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पहियों पर कक्षाएं: जगह की ऐसी कमी कि बस में खोलना पड़ा स्कूल

Mon, 21 Oct 2019 11:41 AM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Mon, 21 Oct 2019 11:41 AM IST
सार

  • स्कूल भवन में जगह की कमी हुई तो बस को ही बना दिया क्लासरूम
  • सफल प्रयोग के बाद और भी बसों को स्कूल में बदलने की योजना

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School on wheels, Bus converted into schools classroom by AP govt after space constraint
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media

विस्तार

अब इसे देश में शिक्षा के खस्ता हालात का परिणाम कहें या विपरीत परिस्थितियों में भी पढ़ने-पढ़ाने की जिद। नजरिए अलग-अलग हो सकते हैं। लेकिन ये पहल सराहनीय जरूर है। जब स्कूल के भवन में छात्रों के बैठने और पढ़ने के लिए जगह की कमी हो गई, तो सरकार ने एक बस को ही स्कूल में बदल दिया। पहियों पर चलने वाली इन कक्षाओं (School on Wheels) की शुरुआत अरुणाचल प्रदेश में की गई है।

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किस तरह सजी है बस, आगे देखें तस्वीर

School on wheels, Bus converted into schools classroom by AP govt after space constraint
बस में बना स्कूल - फोटो : twitter

अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले में प्रशासन ने एक पुरानी बेकार पड़ी बस को क्लासरूम का लुक दिया है। बस की सीटें हटाकर इसमें टेबल, कुर्सियां और स्टेशनरी सजा दिए गए हैं।

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बस को बाहर से पेंट किया गया है और इस पर भारत का नक्शा, राष्ट्रीय पशु, मनुष्य के एनाटोमी के चित्र बनाए गए हैं।

जगह की कमी से बढ़ते हैं ड्रॉपआउट

इस बारे में जिले के एक अधिकारी का कहना है कि 'स्कूलों में जगह की कमी बच्चों द्वारा पढ़ाई छोड़ने का एक बड़ा कारण है। अक्सर स्कूलों के भवन में जगह की कमी के कारण जूनियर्स को सीनियर्स के साथ बैठना पड़ता है। इससे सीनियर और जूनियर दोनों की पढ़ाई पर नकारात्मक असर होता है। अंततः वे स्कूल छोड़ देते हैं। इस तरह स्कूल ड्रॉपआउट की संख्या भी बढ़ती है।' 

अधिकारी ने बताया कि बस में स्कूल का आइडिया एक सरकारी प्राथमिक स्कूल के छात्रों के लिए शुरू किया गया है। छात्रों को यह काफी पसंद भी आ रहा है। वह पहले से ज्यादा उत्सुकता के साथ कक्षाएं करने के लिए आ रहे हैं। 

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लोहित के डिप्टी कमिश्नर प्रिंस धवन ने इस बारे में कहा कि इस पहल से न सिर्फ जगह की कमी की समस्या हल हुई है, बल्कि बच्चों के बीच खेल-खेल में सीखने की कला भी शुरू हुई है। अब अक्सर बच्चों को कक्षाओं के बाद भी यहां वक्त बिताते देखा जाता है।

जिला प्रशासन इस प्रयोग की सफलता को देखते हुए और भी बसों को कक्षाओं में बदलने की तैयारी कर रहा है।

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