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NEET Controversy: नीट रिजल्ट पर सुप्रीम फैसला! सुप्रीम कोर्ट ने काउंसलिंग पर रोक लगाने से किया इंकार

Thu, 13 Jun 2024 11:21 AM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शाहीन परवीन Updated Thu, 13 Jun 2024 11:21 AM IST
सार

NEET Controversy: नीट यूजी रिजल्ट के बाद दाखिल की गई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि, ग्रेस मार्क्स पाने वाले 1563 छात्रों को फिर से परीक्षा देनी होगी।

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Neet UG 2024 Result Hearing Decision to Award Grace Marks to 1563 Candidates of Neet Exam Cancelled Neet News
NEET, Supreme Court - फोटो : अमर उजाला, ग्राफिक

विस्तार

NEET Controversy: सुप्रीम कोर्ट ने आज के फैसले में याचिकाकर्ता को कहा कि आपकी बात एनटीए ने मान ली है। एनटीए ग्रेस मार्क को हटा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा की केवल वो छात्र ही परीक्षा में शामिल होंगे जिनको ग्रेस मार्किंग मिली थी। 

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इसके अलावा, एनटीए ने कहा है कि 23 जून को दोबारा उन 1563 छात्रों के लिए फिर से परीक्षा आयेजित होगी। उसके बाद काउंसलिंग होगी।

छात्रों के पास दो विकल्प
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान केवल 1563 छात्रों को दो विकल्प दिए हैं, जिनके परिणामों में ग्रेस मार्क्स के बाद अनियमितता आरोप लग रहे थे। एनटीए ने कहा, ये उम्मीदवार बिना ग्रेस मार्क्स के साथ नीट यूजी काउंसलिंग में शामिल हो सकते हैं या फिर से नीट पर में शामिल हो सकते हैं।


आपको बता दें, एनटीए केवल 6 एग्जाम सेंट्रर्स पर उपस्थित हुए 1563 छात्रों के लिए ही दोबारा परीक्षा आयोजित करेगा। ये सभी छात्र 23 जून, 2024 को फिर से परीक्षा दे सकेंगे। इनके नतीजे 30 जून को आएंगे।

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अब इस दिन होगी अगली सुनवाई 
अब आठ जुलाई को इस मामले पर सुनवाई होगी। जस्टिस विक्रम सेठ और संदीप मेहता की अवकाशकालीन बेंच ने सुबह 10.30 बजे मामले की सुनवाई की।

 
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तीन याचिकाएं कौन- सी थी?
11 जून को मामले की सुनवाई करने वाली शीर्ष अदालत ने एनईईटी काउंसलिंग 2024 पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, हालांकि मामले पर एनटीए से प्रतिक्रिया मांगी। यह भी नोट किया गया कि 'परीक्षा की पवित्रता प्रभावित हुई है'। बाद में एनटीए ने तर्क दिया कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पवित्रता से समझौता नहीं किया गया है और बताया गया कि अनुचित साधनों के 63 मामले सामने आए थे, जिनमें से 23 छात्रों को परीक्षा से बाहर कर दिया गया है।

इनमें से एक याचिका एडटेक फर्म 'फिजिक्स वाला' के मुख्य कार्यकारी द्वारा दायर की गई थी, जिन्होंने पहले कहा था कि उनकी जनहित याचिका में ग्रेस मार्क्स देने, एनटीए की पारदर्शिता, पेपर लीक और अन्य विवादों को चुनौती दी गई थी।

दूसरी याचिका एसआईओ सदस्यों अब्दुल्ला मोहम्मद फैज और शेख रोशन मोहिद्दीन द्वारा दायर की गई थी, जिसमें एनईईटी पुन: परीक्षा की मांग करते हुए कहा गया था कि एनईईटी परिणामों में 720 में से 718 और 719 अंक 'सांख्यिकीय रूप से असंभव' हैं।

तीसरी याचिका एनईईटी अभ्यर्थी जरिपिति कार्तिक द्वारा दायर की गई थी, जिसमें परीक्षा के दौरान समय की हानि के लिए ग्रेस मार्क्स को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि "अनुग्रह अंक देने के लिए उपयोग की जाने वाली सामान्यीकरण विधि केवल उन प्रश्नों की संख्या तक ही विस्तारित हो सकती है जो समय की हानि के अनुपात में अनुत्तरित छोड़े जा सकते हैं, यह देखते हुए कि प्रत्येक प्रश्न में समान अंक वेटेज है; इसलिए प्रत्येक प्रश्न का उत्तर देने के लिए समान समय वितरण माना जा सकता है।"

इस बीच, एमबीबीएस उम्मीदवारों ने मेहनती छात्रों के लिए मानसिक उत्पीड़न और तनाव का हवाला देते हुए एनईईटी पुन: परीक्षा 2024 को रोकने के लिए एक ऑनलाइन याचिका शुरू की है।

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