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Maharashtra Language Dispute: राज ठाकरे का स्कूलों से आह्वान, बोले- सरकार की भाषा विभाजन की नीति का करें विरोध
Wed, 18 Jun 2025 02:44 PM IST
शिवम गर्ग
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवम गर्ग
Updated Wed, 18 Jun 2025 02:44 PM IST
सार
Maharashtra Hindi Language Dispute: राज ठाकरे ने महाराष्ट्र सरकार पर हिंदी थोपने का आरोप लगाते हुए स्कूलों से अपील की है कि वे भाषा विभाजन की इस छुपी हुई साजिश का विरोध करें।
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राज ठाकरे
- फोटो : ANI
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विस्तार
Hindi Language Dispute: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने महाराष्ट्र सरकार की नई भाषा नीति पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सरकार द्वारा कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में "सामान्यतः" अनिवार्य करने के फैसले पर उन्होंने कहा कि यह कदम एक छुपी हुई साजिश है, जिसका मकसद मराठी समाज को कमजोर करना और भाषा के नाम पर विभाजन पैदा करना है।
राज ठाकरे ने कहा, "हिंदी कुछ राज्यों की राजभाषा हो सकती है, लेकिन महाराष्ट्र की पहचान मराठी से है। ऐसे में इस पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।" उन्होंने स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों से अपील की कि वे इस फैसले का विरोध करें और सरकार के इस "छुपे एजेंडे" को असफल करें।
Third Language in Maharashtra: महाराष्ट्र में हिंदी होगी तीसरी भाषा, अन्य भाषा के लिए चाहिए कम से कम 20 छात्र
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इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ठाकरे ने कहा, "हिंदी तो पहले से ही उच्च कक्षाओं में एक विकल्प के रूप में थी। उसे छोटे बच्चों पर क्यों थोपा जा रहा है?" उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में हिंदी को अनिवार्य करने की कोई बात नहीं है, और इसका निर्णय राज्यों पर छोड़ा गया है।
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राज ठाकरे ने कहा, "हिंदी कुछ राज्यों की राजभाषा हो सकती है, लेकिन महाराष्ट्र की पहचान मराठी से है। ऐसे में इस पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।" उन्होंने स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों से अपील की कि वे इस फैसले का विरोध करें और सरकार के इस "छुपे एजेंडे" को असफल करें।
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Third Language in Maharashtra: महाराष्ट्र में हिंदी होगी तीसरी भाषा, अन्य भाषा के लिए चाहिए कम से कम 20 छात्र
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सरकार का तर्क और एमएनएस की आपत्ति
महाराष्ट्र सरकार ने 'स्टेट करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन 2024' के तहत आदेश जारी किया है कि कक्षा 1 से 5 तक मराठी और इंग्लिश मीडियम स्कूलों में छात्रों को सामान्यतः तीसरी भाषा के रूप में हिंदी पढ़ाई जाएगी। हालांकि, यदि किसी स्कूल में किसी अन्य भारतीय भाषा को पढ़ाने के लिए प्रति कक्षा कम से कम 20 छात्र इच्छुक हों, तो उस भाषा को पढ़ाने की व्यवस्था की जा सकती है।इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ठाकरे ने कहा, "हिंदी तो पहले से ही उच्च कक्षाओं में एक विकल्प के रूप में थी। उसे छोटे बच्चों पर क्यों थोपा जा रहा है?" उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में हिंदी को अनिवार्य करने की कोई बात नहीं है, और इसका निर्णय राज्यों पर छोड़ा गया है।
राजनीतिक स्वार्थ का आरोप, भाषा विभाजन का खतरा
राज ठाकरे ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार मराठी लोगों को गुमराह कर रही है और यह निर्णय एक "बैकडोर पॉलिसी" के तहत लिया गया है, जिसे पहले वापस लेने की बात कही गई थी।उन्होंने सवाल उठाया कि कहीं यह आईएएस लॉबी की साजिश तो नहीं, जो मराठी सीखने से बचना चाहती है। ठाकरे ने साफ कहा कि यदि सरकार ने स्कूलों पर कोई दबाव बनाया, तो एमएनएस उनके साथ "चट्टान की तरह" खड़ी रहेगी।
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