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ICAI CA: 71 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी ने पास की सीए परीक्षा, मिली नई पहचान

Sat, 12 Jul 2025 08:33 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Sat, 12 Jul 2025 08:33 PM IST
सार

ICAI CA 2025: जयपुर के 71 वर्षीय रिटायर्ड बैंक मैनेजर ताराचंद अग्रवाल ने सीए परीक्षा पास कर युवाओं के लिए मिसाल कायम की। पत्नी के निधन के बाद पढ़ाई की ओर रुख किया और तीन साल की मेहनत के बाद सफलता हासिल की।
 

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Jaipur’s 71-year-old retired banker clears CA exam, inspired by Gita and supported by family
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

Jaipur: सीए (चार्टर्ड अकाउंटेंट) की परीक्षा युवाओं के लिए चुनौती मानी जाती है, लेकिन 71 वर्षीय ताराचंद अग्रवाल ने इसे अपने दृढ़ संकल्प और मेहनत से पार कर एक मिसाल कायम की है। राजस्थान के जयपुर निवासी और बैंक से सेवानिवृत्त अग्रवाल ने 6 जुलाई को सीए फाइनल परीक्षा पास की।

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ताराचंद अग्रवाल का जन्म हनुमानगढ़ जिले के संगरिया कस्बे में एक किसान-व्यवसायी परिवार में हुआ था। वे आठ भाई-बहनों में चौथे नंबर पर थे। प्रारंभिक शिक्षा संगरिया में पूरी करने के बाद उन्होंने 1974 में दर्शनाजी से विवाह किया और 1976 में स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर (अब एसबीआई) में क्लर्क के रूप में नियुक्त हुए। 38 वर्षों की सेवा के बाद वे 2014 में सहायक महाप्रबंधक (एजीएम) के पद से सेवानिवृत्त हुए।
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पत्नी की मौत के बाद जीवन शून्यता से भर गया था

अग्रवाल का कहना है कि 2020 में पत्नी के निधन के बाद उनका जीवन शून्यता से भर गया था। बच्चे और पोते-पोतियां साथ थे, लेकिन मन नहीं लगता था। बच्चों की सलाह पर उन्होंने भगवद गीता पढ़ना शुरू किया और यहीं से उन्हें फिर से पढ़ाई में रुचि हुई।

जब उन्होंने पीएचडी करने की इच्छा जताई, तो बच्चों ने उन्हें सीए करने की सलाह दी। बच्चों ने कहा कि यह कठिन है लेकिन इससे पहचान मिलेगी। पोती ने कहा, "अगर आप मुझे गाइड कर सकते हैं, तो खुद क्यों नहीं कर सकते?"

इसके बाद जुलाई 2021 में उन्होंने सीए में पंजीकरण कराया। मई 2022 में फाउंडेशन, जनवरी 2023 में इंटरमीडिएट पास किया और मई 2024 में फाइनल में असफल रहने के बाद इस बार सफलता प्राप्त की।
 

रोज 10 घंटे करते थे पढ़ाई

उन्होंने प्रतिदिन 10 घंटे तक अध्ययन किया, कंधे के दर्द से जूझे, और लिखने का नियमित अभ्यास किया। न कोचिंग ली, न कोई प्रोफेशनल मदद। किताबें, यूट्यूब वीडियो, और छोटे बेटे की जनरल स्टोर की शांति ही उनका साधन बनी।

ताराचंद ने बताया कि उनके बड़े बेटे ललित दिल्ली में सीए हैं और छोटे बेटे अमित टैक्स प्रैक्टिस में। दोनों ने उनके सफर में हर कदम पर साथ दिया। लैपटॉप दिलवाया, रजिस्ट्रेशन कराया, हर मोड़ पर हौसला बढ़ाया।"

उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय उस एक सीख को दिया जो उन्हें उनके चाचा ने दी थी, जिन्होंने उन्हें गीता पढ़ाई थी: “जो भी काम करो, उसे पूरी निष्ठा से करो। उन्होंने कहा, "मैं जो भी काम करता हूं, पूरे मन से करता हूं। यही गीता की शिक्षा है।"

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