आयोग के समक्ष माफी मांगते हुए अपने निर्देश वापस लेने का वायदा आयोग के सामने किया। आयोग ने फेडरेशन को निर्देश दिया है कि वह उसके आदेश के अनुपालन को लेकर 10 दिन के भीतर एक हलफनामा भी उसके सामने दाखिल करे।

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