30 साल का इंतजार और तपस्या जैसा काम; कौन है 'धुरंधर' में जान फूंकने वाला यह शख्स? आदित्य धर ने मिलवाया
Who is Dhurandhar Cinematographer: फिल्म 'धुरंधर' अगर सिनेमाघरों में धूम मचा रही है तो इसमें सैंकड़ों लोगों की दिन-रात की मेहनत है। इसी में एक नाम है विकास नौलखा, जिनकी तारीफ में आज फिल्म के निर्देशक आदित्य धर ने पोस्ट शेयर किया है।
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फिल्म 'धुरंधर' फ्रैंचाईजी निर्देशन से लेकर कलाकारों के अभिनय तक हर कसौटी पर खरी उतरी है। दोनों ब्लॉकबस्टर फिल्मों में पर्दे पर नजर आने वाले सितारों के साथ-साथ पर्दे के पीछे काम करने वाली टीम ने भी पूरी शिद्दत से काम किया है। इस फिल्म से जुड़े सिनेमेटोग्राफर विकास नौलखा ने अपने काम से इस फिल्म में चार चांद लगाए हैं। आज रविवार को आदित्य धर ने उनकी तारीफ में पोस्ट शेयर किया है और बताया कि विकास बिल्कुल आखिरी वक्त में फिल्म से जुड़े थे मगर उन्होंने किसी साधना की तरह अपना काम किया।
30 के इंतजार के बाद मिली मनपसंद फिल्म
आदित्य धर ने इंस्टाग्राम अकाउंट से एक पोस्ट शेयर किया है। उन्होंने लिखा है, 'यह विकास नौलखा हैं। 'धुरंधर' के पीछे की नजर, सहज-ज्ञान और आत्मा। वह 'धुरंधर' टीम में शामिल होने वाले आखिरी HOD थे। ठीक हमारे काम शुरू करने से कुछ ही दिन पहले। यह जानते हुए कि वह कितने सोच-समझकर चुनाव करते हैं, उनका उस समय आना बहुत मायने रखता था। यह किसी सिनेमैटोग्राफर को टीम में शामिल करने जैसा कम, और किस्मत के सही समय पर चुपचाप दखल देने जैसा ज्यादा लगा। मुझे आज भी याद है कि स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद उन्होंने कहा था, 'मैंने ऐसी फिल्म करने के लिए 30 साल इंतजार किया है। मैं इसके लिए अपनी जान लगा दूंगा'। और उन्होंने अपने हर शब्द को सच कर दिखाया। इसके बाद जो हुआ, वह सिर्फ काम नहीं था। वह एक साधना थी'।
चट्टान की तरह मजबूती से डटे रहे विकास
निर्देशक ने आगे लिखा है, 'मुश्किल शेड्यूल के बीच अक्सर बेकाबू लगने वाली अफरा-तफरी के बीच और एक फिल्म के समय और बजट में असल में दो फिल्में शूट करने के दौरान, विकास इन सबके केंद्र में चट्टान की तरह मजबूती और लगन से डटे रहे। फिल्म का पूरा बोझ सचमुच अपने कंधों पर उठाते हुए, अमृतसर की झुलसा देने वाली गर्मी और लेह की कड़ाके की ठंड का सामना करते हुए..., उन्होंने एक बार भी फिल्म के मूल विचार को कमजोर नहीं पड़ने दिया। लेकिन, जो बात विकास को सचमुच सबसे अलग बनाती है, वह सिर्फ उनकी सहनशक्ति नहीं है, बल्कि उनकी नजर में बसी आत्मा है।
आदित्य बोले- 'यह तो बस शुरुआत है'
आदित्य धर ने आगे लिखा है, 'बारीकियों पर उनकी पैनी नजर, कैमरे के पीछे उनकी भावनात्मक समझ और किसी सीन को सिर्फ देखने भर की नहीं, बल्कि उसे महसूस करने की उनकी कमाल की काबिलियत। यहीं उनकी प्रतिभा छिपी है। 'धुरंधर' का हर फ्रेम सांस लेता है, क्योंकि विकास ने उसे सांस लेने की आजादी दी। उन्होंने सिर्फ पलों को कैमरे में कैद नहीं किया, बल्कि उन्हें जीवन दे दिया। सेट पर उनके सुझाव कभी शोर-शराबे वाले नहीं होते थे, लेकिन हमेशा एकदम सटीक होते थे। फिल्में शूट करने वाले तो बहुत हैं, लेकिन विकास ने इस फिल्म को जिया है। एक कलाकार और एक इंसान के तौर पर इस सफर में उनके साथ होने के लिए, मेरे मन में उनके प्रति असीम आभार, सम्मान और स्नेह है। इस फिल्म पर उनकी छाप हमेशा के लिए बनी रहेगी। यह तो बस शुरुआत है, यहां से आगे हम जो भी कहानियां सुनाएंगे, वे और भी दूर तक जाएंगी।