UP Board Exam 2022: 1992 में यूपी बोर्ड की दसवीं की परीक्षा में सफल हुए थे 15 फीसदी से भी कम छात्र, जानें क्यों हुआ था ऐसा और क्या थी पूरी बात
उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाली बोर्ड परीक्षाओं के लिए तारीखों का ऐलान नहीं किया गया है। राज्य में बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा किया जाता है।
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (UPMSB) द्वारा राज्य में बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है और UPMSB ने अभी तक 2022 में होने वाली बोर्ड परीक्षाओं के लिए तारीखों का ऐलान नहीं किया है। यह उम्मीद जताई जा रही है कि इस साल यूपी बोर्ड की परीक्षाएं विधानसभा चुनाव के पूरा होने के बाद आयोजित कराई जा सकती है। हालांकि, इस संबंध में UPMSP ने अभी तक कोई भी आधिकारिक सूचना नहीं जारी की है। इसलिए छात्रों को इससे संबंधित सूचनाओं के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखनी चाहिए। इस साल यूपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षा में शामिल होने के लिए तकरीबन 52 लाख छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इसमें 28 लाख छात्र 10वीं की परीक्षा में तो वहीं 24 लाख छात्र 12वीं की परीक्षा में हिस्सा लेंगे। कोरोना महामारी की वजह से कभी स्कूल खुलते हैं तो कभी बंद हो जाते हैं ऐसे में छात्रों की पढ़ाई प्रभावित ना हो, इसके लिए सफलता डॉट कॉम 10वीं और 12वीं के छात्रों को घर बैठे ऑनलाइन क्लासेस उपलब्ध करा रहा है। इन क्लासेस में छात्रों को सभी सब्जेक्ट की तैयारी कराई जाती है और आने वाली परीक्षाओं के लिए उन्हें रिवीजन और प्रैक्टिस भी कराई जाती है। इन क्लासेस को ज्वॉइन करने के बाद छात्रों को किसी कोचिंग सेंटर की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। अगर आप भी 10वीं या 12वीं के छात्र हैं तो आप इस लिंक की मदद से Safalta Board Exam Preparation - Join Now से जुड़ सकते हैं।
1992 में 10वीं की परीक्षा में सफल हुए थे 15 फीसदी से भी कम छात्र :
वैसे तो बोर्ड परीक्षाएं हर छात्र के लिए खास होती हैं और वे इसे कभी नहीं भूल पाते हैं, लेकिन 1992 में आयोजित की गई यूपी बोर्ड की परीक्षाएं पूरे देश में चर्चा का विषय बनीं थी। दरअसल इस साल आयोजित की गई दसवीं बोर्ड की परीक्षा में 15 फीसदी से भी कम छात्र पास हुए थे। 1992 में हाईस्कूल में केवल 14.70 फीसदी छात्र-छात्राएं और इंटर में 30.30 प्रतिशत छात्र-छात्राएं पास हुए थे। 1992 में हाईस्कूल परीक्षा देने वाले परीक्षार्थियों की स्थिति यह थी की पूरे-पूरे मोहल्ले में खोजने से इक्का-दुक्का पास छात्र मिलते थे। कई स्कूल ऐसे थे जिनका एक भी छात्र 10वीं पास नहीं कर पाया था।
क्यों हुआ था ऐसा :
1992 से पहले राज्य में आयोजित की जाने वाली बोर्ड परीक्षाओं में जमकर नकल होती थी। लेकिन, 1992 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की सरकार ने एंटी कॉपींग ऐक्ट-1992 के तहत नकल को एक गैर जमानती अपराध बना दिया। इस एक्ट के लागू होने के बाद परीक्षा में नकल करने वाले छात्रों को जेल भेजा जाने लगा। इसका असर यह हुआ कि उस साल बोर्ड परीक्षाओं में जरा भी नकल नहीं हुई और छात्रों का पासिंग परसेंटेज काफी गिर गया।
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