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Hindi News ›   Education ›   Maharashtra Government Declares Hindi as Third Language; Minimum 20 Students Required to Opt Another Language

Third Language in Maharashtra: महाराष्ट्र में हिंदी होगी तीसरी भाषा, अन्य भाषा के लिए चाहिए कम से कम 20 छात्र

Wed, 18 Jun 2025 09:53 AM IST
शिवम गर्ग एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवम गर्ग Updated Wed, 18 Jun 2025 09:53 AM IST
सार

Third Language in Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार के नए गवर्नमेंट रिजोल्यूशन के अनुसार हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा। नई भाषा सीखने के इच्छुक छात्रों की संख्या कम से कम 20 होनी चाहिए।

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Maharashtra Government Declares Hindi as Third Language; Minimum 20 Students Required to Opt Another Language
देवेंद्र फडणवीस, सीएम, महाराष्ट्र - फोटो : ANI

विस्तार

Third Language in Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार ने एक नई शैक्षणिक पहल के तहत बड़ा निर्णय लिया है। सरकार द्वारा जारी नवीनतम गवर्नमेंट रिजोल्यूशन (GR) के अनुसार, अब राज्य के स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा। यदि कोई छात्र किसी अन्य भाषा को सीखना चाहता है, तो स्कूल को कम से कम 20 इच्छुक छात्रों की आवश्यकता होगी।
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सरकारी आदेश में कही गई हैं ये बातें

सरकार की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य पाठ्यक्रम रूपरेखा स्कूल शिक्षा 2024 के अनुसार, अब से कक्षा 1 से 5 तक मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में तीसरी भाषा के रूप में हिंदी अनिवार्य होगी। अन्य माध्यम के स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक तीन भाषाएं मराठी, अंग्रेजी और हिंदी पढ़ाई जाएगी। कक्षा 6 से 10 के लिए भाषा नीति राज्य पाठ्यक्रम रूपरेखा-स्कूल शिक्षा के अनुसार होगी। 
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हिंदी के बजाय दूसरी भाषा को भी चुन सकते हैं छात्र

सरकारी आदेश में कहा गया है कि मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक के लिए हिंदी अब से तीसरी भाषा होगी, लेकिन अगर छात्र हिंदी के बजाय तीसरी भाषा के रूप में अन्य भारतीय भाषाओं में से किसी एक को पढ़ाने की इच्छा व्यक्त करते हैं तो उन छात्रों को उस भाषा को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि उनके स्कूल में ऐसे छात्रों की संख्या जो हिंदी के बजाय तीसरी भाषा के रूप में अन्य भाषाओं को पढ़ाने की इच्छा व्यक्त करते हैं, कक्षावार कम से कम 20 होनी चाहिए। 
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पहले नहीं थी हिंदी अनिवार्य

इससे पहले स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने अप्रैल 2025 में बयान दिया था कि हिंदी को कक्षा 1 से 5 तक अनिवार्य नहीं किया जाएगा। बाद में उन्होंने यह भी कहा था कि "हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में लागू करने का निर्णय फिलहाल स्थगित है"। लेकिन अब जारी हुआ आदेश सरकार की पूर्व स्थिति के विपरीत दिखाई दे रहा है, जिससे फिर से विवाद खड़ा हो गया है।

विरोध क्यों हो रहा है?

मराठी भाषा अभ्यास केंद्र के दीपक पवार ने कहा, "यह मराठी भाषा और संविधान के संघीय ढांचे के साथ धोखा है। अगर आज हम चुप रहे, तो आगे केंद्र से अन्य राज्यों की भाषाओं पर भी असर पड़ेगा।"

पूर्व शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष वसंत कल्पांडे ने भी चिंता जताई और कहा, "हिंदी और मराठी की लिपियां मिलती-जुलती जरूर हैं, लेकिन दोनों में बारीक अंतर है, जो छोटे बच्चों के लिए समझना मुश्किल होगा। यह विकल्प नहीं, बल्कि मजबूरी की तरह है।"
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