पश्चिम बंगाल: 45 हजार से बढ़ाकर अब एक लाख छात्रों को मिलेगी बेहतर मिड-डे मील की सुविधा, अक्तूबर से होगा लागू
पश्चिम बंगाल में छात्रों को मिलने वाले मिड-डे मील की सुविधा का दायरा बढ़ाया जा रहा है। सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि पीएम पोषण योजना के तहत 1 अक्तूबर से बेहतर गुणवत्ता वाला मिड-डे मील 45 हजार की जगह एक लाख छात्रों को दिया जाएगा।
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पश्चिम बंगाल के मंत्री सुवेंदु अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि पीएम पोषण योजना के तहत बेहतर गुणवत्ता वाला मिड-डे मील अब ज्यादा छात्रों को दिया जाएगा। 1 अक्तूबर से इसका दायरा 45 हजार छात्रों से बढ़ाकर एक लाख छात्रों तक किया जाएगा। अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि राज्य सरकार सरकारी स्कूलों के सभी छात्रों को साफ-सुथरे माहौल में अच्छी गुणवत्ता वाला, संतुलित और पौष्टिक भोजन देने के लिए प्रतिबद्ध है। बच्चों में पोषण की कमी दूर करना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने बताया कि इस योजना को ISKCON की सहयोगी संस्था 'अन्नमृत फाउंडेशन' के साथ मिलकर लागू किया जा रहा है। इसके लिए सेंट्रलाइज्ड मॉडर्न किचन के जरिए छात्रों के लिए भोजन तैयार किया जाएगा।
पहले चरण में 30 हजार छात्रों के लिए शुरू हुआ था प्रोजेक्ट
अधिकारी ने कहा, "1 अगस्त से, प्रोजेक्ट के पहले चरण में सेंट्रलाइज्ड मॉडर्न किचन को राज्य भर में लगभग 30,000 छात्रों के लिए पौष्टिक भोजन तैयार करने और पहुंचाने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी।" उन्होंने कहा कि संस्था ने ऑटोमेटेड और हाइजीनिक प्रक्रियाओं से भोजन तैयार करने, तय कैलोरी और प्रोटीन लेवल बनाए रखने और स्कूलों तक समय पर भोजन पहुंचाने में जिम्मेदारी दिखाई है।
उन्होंने कहा, "शुरुआती सफलता के आधार पर, राज्य सरकार ने इस सेवा का दायरा बढ़ाकर इसमें 15,000 और छात्रों को शामिल किया। नतीजतन, अभी कुल 45,000 छात्र बेहतर क्वालिटी वाले मिड-डे मील का लाभ उठा रहे हैं।"
अधिकारी ने बताया कि 1 अक्तूबर से इस योजना का एक और चरण शुरू किया जाएगा। इसके बाद इस सुविधा का लाभ एक लाख छात्रों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार की योजना धीरे-धीरे राज्य के सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के छात्रों तक इस पहल को पहुंचाने की है।
मिड-डे मील योजना में अंडे भी शामिल
अधिकारी ने 'अन्नमृत फाउंडेशन' के अधिकारियों को भी "उच्चतम मानकों" को बनाए रखते हुए कुशलतापूर्वक सेवा प्रदान करने के लिए धन्यवाद दिया। राज्य सरकार ने सरकार बदलने के बाद अपने पहले बजट में घोषणा की थी कि कोलकाता के स्कूलों में मिड-डे मील की आपूर्ति की जिम्मेदारी ISKCON को सौंपी जाएगी।
सरकार ने कहा था कि अगर कोलकाता मॉडल सफल रहा तो बाद में इस पहल को राज्य के अन्य हिस्सों में भी बढ़ाया जा सकता है। यह प्रोग्राम अगस्त में कोलकाता के चुनिंदा स्कूलों में शुरू हुआ था, जिसमें ISKCON भोजन तैयार करने और बांटने के लिए एक सेंट्रलाइज्ड किचन चला रहा है।
बाद में इस पहल की कुछ मुद्दों को लेकर आलोचना भी हुई थी। इसमें खाना पहुंचाने में देरी और शाकाहारी भोजन उपलब्ध कराने जैसी बातें शामिल थीं। बाद में सरकार ने स्कूल मील प्रोग्राम के तहत छात्रों को अंडे देने का अलग से फैसला किया और यह व्यवस्था अभी लागू है।
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