एनएसपी छात्रवृत्ति 2026: अब एक से ज्यादा स्कॉलरशिप्स का फॉर्म भी भर सकेंगे छात्र, और क्या बदलाव हुए? जानें
राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से छात्रवृत्ति के नियमों में बदलाव किया गया है। अब पात्र छात्रों को मेरिट और कल्याण आधारित स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने से सिर्फ दूसरी छात्रवृत्ति मिलने के कारण नहीं रोका जाएगा।
विस्तार
शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) पर छात्रवृत्ति के नियमों में बदलाव किया गया है। अब अगर कोई छात्र कल्याण-आधारित छात्रवृत्ति प्राप्त कर रहा है और बाद में योग्यता-आधारित छात्रवृत्ति के लिए पात्र हो जाता है, तो उसे योग्यता-आधारित छात्रवृत्ति से सिर्फ इस वजह से वंचित नहीं किया जाएगा। इसी तरह, योग्यता-आधारित छात्रवृत्ति पाने वाले छात्र के लिए भी यह नियम लागू होगा।
सरकार ने यह बदलाव छात्रवृत्ति योजनाओं को लेकर अलग-अलग विभागों के बीच बनी असमंजस की स्थिति को दूर करने के लिए किया है। वर्ष 2024-25 में NSP पर डुप्लिकेशन हटाने की प्रक्रिया के दौरान कई छात्रों को गलती से डुप्लिकेट लाभार्थी के रूप में चिह्नित किया गया था। CBSE ने सभी संबद्ध स्कूलों से इन नए नियमों की जानकारी पात्र छात्रों, अभिभावकों और अन्य संबंधित लोगों तक पहुंचाने को कहा है।
छात्रवृत्ति योजनाओं को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा जाएगा
सरकार ने छात्रवृत्ति योजनाओं के बीच दोहराव और भ्रम को दूर करने के लिए इनके नियमों में एकरूपता लाने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि कौन-सी योजना किस तरह के छात्रों के लिए है और उसका मकसद क्या है। इसके तहत छात्रवृत्ति को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है:
- मेरिट-आधारित स्कॉलरशिप: ये स्कॉलरशिप छात्रों के अच्छे शैक्षणिक प्रदर्शन, रैंक या प्रतियोगी/क्वालीफाइंग परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर दी जाती हैं। इनका उद्देश्य छात्रों की योग्यता और बेहतर प्रदर्शन को बढ़ावा देना है। इसमें नेशनल मीन्स-कम-मेरिट स्कॉलरशिप स्कीम (NMMSS), सेंट्रल सेक्टर स्कॉलरशिप स्कीम और INSPIRE जैसी योजनाएं शामिल हैं।
- कल्याण-आधारित स्कॉलरशिप: इनका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर या खास सामाजिक वर्गों के छात्रों को आर्थिक मदद देना है, ताकि उन्हें पढ़ाई जारी रखने में सहायता मिल सके। SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक छात्रों के लिए चलने वाली प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप इसके उदाहरण हैं।
मेरिट और वेलफेयर स्कॉलरशिप दोनों का लाभ मिल सकेगा
अब अगर किसी छात्र को पहले से कल्याण-आधारित स्कॉलरशिप मिल रही है और बाद में वह मेरिट-आधारित स्कॉलरशिप के लिए भी योग्य हो जाता है, तो उसे मेरिट स्कॉलरशिप देने से मना नहीं किया जाएगा। इसी तरह, मेरिट स्कॉलरशिप पाने वाला छात्र अगर कल्याण-आधारित स्कॉलरशिप के लिए पात्र होता है, तो उसे भी केवल इस वजह से रोका नहीं जाएगा।
आवेदन प्रक्रिया में भी बदलाव
आवेदन जमा करते समय
- पहली बार आवेदन में दी गई सामान्य जानकारी सुरक्षित रहेगी और आगे के आवेदनों में दोबारा इस्तेमाल होगी।
- बाद में किसी दूसरी योजना के लिए आवेदन करने पर छात्र को सिर्फ उस योजना से जुड़ी जानकारी भरनी होगी और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे।
- अगर आवेदन में कोई कमी पाई जाती है, तो छात्र केवल योजना से जुड़ी जानकारी में बदलाव कर सकेगा।
- सामान्य, शैक्षणिक, संस्थान या कोर्स से जुड़ी जानकारी बदलने के लिए पहले जमा किए गए सभी आवेदन वापस लेने होंगे।
L1 वेरिफिकेशन के दौरान
- पहले आवेदन के वेरिफिकेशन में अपडेट की गई ट्यूशन फीस, एडमिशन फीस और अन्य नॉन-रिफंडेबल फीस की जानकारी बाद के आवेदनों में अपने आप भर जाएगी।
- संबंधित अधिकारी को छात्र के सभी आवेदनों और उनके स्टेटस की जानकारी दिखाई देगी।
- आवेदन में कमी होने पर उसे दो कैटेगरी में बांटा जाएगा-योजना से जुड़ी कमी और सामान्य/शैक्षणिक जानकारी से जुड़ी कमी।
L2 वेरिफिकेशन के दौरान
- संबंधित L2 नोडल अधिकारियों को छात्र के सभी आवेदनों और उनके स्टेटस की जानकारी एक साथ दिखाई देगी।
- इससे एक छात्र द्वारा अलग-अलग कैटेगरी की स्कॉलरशिप के लिए किए गए कई आवेदनों की जांच में एकरूपता आएगी।
- उदाहरण के लिए, अगर छात्र ने एक वेलफेयर-बेस्ड और एक मेरिट-बेस्ड स्कॉलरशिप के लिए आवेदन किया है, तो दोनों योजनाओं के संबंधित अधिकारियों को दूसरे आवेदन की जानकारी भी दिखाई देगी।
- अगर किसी आवेदन में सामान्य या शैक्षणिक जानकारी से जुड़ी कमी मिलती है, तो छात्र के बाकी सभी आवेदन अपने आप 'रेड फ्लैग' कैटेगरी में चले जाएंगे।
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