कोलकाता: अटेंडेंस की शर्त पर छात्रों का विरोध, सुरेंद्रनाथ लॉ कॉलेज की वाइस प्रिंसिपल ने दिया इस्तीफा
कोलकाता के सुरेंद्रनाथ लॉ कॉलेज में अटेंडेंस की शर्त को लेकर छात्रों ने विरोध किया। छात्रों के विरोध के बाद कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
विस्तार
शुक्रवार को सुरेंद्रनाथ लॉ कॉलेज की वाइस प्रिंसिपल मोहम्मदी तरन्नुम ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। छात्रों का एक गुट सेमेस्टर परीक्षा में शामिल होने के लिए जरूरी अटेंडेंस की शर्त का विरोध कर रहा था। विरोध के दौरान छात्रों ने वाइस प्रिंसिपल को करीब 23 घंटे तक घेरे रखा और उनके कमरे के बाहर धरना दिया। इसके बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
तरन्नुम ने क्या कहा?
तरन्नुम ने पत्रकारों को बताया कि उन्हें इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने कलकत्ता यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट को अपना इस्तीफा भेजा। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि वह "साजिश का शिकार" बनीं और घेराव के दौरान प्रदर्शनकारियों ने उन्हें पानी, बिजली और खाने जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं लेने दीं।
"कुछ लोग, जो छात्रों में अनुशासन लाने के मेरे कदम के खिलाफ थे, मुझे हटाने पर तुले हुए थे। मैं उच्च शिक्षा मंत्री से अपील करती हूँ कि वे इस गलत स्थिति को ठीक करें। मैं परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता में विश्वास रखती हूं।"
"छात्रों के एक वर्ग के आरोपों के विपरीत, मेरा TMC से कोई संबंध नहीं है। हां, हो सकता है कि मैं अतीत में वामपंथी राजनीति से जुड़ी रही हूं, लेकिन मैंने कभी किसी के हित के लिए काम नहीं किया... मुझे छात्रों के दबाव के कारण इस्तीफा देना पड़ा"
75% अटेंडेंस की शर्त पर क्यों हुआ विवाद?
- तरन्नुम ने दावा किया कि उन्होंने मामले की जानकारी गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन कौस्तव बागची, उच्च शिक्षा विभाग और कलकत्ता विश्वविद्यालय को दी थी।
- उन्होंने कहा कि गतिरोध को सुलझाने के लिए उन्होंने संबंधित अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की, लेकिन कोई भी आगे नहीं आया।
- कैंपस से निकलते समय छात्रों के एक गुट ने नारेबाजी की और उनकी कार को घेर लिया।
- विवाद की शुरुआत कॉलेज के उस नोटिस से हुई, जिसमें 75 प्रतिशत से कम अटेंडेंस वाले छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं देने की बात कही गई थी।
- इसके बाद परीक्षा फॉर्म भरने को लेकर भी विवाद बढ़ गया।
- प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, भाजपा विधायक और वकील कौस्तव बागची ने मामले में हस्तक्षेप किया।
- बागची के मुताबिक, 75 प्रतिशत से कम अटेंडेंस वाले छात्रों को स्व-घोषणा पत्र जमा करने के बाद परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जा सकती है।
- हालांकि, परीक्षा फॉर्म भरने के दौरान अटेंडेंस का मुद्दा विवाद बना रहा।
- बाद में यह तय किया गया कि कम से कम 40 प्रतिशत अटेंडेंस वाले छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाएगी।
बागची ने वाइस प्रिंसिपल पर छात्रों को परेशान करने का आरोप लगाया
वाइस प्रिंसिपल पर मामले को भड़काने का आरोप लगाते हुए बागची ने कहा, "उन्होंने छात्रों के खिलाफ एक व्यवस्था बना दी थी। 75 प्रतिशत उपस्थिति का मानदंड तार्किक है, लेकिन छात्रों को परेशान किया गया और कई मुद्दों पर आवाज उठाने के कारण वे दबाव में रहे। अधिकारी उन छात्रों के साथ खुले और भय-मुक्त माहौल में बातचीत क्यों शुरू नहीं करते जो पात्रता मानदंड पूरा करने के बाद परीक्षा में बैठने के इच्छुक हैं?"
छात्रों ने 40% से कम अटेंडेंस को लेकर क्या दावा किया?
- प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने दावा किया कि 75 प्रतिशत अटेंडेंस का नियम लागू होने पर करीब 900 में से 600 छात्र परीक्षा नहीं दे पाएंगे।
- छात्रों के अनुसार, एक सेमेस्टर में 180 में से 144 छात्रों की अटेंडेंस 40 प्रतिशत से कम थी।
- कॉलेज प्रशासन और छात्रों ने गुरुवार को कौस्तव बागची के साथ बैठक की।
- बैठक के बाद तय हुआ कि छात्र स्व-घोषणा के आधार पर परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।
- हालांकि, इस फैसले के बाद भी विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ और कॉलेज परिसर में विरोध-प्रदर्शन जारी रहा।
कमेंट
कमेंट X