फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Bollywood ›   amitabh bachchan on hindi diwas EXCLUSIVE talks with amar ujala

रोमन में लिखे हिंदी के संवाद पढ़ना पसंद नहीं करते हैं अमिताभ बच्चन

Mon, 14 Sep 2020 01:44 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Mon, 14 Sep 2020 01:44 PM IST
विज्ञापन
amitabh bachchan on hindi diwas EXCLUSIVE talks with amar ujala
अमिताभ बच्चन - फोटो : Twitter @SrBachchan

अमिताभ बच्चन को देश में खासतौर से मनोरंजन क्षेत्र में हिंदी के पुनर्जीवन का सबसे बड़ा संवाहक माना जाता है। स्टार समूह ने भारत में जब पैर पसारे तो लंबे समय तक दूसरे चैनलों के आगे इसके चैनल फीके ही रहे। फिर एक दिन रूपर्ट मर्डोक की टीम ने अपने समूह के मनोरंजन चैनल हिंदी में करने का फैसला किया। और, हिंदी के अलमबरदार बने अमिताभ बच्चन। ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के पहले सीजन से लेकर पिछले सीजन तक अमिताभ बच्चन ने हिंदी की खूब सेवा की। वह कहते भी हैं, ‘मैं जो कुछ हूं, हिंदी प्रेमियों की वजह से ही हूं। हिंदी का मेरे ऊपर जो ऋण है, उसे कभी मैं चुका नहीं सकता।’

विज्ञापन


ये बात है उन दिनों की जब अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘बुड्ढा होगा तेरा बाप’ रिलीज होने वाली थी और उनके कार्यालय जनक में मीडिया संवाद चल रहा था। अमिताभ बच्चन तमाम संपादकों और वरिष्ठ पत्रकारों से एक एक कर मिल रहे थे। एक सुनहरे रंग की स्याही वाली कलम उनके पास था और वह सबसे प्यार से मिलने के बाद हिंदी में एक शुभकामना संदेश अपने हस्ताक्षर के साथ सबके लिए उनके नाम से लिख कर खुद ही दे रहे थे। ये सिलसिला करीब तीन चार घंटे चला होगा। उस दिन अमिताभ थे भी बहुत बेतकल्लुफ।
विज्ञापन


बातों ही बातों में मैंने उनके ‘बाबूजी’ यानी हरिवंश राय बच्चन पर चर्चा छेड़ी। ‘मधुशाला’ मन्ना डे ने भी गाई है और अमिताभ बच्चन ने भी इसका सस्वर पाठ किया है। लेकिन, बाकी रचनाएं? अमिताभ बच्चन के चेहरे पर भाव कुछ पल को ठहर से गए। फिर बोले, ‘मैं बाबूजी की सारी रचनाएं और धरोहरों को एक छत के नीचे लाकर उनका स्मारक बनाना चाहता हूं। मेरी इच्छा है कि ये स्मारक इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में बने। इस बारे में मैं हर किसी का सहयोग लेने के लिए भी तत्पर हूं।’ ये कोई नौ साल पहले की बात है। इसके बाद अमिताभ बच्चन इलाहाबाद गए भी। वहां भी गए जहां हरिवंशराय बच्चन रहा करते थे और जहां अमिताभ बच्चन का जन्म हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन


लेकिन, अमिताभ बच्चन की अपने बाबूजी की रचनाओं और धरोहर का स्मारक उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण शहर इलाहाबाद या कहें कि प्रयागराज में बनाने की दीर्घकालिक योजना का श्रीगणेश अब तक नहीं हो सका है। वजह? काफी तफ्तीश करने पर पता ये चला कि अमिताभ बच्चन जब अपने जन्मस्थल के दर्शन की इच्छा लिए  इलाहाबाद पहुंचे थे तो जिस व्यक्ति के पास उस स्थान का स्वामित्व है, उसने उन्हें अपने अहाते के भीतर तक नहीं आने दिया। जाहिर है अमिताभ बच्चन ने उस स्थल को पाने की कोशिश जरूर की होगी, लेकिन यश, प्रतिष्ठा और धन भी कभी कभी किसी गरीब के आगे तब हार जाते हैं, जब वह अपने आत्मसम्मान को अपनी पहचान बना लेता है।

खैर, बात मैं कर रहा था उस दिन अमिताभ बच्चन से हुई लंबी मुलाकात की। उन्होंने सुनहरे अक्षरों में लिखा एक शुभकामना संदेश मुझे भी दिया। साथ बिठाया। उसी दिन भगवती चरण वर्मा, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला और शिव मंगल सिंह ‘सुमन’ पर भी चर्चा का सूत्र निकला था, लेकिन इस पर बात आगे बढ़ नही सकी क्योंकि कतार में और भी संपादक लगे हुए थे। मैंने अपने नियत समय में एक और सवाल अमिताभ बच्चन से पूछा और उसका जवाब शायद मैं कभी भूल नहीं पाऊंगा।


मैंने अमिताभ बच्चन से पूछा कि हिंदी फिल्म उद्योग में तमाम लेखक अपनी कहानियां अंग्रेजी में लिखते हैं। कुछ तो हिंदी भी रोमन में लिखते हैं। आपके सामने रोमन में लिखी हिंदी आती है तो आपकी क्या प्रतिक्रिया होती है? अमिताभ बच्चन बोले, ‘मैं हिंदी सिर्फ देवनागरी में लिखी हुई ही पसंद करता हूं। या तो पटकथा पूरी की पूरी अंग्रेजी में हो या अगर संवाद हिंदी में हैं तो फिर मेरी प्राथमिकता उन्हें देवनागरी में ही पढ़ने की होती है।’ अमिताभ बच्चन का यही मानना रहा है कि बोली के तौर पर हिंदी का प्रचार प्रसार हिंदी सिनेमा ने पूरी दुनिया में किया है। भाषा के तौर पर इसका प्रचार प्रसार करने की जिम्मेदारी हिंदी जानने वालों की है, लोगों को देवनागरी सिखाकर या इसे सीखने के लिए दूसरों को प्रेरित कर।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें मनोरंजन समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे बॉलीवुड न्यूज़, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट हॉलीवुड न्यूज़ और मूवी रिव्यु आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed