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NEET PG 2025: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मेडिकल कॉलेजों को पहले बतानी होगी फीस; सीट ब्लॉक पर लगेगी पेनल्टी

Thu, 22 May 2025 08:27 PM IST
शिवम गर्ग एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवम गर्ग Updated Thu, 22 May 2025 08:27 PM IST
सार

NEET PG Counselling 2025: सुप्रीम कोर्ट ने नीट पीजी काउंसलिंग के लिए आदेश दिया कि सभी मेडिकल कॉलेजों को फीस स्ट्रक्चर पहले से बताना होगा। वहीं कैंडिडेट ने यदि सीट ब्लॉक किया तो उन्हें अगले एग्जाम से डिस्क्वालिफाई कर दिया जाएगा।

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NEET PG 2025: Supreme Court Decision Medical Colleges Must Disclose Fees in Advance, Penalty on Seat Blocking
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : ANI

विस्तार

NEET PG Counselling 2025 New Rules: नीट पीजी में सीट ब्लॉकिंग की बढ़ती शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए एक अहम आदेश जारी किया है। अब देश की सभी प्राइवेट और डीम्ड यूनिवर्सिटियों को काउंसलिंग शुरू होने से पहले अपनी पूरी फीस संरचना (ट्यूशन फीस, हॉस्टल फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट और अन्य शुल्क) सार्वजनिक करनी होगी।
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जस्टिस जे.बी. पारडीवाला और आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि सीट ब्लॉकिंग की यह प्रथा केवल एक अनैतिक कार्य नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कमजोरियों को उजागर करती है। इसमें पारदर्शिता की कमी, शासन में समन्वय की कमी और नीतियों के ढीले पालन जैसी समस्याएं शामिल हैं।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश की मुख्य बातें

  • सभी यूनिवर्सिटियों को काउंसलिंग से पहले फीस का खुलासा करना अनिवार्य होगा।
  • नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के तहत एक केंद्रीकृत फीस रेगुलेशन सिस्टम विकसित किया जाएगा।
  • सीट ब्लॉक करने वाले छात्रों और कॉलेजों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी- जैसे सिक्योरिटी डिपॉजिट की जब्ती, भविष्य की नीट पीजी परीक्षाओं से अयोग्यता, और कॉलेज का ब्लैकलिस्ट होना।
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  • ऑल इंडिया कोटा और राज्य स्तरीय काउंसलिंग को समान कैलेंडर के तहत लाने का निर्देश ताकि सीट ब्लॉकिंग को रोका जा सके।
  • काउंसलिंग के दूसरे राउंड के बाद छात्रों को बेहतर सीट पर अपग्रेड का विकल्प मिलेगा, लेकिन नए छात्रों के लिए काउंसलिंग नहीं खोली जाएगी।
  • रॉ स्कोर, उत्तर कुंजी और नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला को सार्वजनिक करने का निर्देश भी दिया गया है ताकि परीक्षा में पारदर्शिता बनी रहे।

सीट ब्लॉकिंग क्यों है बड़ा मुद्दा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीट ब्लॉकिंग की वजह से असल में उपलब्ध सीटों की गिनती गलत हो जाती है, जिससे योग्य छात्रों को नुकसान होता है। यह प्रक्रिया मेरिट के बजाय भाग्य पर आधारित होती जा रही है, जो मेडिकल शिक्षा में असमानता को बढ़ावा देती है।


यह फैसला उत्तर प्रदेश सरकार और डायरेक्टर जनरल मेडिकल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग, लखनऊ की ओर से दाखिल याचिका पर आया है। याचिका में इलाहाबाद हाई कोर्ट के 2018 के फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें दो छात्रों को मुआवजा देने और सीट ब्लॉकिंग के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए गए थे।
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