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Amar Ujala Samvad: इंडस्ट्री में क्या बदलना चाहते हैं अक्षय-टाइगर, निर्माता-निर्देशक को किस बात पर कोसते हैं?

Mon, 26 Feb 2024 04:26 PM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति राघव Updated Mon, 26 Feb 2024 04:26 PM IST
सार

अमर उजाला संवाद में अक्षय कुमार ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में बहुत सी एकता और भाईचारे की जरूरत है। वहीं, टाइगर ने भी खिलाड़ी कुमार की बात दोहराई। साथ ही कहा कि हमें और डबल हीरो या मल्टी स्टारर फिल्में बनानी चाहिए। 

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Bade Miyan Chote Miyan Movie Actor Akshay Kumar and Tiger Shroff Talks in Amar Ujala Lucknow Samvad News
अक्षय कुमार और टाइगर श्रॉफ। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में आज 26 फरवरी को चर्चित सितारे अक्षय कुमार और टाइगर श्रॉफ पहुंचे। दोनों जल्द ही फिल्म 'बड़े मियां छोटे मियां' में साथ नजर आएंगे। संवाद में अक्षय और टाइगर ने लखनऊ के खानपान का जिक्र किया। इसके अलावा दोनों ने अपनी आगामी फिल्म, एक्शन, सेहत, कसरत और खानपान समेत तमाम पहलुओं पर महत्वपूर्ण विचार रखे। आइए जानते हैं...

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लखनऊ में सबसे अच्छा क्या लगता है?
अक्षय कुमार: मैं यहां चार-पांच फिल्में कर चुका हूं। लखनऊ को लेकर मेरा अनुभव अलग रहा है। मेरे प्रोड्यूसर, डायरेक्टर को यहां पर कमाल की शूटिंग करने का मौका मिला। आगे भी दो फिल्मों की शूटिंग यूपी में होनी है। यहां का खाना लाजवाब है। 
टाइगर श्रॉफ: मुझे यहां का खाना बहुत अच्छा लगता है। टुंडे कबाब का लुत्फ उठाता हूं। तीन साल पहले भी मैं यहां आया था, तब ज्यादा घूमने को नहीं मिला।

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'बड़े मियां-छोटे मियां' को लेकर क्या कहेंगे? ये कैसे अलग है? 
टाइगर श्रॉफ: 'मैं ओरिजिनल एक्शन हीरो के साथ काम कर रहा हूं। इसका मैं शुक्रगुजार हूं। अक्षय कुमार से बहुत कुछ सीखने को मिला। एक्शन आर्टिस्ट, एक्टर और एक इंसान के तौर पर मुझे बहुत कुछ इनसे सीखने को मिला'। 
अक्षय कुमार: 'एक ऐसे इंसान से मुलाकात हुई, जो एक्टिंग को लेकर मुझसे भी डरा रहता है। मेरी उम्र टाइगर से एकदम दोगुनी है। कहते हैं कि आप युवाओं के साथ काम कीजिए, ताकि उनके स्टेमिना से सीख सकें। हम साथ में वॉलीबॉल, क्रिकेट खेलते हैं। साथ में कसरत करते हैं। मुझे बहुत सी चीजें टाइगर से समझने को मिली हैं। एक छोटा उदाहरण है कि जब भी मैं टाइगर को देखता हूं कि सुबह आठ से 10 बजे तक वे अपनी टी-शर्ट हटाकर धूप में बैठते हैं और विटामिन डी लेते हैं। हमारे यहां ब्लड टेस्ट में हमेशा विटामिन डी कम ही आता है। मैंने यह इनसे सीखा है। छोटी सी लेकिन कमाल की चीज है'। 
 
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जॉर्डन में कैसे अनुभव रहा? सुना है कि आप लोगों को ठंड नहीं लगी वहां। 
टाइगर श्रॉफ: वहां हम बहुत मेहनत कर रहे थे। इसलिए वहां ज्यादा ठंड नहीं लग रही थी। मैं रिकवरी के लिए आइस बाथ और कोल्ड शॉवर लेता हूं। 

अक्षय कुमार: हम डांस सीक्वेंस कर रहे थे, तो ठंड नहीं लगी।

मार्शल आर्ट के बारे में आप दोनों क्या कहना चाहेंगे?
अक्षय कुमार: मार्शल आर्ट सिर्फ फिल्मों के लिए नहीं होता, वह जिंदगी के लिए होता है। यह आत्म अनुशासन होता है जो सबके लिए जरूरी होता है। मैं कहना चाहता हूं कि बच्चों को यह सीखना चाहिए। देश में कम से कम तीन से चार साल के लिए मार्शल आर्ट अनिवार्य होना चाहिए। अनुशासन सबसे जरूरी है जो इससे सीखने को मिलता है। मुझे पता चल रहा है कि यूपी में भी धीरे-धीरे अनुशासन आ रहा है। मुझे लगता है कि यहां भी एक परफेक्ट मार्शल आर्ट लीडर हैं, जो लोगों को ठीक से प्रशिक्षित कर रहा है। 

मार्शल आर्ट की बात चली है तो महिलाओं की सुरक्षा के लिए क्या कहेंगे?
अक्षय कुमार: महिलाओं के लिए सबसे अहम बात है कि जब कोई उन पर हमला करे, तो वे क्या करें। उन्हें पलटवार करना आना चाहिए। जब कोई आदमी महिला पर हमला करता है तो वह खुद सबसे ज्यादा डरा हुआ होता है। अगर महिला चीखे, तो आदमी भाग जाएगा। पत्थर तलाशिए और उससे हमला कीजिए। एकदम फ्रीज मत हो जाइए। 1.20 लाख महिलाओं को हमने एक अकादमी के जरिए आत्मसुरक्षा सिखाई है। एक मामले में महिला ने इसी तरह बचाव किया और हमला करने वाला भाग निकला'। 

आपकी सबसे पसंदीदा हिंदी एक्शन फिल्म कौन सी है?
टाइगर श्राफ: मेरी पसंदीदा हिंदी एक्शन फिल्म युद्ध थी, जिसमें मेरे पिता जैकी श्रॉफ थे। अक्षय सर के स्टंट का भी मैं फैन हूं। मुझे फ्लाइट में बैठने का फोबिया है। खिलाड़ी 420 मूवी में वे प्लेन के विंग्स पर खड़े थे और स्टंट कर रहे थे। उनसे काफी कुछ सीखने का मौका मिला है। हम लोगों के खुद के टॉम क्रूज यहीं बैठे हैं। 
अक्षय कुमार: हां, उस मूवी में मेरा दिमाग खराब था। प्लेन के विंग्स से बैलून पर कूदा था। जोश-जोश में मैंने कर दिया। विंग्स पर खड़े होने तक ठीक था। वहां से कूदना सही नहीं था। अब होता तो शायद VFX का इस्तेमाल होता। 

आप लोग आमतौर पर बॉडी डबल्स इस्तेमाल नहीं करते। ऐसा क्यों?
अक्षय कुमार: हमारे दर्शक टिकट खरीदकर आते हैं तो उन्हें रियल सीन चाहिए, नहीं तो यह उन्हें धोखा देने जैसा होगा। जहां जान से भी ज्यादा खतरा होता है, वहां VFX होते हैं। इस मूवी में हमने धमाकों के बीच सीन किए हैं। मैं नहीं चाहता कि मेरे दर्शक धोखा महसूस करें। हम दोनों को एक्शन करने में मजा आता है और हमें इसके लिए पैसे भी मिलते हैं, प्रोड्यूसर इसके लिए अच्छी जगहों पर ले जाता है तो इससे ज्यादा और क्या चाहिए। 
टाइगर श्रॉफ: मैं बचपन से एक्शन करता आया हूं। बचपन से अक्षय सर, जैकी चेन की फिल्में देखकर सीखा है। यह मेरे लिए नशा है।

स्टंट को लेकर डर नहीं रहता?
अक्षय कुमार: डर तो रहता है। हर स्टंट ऐसे ही नहीं हो जाते। हम कोशिश करते हैं कि वो सेफ हो। हम ध्यान देते हैं कि कोई भी मूव गलत न हो। बहुत सारी ट्रेनिंग के बाद वो स्टंट होता है। 
टाइगर श्रॉफ: परफेक्ट स्टंट वही है, जिसमें खुद को या किसी को चोट न लगे।

अगर आप सुपर हीरो होते तो तकिया कलाम क्या होता?
अक्षय कुमार: डोन्ट एंग्री मी।
टाइगर श्रॉफ: सबको आती नहीं, मेरी जाती नहीं। 

 

'चीट डे' पर सबसे ज्यादा खाने में क्या अच्छा लगता है?
अक्षय कुमार: पूड़ी-छोले और हलवा। चीट डे होना चाहिए। बॉडी को शॉक देना जरूरी है।
टाइगर श्रॉफ: हफ्ते में एक बार हम दोनों चीट डे रखते हैं। चॉकलेट या कुछ मीठा पसंद है मुझे।

किस फिल्म को ठुकराने का आपको मलाल है?
अक्षय कुमार: एक्शन फिल्मों में मुझे 'सिंघम' मिली होती तो अच्छा होता। 
टाइगर श्रॉफ: फिलहाल ऐसा मलाल नहीं है। अब तक तो खुशकिस्मत रहा हूं।

फिल्म उद्योग में कौन-सी ऐसी चीज है जो बदलना चाहते हैं?
अक्षय कुमार: फिल्म इंडस्ट्री में बहुत सी एकता और भाईचारे की जरूरत है।
टाइगर श्रॉफ: मैं भी यही कहना चाहूंगा। हमें और डबल हीरो या मल्टी स्टारर फिल्में बनानी चाहिए। 

युवाओं के लिए क्या करना या कहना चाहेंगे?
अक्षय कुमार: जिंदगी में कुछ शॉर्टकट नहीं होता। VFX शॉर्टकट है। स्टेयरॉइड्स भी शॉर्टकट है। कड़ी मेहनत सबसे ज्यादा अहमियत रखती है।
टाइगर श्रॉफ: जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ा खतरा है। हमारी जिम्मेदारी है कि हम पर्यावरण की तरफ ध्यान दें। घर से शुरुआत करें। बिजली-पानी बचाएं। पौधे लगाएं। मेरे पिता भी यह कर रहे हैं, वे पौधा लेकर चलते हैं।

अपना शेड्यूल बताना चाहेंगे? 
अक्षय कुमार: मैं रात को साढ़े नौ बजे तक सो जाता हूं। मैं सुबह चार-साढ़े चार बजे उठ जाता हूं। तब पत्नी और बच्चे सो रहे होते हैं तो तनाव नहीं होता। दो-तीन घंटे खुद के लिए चाहिए होते हैं, जब आप अकेले हों, खुद के बारे में सोचें और फोन-इंस्टाग्राम न देखें। डेढ़ घंटे वर्कआउट करता हूं। फिर नाश्ते के बाद काम पर चला जाता हूं। मुझे डे शिफ्ट पसंद हैं। जब नाइट शिफ्ट होती है तो हम दोनों ही प्रोड्यूसर और डायरेक्टर को बहुत कोसते हैं। कभी-कभी काम होता है तो जागना पड़ता है। 
टाइगर श्रॉफ: सुबह साढ़े छह-सात बजे तक उठ जाता हूं। फिर मैं रनिंग करने जाता हूं। घर लौटकर नाश्ता करता हूं। विटामिन डी लेता हूं। जिम जाकर मार्शल आर्ट ट्रेनिंग करता हूं। शूटिंग न हो तो घर आकर झपकी लेता हूं। फिर दोबारा जिम जाकर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करता हूं।

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