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Row over Hindi: एनईपी में नहीं है त्रिभाषा की अनुशंसा, मराठी साहित्य महामंडल ने जताई आपत्ति; पढ़ें पूरी खबर

Thu, 19 Jun 2025 12:44 PM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शाहीन परवीन Updated Thu, 19 Jun 2025 12:44 PM IST
सार

Third Language in Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार द्वारा कक्षा 1 से 5 तक त्रिभाषा फार्मूला लागू करने के फैसले पर मराठी साहित्य महामंडल ने आपत्ति जताई है। संस्था का कहना है कि नई शिक्षा नीति में इसकी अनुशंसा नहीं की गई है।

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Row over Hindi: Marathi literary body opposes three-language formula
Row over Hindi - फोटो : mumbaimarathisahityasangh.com/akhil-bhartiya-marathi-sahitya-mahamandal/

विस्तार

Row over Hindi: मराठी साहित्य की प्रमुख संस्था अखिल भारतीय मराठी साहित्य महामंडल ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा कक्षा 1 से 5 तक त्रिभाषा फार्मूला लागू करने के फैसले का विरोध किया है और दावा किया है कि नयी शिक्षा नीति इसकी अनुशंसा नहीं करती है।

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यह बयान तब आया है जब कांग्रेस और राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने भी मंगलवार को जारी सरकार के संशोधित आदेश का विरोध किया। इस आदेश में कहा गया है कि कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को सामान्य रूप से तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा।
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शिक्षकों की कमी और गुणवत्ता पर उठे सवाल

महामंडल की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है, "(एनईपी में) यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि कक्षा 6 से तीसरी भाषा शुरू की जानी चाहिए।"

इसमें तीसरी भाषा पढ़ाने की आवश्यकता पर भी सवाल उठाया गया है, जब कई स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं और उच्च कक्षाओं के छात्रों को कक्षा 2 के स्तर की मराठी पुस्तकें पढ़ने में भी कठिनाई होती है।

इसमें दावा किया गया है कि, "शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के बजाय, तीसरी भाषा को अनिवार्य बनाने का प्रयास किया जा रहा है।"

हालांकि राज्य सरकार ने यह प्रावधान किया है कि छात्र हिंदी के स्थान पर कोई अन्य भारतीय भाषा चुन सकते हैं, लेकिन यह व्यावहारिक रूप से असंभव होगा, क्योंकि इन भाषाओं के शिक्षकों को संबंधित राज्य से लाना होगा, जो बहुत कठिन है।

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हिंदी थोपने का आरोप, सरकार ने दी सफाई

महामंडल ने दावा किया कि हिंदी के प्रति उसका विरोध सांस्कृतिक कारणों से है, क्योंकि मराठी पर हिंदी का "आक्रमण" बढ़ रहा है।

याचिका में यह भी पूछा गया कि महाराष्ट्र सरकार ने ऐसी नीति क्यों अपनाई है, जबकि किसी अन्य राज्य में कक्षा एक से हिंदी अनिवार्य नहीं है।

मंगलवार को जारी एक सरकारी प्रस्ताव (GR) में कहा गया है कि हिंदी अनिवार्य होने के बजाय "सामान्य रूप से" तीसरी भाषा होगी, लेकिन इसमें यह विकल्प भी दिया गया है कि यदि किसी स्कूल में प्रति कक्षा 20 विद्यार्थी कोई अन्य भारतीय भाषा सीखने की इच्छा व्यक्त करते हैं तो वे इसे छोड़ सकते हैं।

मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने बुधवार को कहा, "हमने पहले हिंदी को अनिवार्य कर दिया था, लेकिन कल जारी सरकारी आदेश में उस अनिवार्यता को हटा दिया गया है... छात्र अब तीसरी भाषा के रूप में किसी भी भारतीय भाषा का चयन कर सकते हैं।"
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